पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर अच्छी खबर, HPCL ने भी खरीदा दुर्लभ रूसी Urals क्रूड- Report
नई दिल्ली, 17 मार्च: देश की सबसे बड़ी सरकारी तेल कंपनी इंडियन ऑयल के बाद जानकारी के मुताबिक हिंदुस्तान पेट्रोलियम ने भी रूस से 20 लाख बैरल यूराल क्रूड खरीदा है। दरअसल, रूस जिस तरह से अंतरराष्ट्रीय पाबंदियों झेल रहा है, वह सस्ते दाम में अपना कच्चा तेल बेचने को मजबूर हुआ है। गौरतलब है कि रूस कच्चे तेल का तीसरा बड़ा उत्पादक और दूसरा सबसे बड़ा निर्यातक दोनों है। उधर चीन में कोरोना की भयानक लहर ने भी कच्चे तेल की कीमतें कम करने में मदद की हैं। क्योंकि, वहां होने वाली कच्चे तेल की सप्लाई बाधित होने की आशंका के मद्देनजर इसके दाम 14 साल की ऊंचाई पर पहुंचकर फिर से नीचे आए हैं।

हिंदुस्तान पेट्रोलियम ने भी खरीदा रूसी यूराल क्रूड- रिपोर्ट
रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते पेट्रोल-डीजल की कीमतों में उछाल की आशंका को लेकर लोग पिछले कई हफ्तों से परेशान हैं। दरअसल, कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों ने जब 14 साल के स्तर को छू लिया तो सांसें अटकी हुई थीं कि पता नहीं कब, भारत में भी तेल की कीमतें और ज्यादा आसमान छूने लगेंगी। लेकिन, ऐसी रिपोर्ट सामने आ रही है कि देशी तेल कंपनी हिंदुस्तान पेट्रोलियम ने भी 20 लाख बैरल दुर्लभ रूसी यूराल कच्चे तेल की खरीद की है। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने कारोबारी सूत्रों के हवाले से बताया है कि यह रूसी यूराल क्रूड मई में लोड किया जाएगा। इसके मुताबिक यह कार्गो यूरोपीय कारोबारी विटोल ने बेचा है। आमतौर पर कंपनी कारोबारी डील पर टिप्पणी नहीं करती।

इंडियन ऑयल पहले ही खरीद चुकी है रूसी यूराल क्रूड
यह खरीदारी भारत की सबसे बड़ी तेल कंपनी इंडियन ऑयल की ओर से रूस के उसी ग्रेड के क्रूड के 30 लाख बैरल की खरीद के बाद की गई है। इंडियन ऑयल ने इसी हफ्ते यह खरीद की है। रूस पर अमेरिका और उसके सहयोगियों की ओर से लगाए गए ऐतिसाहासिक आर्थिक प्रतिबंधों की वजह से कई कंपनियां और देश उससे कच्चा तेल खरीदने से पीछे हटे हैं, जिससे रूस कच्चे तेल को रिकॉर्ड कीमतों पर बेचने के लिए मजबूर होता दिख रहा है। आज की तारीख में रूस पर दुनिया में सबसे ज्यादा पाबंदी लग चुकी है।

एक्साइज ड्यूटी घटने की संभावना फिलहाल टलती नजर आ रही है
इस बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 14 साल की ऊंचाई पर पहुंचने के बाद नीचे आई है, जिसके बाद केंद्र सरकार भी एक्साइज ड्यूटी तत्काल कम करने का इरादा छोड़ती दिख रही है। वित्त मंत्रालय के वरिष्ठ अफसरों ने उम्मीद जताई है कि आने वाले हफ्तों में सप्लाई की चिंताएं दूर होने की संभावनाएं लग रही हैं। पिछले महीनों में कच्चे तेल की कीमतों में जो ऐतिहासिक उछाल आया था, उसकी मार फिलहाल तेल कंपनियां ही झेल रही हैं और तेल की कीमतें 4 नवंबर से लगातार स्थिर हैं, जबकि इस दौरान कच्चे तेल के दाम में करीब 27 फीसदी तक बढ़े गए थे।

फिलहाल 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आया कच्चा तेल
दो हफ्तों बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें कम होकर मंगलवार को 100 डॉलर प्रति बैरल से भी कम पर आ गई थी। जबकि एक समय यह 139 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंचकर 14 साल की ऊंचाई को छू लिया था। हालांकि इसके बावजूद ब्रेंट क्रूड की कीमतें इस साल की शुरुआत से करीब 29 फीसदी तक बढ़ चुकी है। फिलहाल अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें जो घटी हैं, उसके पीछे चीन में कोरोना की भयानक लहर को भी वजह माना जा रहा है। गौरतलब है कि चीन कच्चे तेल का सबसे बड़ा आयातक है और वहां सप्लाई कम होने से कच्चे तेल की कीमतें ठंडी पड़ी हैं।

रोजाना 75 लाख बैरल कच्चे तेल का निर्यात करता है रूस
भारत को अपने कच्चे तेल की जरूरतों का 85% आयात के भरोसे रहना पड़ता है। रूस, अमेरिका और सऊदी अरब के बाद कच्चे तेल का तीसरा सबसे बड़ा उत्पादक और सऊदी अरब के बाद दूसरा सबसे बड़ा निर्यातक है। इस समय रूस रोजाना लगभग 75 लाख बैरल कच्चे तेल का निर्यात करता है। तेल कंपनियों ने पिछले साल 4 नवंबर से पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर रखी हैं, जब सरकार ने पेट्रोल पर 5 रुपये और डीजल पर 10 रुपये प्रति लीटर एक्साइज ड्यूटी कम की थी। (तस्वीरें- फाइल)












Click it and Unblock the Notifications