भारतीय होते हुए विदेशी करार दी गई महिला डिटेंशन सेंटर से आई बाहर, कहा- मुझे मुस्लिम होने की सजा मिली

गुवाहटी, दिसंबर 17। असम में गुवाहटी हाईकोर्ट के आदेश के बाद पिछले 2 महीने से डिटेंशन सेंटर में बंद 55 साल की हसीना भानु को रिहा कर दिया गया है। गुरुवार को हाईकोर्ट ने ट्रिब्यूनल कोर्ट के फैसले को बदलते हुए हसीना को रिहा करने का आदेश दिया था, जिसके बात कल रात ही हसीना भानु अपने घर वापस आ गईं।

Muslim women

इसी साल महिला को दिया गया था विदेशी करार

आपको बता दें कि असम के दरंग जिले की रहने वाली हसीना भानु 2 महीने से तेजपुर जेल के अंदर एक डिटेंशन सेंटर में बंद थी। महिला को विदेशी ट्रिब्यूनल के फैसले के आधार पर विदेशी करार देते हुए डिटेंशन सेंटर में रखा हुआ था। हैरानी वाली बात ये है कि इसी ट्रिब्यूनल ने साल 2016 में उसी महिला को भारतीय करार दिया था, लेकिन 2021 में ट्रिब्यूनल ने उसे विदेशी करार दे दिया। आखिरकार हाईकोर्ट ने ट्रिब्यूनल के फैसले को बदला और हसीना को रिहा करने का आदेश दिया।

मुस्लिम होने के कारण दी प्रताड़ना!

NDTV की खबर के मुताबिक, डिटेंशन सेंटर से बाहर आकर हसीना भानु ने कहा है कि उन्हें उनके धर्म (मुस्लिम) के आधार पर टारगेट (निशाना) किया गया है। हसीना दरांग जिले के श्यामपुर गांव की रहने वाली हैं। एनडीटीवी से बात करते हुए उन्होंने कहा कि जेल के अंदर डिटेंशन सेंटर में उन्हें बहुत प्रताड़ित किया जाता था, अंदर काफी हिंदु भी थे और कई मु्स्लिम भी, लेकिन मुझे लगता है कि मुझे मुस्लिम होने के कारण निशाना बनाया गया है।

'सरकार ने मेरे साथ ऐसा क्यों किया'

हसीना भानु हाईकोर्ट के आदेश से काफी खुश हैं। उन्होंने कहा कि पहले ट्रिब्यूनल कोर्ट ने मुझे भारतीय बताया था, फिर उसी कोर्ट ने मुझे विदेशी करार दे दिया था, लेकिन आज मैं फाइनली भारतीय हूं और काफी खुश हूं। हसीना भानु ने इस बातचीत के दौरान सरकार से सवाल भी किया। उन्होंने कहा कि मेरा सरकार से एक सवाल है कि आखिर मुझे इतना परेशान क्यों किया गया?

सरकार से मुआवजा मांग रहे हैं हसीना के पति

हसीना भानु के पति अयान अली ने बताया है कि उनकी पत्नी की नागरिकता को साबित करने का संघर्ष उनके लिए बहुत कठिन वक्त था। उनका कहना है कि इस संघर्ष ने उन्हें मानसिक रूप से काफी थका दिया है। अयान ने बताया कि उनकी पत्नी 2 महीने तक जेल में रहीं और वो भी बिना किसी कसूर के, ये हमारे लिए किसी मानसिक प्रताड़ना से कम नहीं है। 2016 के बाद से इस संघर्ष में हमारा पैसा भी काफी खर्च हुआ है। इसके लिए हमें अपनी जमीन तक बेचनी पड़ गई थी, अब जब मेरी पत्नी को भारतीय घोषित कर दिया गया है तो मैं सरकार से अनुरोध करता हूं कि मेरे परिवार को मुआवजा दिया जाए, घर में मेरे दो बच्चे भी हैं।

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