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Guru Tegh Bahadur 350th Martyrdom Day: कौन थे गुरु तेग बहादुर? 350वीं शहीदी दिवस पर पढ़ें उनके अनमोल विचार

Guru Tegh Bahadur 350th Martyrdom Day: सिख धर्म के नौवें गुरु, गुरु तेग बहादुर जी का 350वां शहीदी दिवस इस साल 25 नवंबर 2025, मंगलवार को पूरे देश और विश्वभर के सिख समुदाय द्वारा श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाया जा रहा है।

गुरु तेग बहादुर जी को 'हिंद की चादर' कहा जाता है, क्योंकि उन्होंने लोगों की धार्मिक स्वतंत्रता, मानवाधिकारों और न्याय की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। उनका बलिदान भारतीय इतिहास का एक ऐसा अध्याय है जो साहस, त्याग और मानवता की मिसाल पेश करता है।

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कौन थे गुरु तेग बहादुर?

गुरु तेग बहादुर जी का जन्म 1 अप्रैल 1621 को अमृतसर में गुरु हरगोबिंद साहिब और माता नानकी जी के घर हुआ। बचपन में उनका नाम 'त्याग मल' था, लेकिन करतारपुर के युद्ध (1634) में दिखाई गई अद्भुत वीरता के बाद उनके पिता ने उनका नाम बदलकर 'तेग बहादुर' रखा-जिसका अर्थ है "तलवार का बहादुर"।
उन्होंने आध्यात्मिक शिक्षा के साथ-साथ सैन्य प्रशिक्षण भी प्राप्त किया और आगे चलकर सिख इतिहास के सबसे प्रेरणादायक व्यक्तित्वों में शामिल हुए।

1675 का बलिदान: भारत की धर्मनिरपेक्ष आत्मा की रक्षा

गुरु तेग बहादुर जी की शहादत का सबसे बड़ा कारण था-धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा। 1675 में मुगल सम्राट औरंगज़ेब द्वारा कश्मीरी पंडितों और अन्य धार्मिक समुदायों के ऊपर हो रहे अत्याचार के खिलाफ गुरु जी ने आवाज उठाई। उन्होंने कहा "धर्म की रक्षा के लिए यदि मेरा सिर भी चला जाए, तो भी मैं पीछे नहीं हटूंगा।"

दिल्ली में खुल्लम-खुल्ला विरोध करने के बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया और अंततः चांदनी चौक में वीरगति प्राप्त हुई। उनका बलिदान सिर्फ सिखों के लिए नहीं, बल्कि पूरे हिन्दुस्तान की धार्मिक आज़ादी की रक्षा के लिए था।

यह दिन हमें सिखाता है कि न्याय और सत्य के लिए खड़ा होना, इतिहास के सबसे बड़े साहसिक कदमों में से एक है। गुरु तेग बहादुर ने दिखाया कि मानवाधिकार-चाहे किसी भी धर्म या समुदाय के हों-सबकी रक्षा करना हर इंसान का कर्तव्य है। उनकी शहादत धार्मिक सद्भाव, समानता और मानवता की सबसे ऊँची सीख देती है।

गुरु तेग बहादुर जी के प्रेरणादायक उपदेश

गुरु जी की शिक्षाएँ आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं:

  • साहस डर का अभाव नहीं, बल्कि सही के लिए खड़े होने की शक्ति है।
  • घमंड पर नियंत्रण ही जीवन मुक्ति का मार्ग है।
  • सभी के प्रति दया रखें-घृणा समाज को नष्ट करती है।
  • सुख-दुख, मान-अपमान में समभाव रखना चाहिए।
  • धर्म का अर्थ सबके साथ अच्छा व्यवहार और सेवा है।
  • ईश्वर कहीं बाहर नहीं, हमारे भीतर है-हर जगह मौजूद है।
  • भय जीतने के लिए मन को मजबूत करें-जीत और हार सोच पर निर्भर करती है।
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