NPR में माता-पिता के जन्मस्थान और जन्मतिथि की जानकारी देनी ही होगी: गृह मंत्रालय

नई दिल्ली। नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर का देश के तमाम राज्यों में विरोध हो रहा है। विपक्ष तमाम राज्यों से अपील कर रहा है कि अपने राज्य में एनपीआर को ना होने दें। यही नहीं कई राज्यों ने एनपीआर के खिलाफ प्रस्ताव भी पारित किया है। इन तमाम विरोध के बीच सरकार ने साफ कर दिया है कि वह एनपीआर में पूछे जाने वाले सवालों से पीछे नहीं हटेगी। गृहमंत्रालय ने संसद की स्टैंडिंग कमेटी से कहा है कि इस तरह के सवाल पहले भी एनपीआर में पूछा जा चुके हैं। वहीं कमेटी का मानना है कि एनपीआर को लेकर सरकार लोगों को एकजुट नहीं कर सकी, लिहाजा इस बात का डर है कि जनगणना की प्रक्रिया बाधित हो सकती है।

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    सरकार का तर्क

    सरकार का तर्क

    बता दें कि एनपीआर की प्रक्रिया इस वर्ष 1 अप्रैल से शुरू हो सकती है। गृहमंत्रालय की स्टैंडिंग कमेटी ने डिमांड फॉर ग्रांट्स (2020-2021) की रिपोर्ट राज्यसभा में गुरुवार को रखी है। इस कमेटी की अध्यक्षता कांग्रेस सांसद आनंद शर्मा कर रहे हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि एनपीआर फॉर्म 2020 में माता-पिता के जन्मस्थान और उनकी जन्मतिथि को लेकर सवाल पूछे गए हैं। इसपर सरकार का तर्क है कि इससे बैक एंड डेटा प्रोसेसिंग और मजबूत होगा। गौरतलब है कि कई राज्यों ने एनपीआर को लेकर आपत्ति जाहिर की है। एनडीए के सहयोगी जदयू और एलजेपी ने भी इसको लेकर अपनी चिंता जाहिर की है।

    व्यापक स्तर पर पूछे जाएंगे सवाल

    व्यापक स्तर पर पूछे जाएंगे सवाल

    गृहमंत्रालय ने कहा है कि एनपीआर 20100 में भी माता-पिता के जन्मस्थान और उनकी जन्मतिथि को लेकर सवाल पूछा गया था। जिनके माता पिता घर में नहीं रहते हैं या कहीं और रहते हैं या फिर उनका देहांत हो गया है, सिर्फ उन्हीं लोगों को अपने माता-पिता के जन्मस्थान और उनकी जन्मतिथि की जानकारी देनी है। 2020 में एनपीआर के तहत माता-पिता के बारे में व्यापक सवाल पूछे जाएंगे। गृह मंत्रालय की ओर से कहा गया है कि जनगणना और एनपीआर की तैयारी जोरों पर है और एक अप्रैल से इसकी प्रक्रिया को शुरू कर दिया जाएगा। जनगणना के लिए मकानों की सूची बनाने का काम 1 अप्रैल से 30 सितंबर तक चलेगा। यह प्रक्रिया पूरे देश में चलेगी।

    बजट को मिल चुकी है स्वीकृति

    बजट को मिल चुकी है स्वीकृति

    इससे पहले सरकार ने राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) को अपडेट करने की मंजूरी देते हुए इसके अपडेशन के काम के लिए 8500 करोड़ रुपये के फंड को भी अनुमति दी गई थी। जानकारी के मुताबिक हर नागरिक के लिए रजिस्टर में नाम दर्ज कराना जरूरी होगा। एनपीआर में ऐसे लोगों का लेखा जोखा होगा, जो किसी इलाके में 6 महीने या उससे अधिक समय से रह रहे हों।

    एनपीआर क्या है?

    एनपीआर क्या है?

    एनपीआर यानी राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर को नागरिकता कानून 1955 और नागरिकता (नागरिकों का रजिस्ट्रेशन और राष्ट्रीय पहचान पत्र का मसला) नियम 2003 के तहत स्थानीय स्तर पर यानी उपजिला, जिला और राज्य स्तर पर बनाया जाएगा। इनमें देश के हर नागरिक के लिए नाम दर्ज कराना अनिवार्य होगा। एक तरह से यह देश में रह रहे नागरिकों के लिए समग्र डाटाबेस होगा। जिसे जनसांख्यिकीय और बायोमीट्रिक आधार पर बनाया जाएगा।

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