Farmers protest: बूंदाबांदी के बाद बढ़ी सर्दी, गाजीपुर बॉर्डर पर बैठे किसान बोले- हम डटे रहेंगे

Farmers protest: बूंदाबांदी के बाद बढ़ी सर्दी, गाजीपुर बॉर्डर पर बैठे किसान बोले- हम डटे रहेंगे

नई दिल्ली। केंद्र सरकार के कृषि कानूनों के खिलाफ किसान दिल्ली के बॉर्डरों पर आंदोलन कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश और दिल्ली को जोड़ने वाले गाजीपुर बॉर्डर पर भी काफी संख्या में किसान धरने पर बैठे हैं। बीते कुछ दिनों में सर्दी कम होने से यहां खुली छत के नीचे किसानों को राहत मिली थी। गुरुवार को दिल्ली-एनसीआर में हल्की बारिश हुई है। देर शाम भी बूंदाबांदी हुई, जिसके बाद ठंड बढ़ गई है। बारिश और ठंड के बाद किसानों की परेशानी बढ़ गई लेकिन उनका हौंसला इससे कम होता नहीं दिखा है।

किसान बोले- हम सर्दी से डरते नहीं

किसान बोले- हम सर्दी से डरते नहीं

उत्तर भारत के पहाड़ों में हुई भारी बर्फबारी और गुरुवार को रुक-रुक कर हुई बारिश के बाद तेज हवा के चलते ठिठुरन एक बार फिर से महसूस होने लगी है। ऐसे में गाजीपुर बार्डर पर जमा किसान गुरुवार रात को अलाव के सहारे बैठे रहे। किसानों का कहना है कि अबब तो जाती हुई सर्दी है, हम जनवी की हाड कंपा देने वाली सर्दी में नहीं लौटे तो अब तो कोई मतलब ही नहीं है। किसानों ने कहा कि जनवरी में जो कई दिन तक बारिश हुई थी, उससे उनको काफी ज्यादा परेशानी हुई थी।

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    कानूनों की वापसी से पहले नहीं जाएंगे

    कानूनों की वापसी से पहले नहीं जाएंगे

    गाजीपुर बॉर्डर पर भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत के नेतृत्व में धरना चल रहा है। मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के किसान गाजीपुर बॉर्डर पर जमा हैं। राकेश टिकैत ने कानून वापसी से पहले घर वापसी नहीं का नारा दिया है जिसे किसान भी दोहरा रहे हैं। किसानों का कहना है कि केंद्र के नये कृषि कानूनों को वापस लेने की अपनी मांग के पूर होने पर ही घरनास्थल से उठेंगे। इसके अलावा धरनास्थल के बाहर पुलिस की भारी बैरिकेडिंग और दीवार बनाने को लेकर भी किसानों ने निराशा जताई है। किसानों ने कहा कि ये मसला को सुलझाने नहीं बल्कि उलझाने का तरीका है।

     क्या है किसानों की मांग

    क्या है किसानों की मांग

    केंद्र सरकार बीते साल जून में तीन नए कृषि कानून लेकर आई थी, जिनमें सरकारी मंडियों के बाहर खरीद, अनुबंध खेती को मंजूरी देने और कई अनाजों और दालों की भंडार सीमा खत्म करने जैसे प्रावधान किए गए हैं। इसको लेकर किसान जून के महीने से लगातार आंदोलनरत हैं और इन कानूनों को वापस लेने की मांग कर रहे हैं। किसानों का आंदोलन जून, 2020 से नवंबर तक मुख्य रूप से हरियाणा और पंजाब में चल रहा था। सरकार की ओर से प्रदर्शन पर ध्यान ना देने की बात कहते हुए 26 नवंबर को किसानों ने दिल्ली के लिए कूच कर दिया। इसके बाद 26 नवंबर, 2020 से देशभर के किसान दिल्ली और हरियाणा को जोड़ने वाले सिंधु बॉर्डर, टिकरी बॉर्डर गाजीपुर बॉर्डर और दिल्ली के दूसरे बॉर्डर पर धरना दे रहे हैं।

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