सरकार ने तय की समयसीमा, छह महीने में तय होंगे न्यायााधीशों के नाम
नई दिल्ली। देश भर की कोर्ट में न्यायाधीशों की नियुक्ति में की जा रही देरी को लेकर मुख्य न्यायााधीश टी एस ठाकुर की तरफ से सवाल उठाए जाने के बाद केंद्र सरकार जाग गई है।

केंद्र सरकार ने नया एमओपी जारी करते हुए कहा है कि कोलेजियम की तरफ से दिए गए नामों पर सरकर छह महीने में निर्णय ले लेगी।
इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक पहली बार ऐसा हो रहा है कि हाईकोर्ट और सुप्रीमकोर्ट में न्यायााधीशों की नियुक्ति को लेकर कोई समय सीमा सरकार की तरफ से तय की गई है।
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायााधीश ने सवाल उठाते हुए केंद्र सरकार को लपेटा था कि कोलेजियम की तरफ से नाम भेजने के बावजूद भी सरकार ने अभी तक न्यायााधीशों के नामों को फाइनल नहीं किया था। केंद्र सरकार की तरफ से ऐसा करने पर कोलेजियम नियुक्ति के लिए नए नामों को भी नहीं भेज सकता है।
तीन अगस्त को केंद्र सरकार की तरफ से मुख्य न्यायााधीश टीएस ठाकुर को एक ड्रॉफ्ट भेजा गया। इस ड्रॉफ्ट में इस बात का उल्लेख किया गया था कि सरकार छह महीने की समयावधि को तय कर रही है जिसमें न्यायधीशों की नियुक्ति के लिए भेजे गए नामों में से चुने गए नामों को पास कर दिया जाएगा।
इसके ठीक एक सप्ताह बाद ही मुख्य न्यायााधीश टी एस ठाकुर ने सरकार को कठघरे में खड़ा करते हुए कहा था कि सरकार न्यायााधीशों की नियुक्ति के काम को टाल रही है। इससे न्यायिक प्रकिया को नुकसान हो रहा है।
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की खिंचाई करते हुए कहा था कि न्यायपालिका के काम को रोकने की कोशिश सरकार कर रही हैं। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायधीश टी एस ठाकुर ने जानना चाहा कि आखिर हाईकोर्ट में जजों की नियुक्ति को सरकार क्यों रोक रही है।
मुख्य न्यायधीश जस्टिस टी एस ठाकुर ने कहा था कि कोलोजियम ने न्यायधीशों के ट्रांसफर और नियुक्ति को लेकर 78 बार सरकार को लिखा है। पिछले आठ महीनों से इस मामले को अटका कर रखा गया है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से जानना चाहा कि क्या आप न्यायपालिका का काम रोक देना चाहते हैं।
न्यायधीश टी एस ठाकुर ने कहा कि हाईकोर्ट में जजों के खाली पदों की संख्या 43 फीसदी तक बढ़ गई है और लंबित मामलों की संख्या 40 लाख तक पहुंच चुकी है। सरकार की कोशिश होनी चाहिए कि ऐसे मामलों को रोक कर नहीं रखना चाहिए। जजों की नियुक्तियां तुरंत होनी चाहिए।












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