जानिये क्या होता बिल यानि विधेयक, कैसे लेता है कानून का रूप

बेंगलुरू(अंकुर सिंह)। संसद का बजट सत्र एक बार फिर से भारी हंगामें के बीच शुरु हो गया है। इस सत्र में विवाद का सबसे बड़ा मुद्द भूमि अधिग्रहण बिल है। लेकिन आपमें से कई लोग बिल को बेहतर तरीके से नहीं समझते होंगे। दरअसल बिल को हिंदी में विधेयक कहते हैं।

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क्या होता है विधेयक

दरअसल जब किसी नये कानून का निर्माण किया जाना होता है या पुराने कानून में बदलाव किया जाना होता है तो उसके प्राथमिक चरण को अधिनियम कहते हैं। इस प्राथमिक चरण में नये कानून को बनाने के मुख्य प्रस्ताव, सुझाव या पुराने कानून में बदलाव के प्रस्ताव या सुझाव होते हैं।

विधेयक कानून नहीं होता है

विधेयक को प्रस्ताव के तौर पर भी समझा जा सकता है जिसे कानूनी अमला पहनाने के लिए कई रास्तों से गुजरना होता है। विधेयक दो प्रकार के होते हैं। सार्वजनिक औ र असार्वजनिक विधेयक।

लेकिन अगर इसके इतर कोई विधेयक सरकार द्वारा प्रस्तावित किया जाता है तो उसे सरकारी विधेयक कहते हैं। सरकार विधेयक भी दो प्रकार के होते हैं। सामान्य और धन विधेयक। पर जब संसद का कोई साधारण सदस्य सार्वजनिक विधेयक प्रस्तुत करता है तब इसे प्राइवेट विधेयक कहते हैं।

विधेयक को कानून बनाने के लिए 5 चरणों से गुजरना होता है

  • तीन चरणों में विधेयक पर दोनों सदनों लोकसभा, राज्यसभा में चर्चा की जाती है।
  • हर चरण में चर्चा के बाद विधेयक को स्टैंडिंग कमेटी के पास भेजा जाता है।
  • तीन चरण की चर्चा के बाद चौथे चरण के अंतर्गत विधेयक को दोनों सदनों की साझा बैठक में पास किया जाता है।
  • विधेयक के आखिरी चरण यानि पांचवे चरण में इसे राष्ट्रपति के पास भेजा जाता है। राष्ट्रपति की मुहर के बाद विधेयक कानून का रूप लेता है।

विधेयक को कानून बनने से पहल कई प्रक्रियाओं से गुजरना होता है। लोक सभा और राज्य सभा में इस पांच चरणों से होकर गुजरना होता है। प्रथम तीन चरण में विधेयक पर चर्चा होता है। विधेयक को पास करने के लिए इसे संसद के किसी एक सदन में पेश करना होता है।

विधेयक को मंत्री या व्यक्तिगत सदस्य पेश कर सकता है

विधेयक को या तो मंत्री या कोई प्राइवेट सदस्य पेश कर सकता है। संसद में विधेयक को पेश करने के लिए विधेयक के मुखिया को इसकी इजाजत देनी होती है और इसके बाद इस सदन में पेश किया जाता है। लेकिन अगर इस चरण पर विधेयक का विरोध होता है तो सदन के अध्यक्ष इस पर संक्षिप्त बयान देने के लिए विपक्ष के सदस्य और विधेयक को पेश करने वाले मुखिया को इजाजत दे सकती हैं।

विधेयक पर चर्चा के बाद इस पर सवालों और संशोधनों पर वोट कराया जाता है

इस चरण के बाद के विधेयक पर चर्चा की जाती है। इसके बाद विधेयक से जुड़े सवालों को वोट के लिए सदन में रखा जा सकता है। इस प्रक्रिया के बाद जब विधेयक सदन में पास हो जाता है तो इसे आधिकारिक राजपत्र के तौर पर पब्लिश किया जाता है। वहीं विधेयक को सदन में पेश किये जाने से पहले भी स्पीकर की इजाजत से पब्लिश किया जा सकता है।

चर्चा के बाद विधेयक में संशोधन के सुझाव को शामिल किया जाता है

इसके बाद विधेयक को स्टैंडिंग कमेटी में भेजा जाता है। इस चरण में विधेयक को संचालक अधिकारी विधेयक की जांच करके इसपर एक रिपोर्ट बनाता है। स्टैंगिंग कमेटी विधेयक पर इसके विशेषज्ञों से राय ले सकती है। इसके बाद कमेटी के सुझावों पर विधेयक में शामिल किया जा सकता है।

इस तरह विधेयक को तीन चरणों पर सदन में पेश किया जाता है, फिर उसे स्टैंडिंग कमेटी के पास भेजा जाता है। इसके बाद तीसरे चरण में विधेयक में संशोधन के लिए दिये गये प्रस्ताव को जोड़ा जाता है। यह प्रक्रिया समान रूप से लोकसभा और राज्यसभा में अपनायी जाती है।

राष्ट्रपति की मुहर के बाद विधेयक लेता है कानून का रूप

इसके बाद विधेयक के लिए दोनों सदनों की साझा बैठक में इसकी चर्चा की जाती है। इस चरण के बाद इसे राष्ट्रपति के पास भेजा जाता है। आखिरकार में जब राष्ट्रपति इस विधेयक पर अपनी मुहर लगा देते हैं तो यह विधेयक कानून का रूप ले लेता है और इसे पूरे देश में लागू किया जाता है।

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