समाजसेवी बाबा आम्टे के जन्मदिन पर गूगल ने समर्पित किया डूडल

नई दिल्ली। गूगल ने आज जानेमाने समाजसेवी बाबा आम्टे को अपना डूडल समर्पित किया है। मुरलीधर देवीदास आम्टे जोकि बाबा आम्टे के नाम से प्रसिद्ध हैं आज जन्मदिन है, इस मौके पर डूडल ने उन्हें अपने ही अंदाज में श्रद्धांजलि दी है। डूडल ने बाबा आम्टे की तस्वीरों का स्लाइड शो बनाया है और दिखाया है कि कैसे उन्होंने समाज में जरूरतमंदों की मदद की, खासकर कि उन लोगों को जिन्हें कुष्ठ रोग था। बाबा आम्टे का जन्म वर्ष 26 दिसंबर 1914 को महाराष्ट्र में हुआ था।

baba amte

समृद्ध परिवार में जन्म

बाबा आम्टे का जन्म एक समृद्ध परिवार में हुआ था, उन्हें काफी सुख सुविधाएं मिली। जीवन की शुरुआत में वह शिकार करते थे, महंगी कारें चलाते थे, यही नहीं कानून की पढ़ाई करने के लिए वह विदेश गए और 20 वर्ष तक अपनी कंपनी को चलाया। अपने इस तरह के लालन पालन के बावजूद बाबा आम्टे ने अपने जीवन में लोगों के बीच विषमता को देखा था।

समाज सेवा का काम शुरू किया

तकरीबन 30 वर्ष की उम्र तक बाबा आम्टे ने अपनी वकालत छोड़ दी और समाज के जरूरतमंदों के लिए काम शुरू कर दिया। जब बाबा आम्टे जीवन में एक ऐसे व्यक्ति से मिले जिसे कुष्ठ रोग था, उसके बाद से उनका पूरा जीवन बदल गया। जिस तरह से उन्होंने देखा कि एक व्यक्ति जिसे कुष्ठ रोग है उसे दिखाई कम दे रहा है और वह पूरी तरह से अंदर से टूट गया है, उसके भीतर भय को देखने के बाद बाबा साहब ने कहा कि व्यक्ति शरीर के अंग खराब होने से ज्यादा अपना जीवन खोता है बल्कि अपनी मानसिक ताकत खोने से अपना जीवन खो देता है।

देशभर में पैदल यात्रा की

बाबा आम्टे देश की एकता और अखंडता बड़े समर्थक थे। उन्होंने 72 वर्ष की आयु में मार्च 1985 में निट इंडिया अभियान की शुरुआत की थी। उन्होंने कश्मीर से कन्याकुमारी तक तकरीबन 3000 मील की पैदल यात्रा की थी, इस यात्रा का मकसद था कि लोगों को एक भारत के लिए प्रेरित किया जा सके। इस दौरान उनके साथ 100 पुरुष और 16 महिलाएं साथ थी, जिनकी उम्र 35 वर्ष से कम थी। इसके तीन साल बाद बाबा आम्टे ने दूसरा मार्च आयोजित किया और इस दौरान असम से गुजरात के बीच उन्होंने 1800 मील की यात्रा की।

कई सम्मान मिला

समाज के लिए जिस तरह से बाबा आम्टे ने अथक प्रयास किया और इसे एक सूत्र में बांधने की कोशिश की उसके लिए उन्हें पद्मश्री सम्मान से नवाजा गया था। । यही नहीं मानवाधिकार के क्षेत्र में उन्हें युनाइटेड नेसंश अवार्ड भी मिला था। साथ ही 1999 में उन्हें गांधी पीस अवार्ड से भी सम्मानित किया गया था।

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