Google Doodle: दुनिया को क्षय रोग से बचाने वाले डॉक्टर को डूडल की श्रद्धांजलि
नई दिल्ली। गूगल ने इस बार अपना डूडल जर्मन फिजिशियन और नोबेल प्राइज विजेता रॉबर्ट कोच को समर्पित किया है। गूगल ने डूडल के जरिए रॉबर्ट के काम को याद किया है, कोच को 10 दिसंबर 1905 में मेडिसिन के क्षेत्र में नोबेल प्राइज से सम्मानित किया गया था। उन्होंने ट्यूबरकोलाइसिस से जुड़े काफी अहम खोज की थी, जिसके बाद उन्हें उनके इस बड़े योगदान के लिए नोबेल प्राइज से सम्मानित किया गया था। कोच की खोज की वजह से टीबी जैसी गंभीर बीमारी पर रोक लगाने व उसके इलाज में बड़ी मदद मिली थी।

सूक्ष्मजैविकि के युगपुरुष
सूक्ष्मजैविकि के क्षेत्र में रॉबर्ट कोच को युगपुरुष के रूप में जाना जाता है, जर्मन मूल के डॉक्टर रॉबर्ट कोच का जन्म 11 दिसंबर 1843 को हुआ था। उन्होंने कॉलरा, एंथ्रेक्स और क्षय रोग पर काफी गहन शोध किया था। उन्होंने यह साबित किया था कि कई रोग सूक्ष्मजीवों की वजह से होते हैं। उन्होंने ही पहली बार टीबी जैसी जानलेवा बीमारी का पता लगाया था। वर्ष 1883 में उन्होंने हैजा के जीवाणुओं की भी खोज की थी।
जीवाणुओं की खोज की
कोच ने कीटाणुओं व जीवाणुओं जिससे की संक्रमित बीमारी को फैलने में अपनी भूमिका निभाता है उसे समझने में बहुत बड़ा योगदान दिया है। उन्होंने एन्थ्रैक्स, कॉलरा व टीबी जैसी बीमारी को फैलाने वाले बैक्टीरिया की खोज करने में अहम भूमिका निभाई थी। कोच की शानदार खोज के बारे में रॉयल कैरोलीन इंस्टीट्यूट में केएएच मोर्नर ने भाषण में कहा था कि जो शानदार खोज कल्चरिंग और माइक्रो ऑर्गेनिज्म की पहचान के लिए किया गया उसकी मदद संक्रमण फैलाने वाले जीवाणुओं की पहचान हो सकी है और बीमारी को रोकने में मदद मिलेगी। इस बीमारी को रोकने के लिए साफ-सफाई के साथ शुरुआती चरण में कीटाणुओं की पहचान होने से मलेरिया, कॉलरा. टाइपस जैसी बीमारी को रोका जा सकता हैा।
मेडिकल इंस्टीट्यूट का नाम कोच के नाम पर
कोच की असाधारण खोज की वजह से ही आज भी उनके योगदान के लिए उन्हें याद किया जाता है। कोच की कई परिकल्पनाओं का आज भी इस्तेमाल किया जाता है। जिस तरह के योगदान कोच ने दिया था, उसे देखते हुए जर्मनी की राजधानी बर्लिन में उनके नाम पर मेडिकल इंस्टीट्यूट का नाम रखा गया है। कोच का महज 66 वर्ष की आयु में दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया था।












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