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Gemini Sankaran: 'सर्कस के शहंशाह' जेमिनी शंकरन का निधन, एक फौजी से कैसे बने 'सर्कस किंग'

Circus pioneer Gemini Sankaran: केरल में जन्मे एमवी शंकरन की उम्र 99 साल थी और वे कई बीमारियों से जूझ रहे थे। उन्हें सर्कस की दुनिया का शहंशाह कहा जाता था।

Gemini Sankaran

Gemini Sankaran Circus: देश में सर्कस की दुनिया के शहंशाह कहे जाने वाले मूरकोठ वेंगाकांडी शंकरन उर्फ एमवी शंकरन का निधन हो गया है। एमवी शंकरन को जेमिनी शंकरन के नाम से भी पुकारा जाता था।

एमवी शंकरन पिछले कुछ दिनों से बीमार चल रहे थे और रविवार रात को केरल के कन्नूर में एक प्राइवेट हॉस्पिटल में उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके परिवार से जुड़े लोगों ने बताया कि 99 साल के एमवी शंकरन उम्र संबंधी कुछ बीमारियों से पीड़ित थे, जिनके चलते उन्हें हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया।

13 जून 1924 को केरल में थालास्सेरी के पास कोलास्सेरी गांव में कविनिस्सेरी रमन नायर और मूरकोठ कल्याणी अम्मा के घर जन्मे एमवी शंकरन ने भारतीय सर्कस को पूरी दुनिया में पहचान दिलाई। जेमिनी, जंबो और ग्रेट रॉयल सर्कस एमवी शंकरन की ही सर्कस कंपनियां हैं।

बिजनेस में हुआ घाटा तो ज्वॉइन की आर्मी
'द हिंदू' की खबर के मुताबिक, सर्कस की दुनिया में आने से पहले एमवी शंकरन ने बिजनेस में भी हाथ आजमाए और सेना में नौकरी भी की। अपनी 7वीं क्लास तक की पढ़ाई पूरी करने के बाद एमवी शंकरन ने तीन साल तक सर्कस सीखा। हालांकि इस ट्रेनिंग के बाद एमवी शंकरन सर्कस से नहीं जुड़े और बिजनेस करने का मन बनाया। 2 साल तक हाथ-पैर मारने के बाद जब शंकरन को बिजनेस में घाटा हो गया तो उन्होंने तय किया कि वो सेना में जाकर नौकरी करेंगे और वो आर्मी के वायरलेस सेक्शन में भर्ती हो गए।

आर्टिस्ट के तौर पर रखा सर्कस में कदम
दूसरे विश्व युद्ध के बाद एमवी शंकरन सेना से रिटायर हो गए और रिटायर होने के बाद सर्कस की दुनिया में जाने का फैसला लिया। शंकरन जब थालास्सेरी लौटे तो उन्हें पता चला कि सर्कस की ट्रेनिंग देने वाले उनके गुरु का निधन हो चुका था, जिसके बाद उन्होंने आगे की ट्रेनिंग एमके रमन से ली। ट्रेनिंग के दो साल बाद शंकरन कोलकाता के बोस लॉयन सर्कस में एक आर्टिस्ट के तौर पर शामिल हो गए।

फ्लाइंग ट्रैपेज के एक्सपर्ट थे शंकरन
सर्कस में अपने करियर के शुरुआती दौर में एमवी शंकरन को एक ट्रैपेज प्लेयर के तौर पर काम मिला। कुछ दिन बोस लॉयन सर्कस में काम करने के बाद वो नेशनल सर्कस में चले गए। शंकरन को फ्लाइंग ट्रैपेज में गजब की महारथ हासिल थी। इसके बाद उन्होंने रेयमन सर्कस ज्वॉइन किया और पांच साल तक यहां काम किया। लेकिन, शंकरन की मंजिल सर्कस में महज एक आर्टिस्ट के तौर पर काम करना नहीं था। वो कुछ बड़ा करना चाहते थे।

6 हजार में खरीदी कंपनी और नाम रखा जेमिनी सर्कस
शंकरन ने तय कर लिया कि वो अब खुद की सर्कस कंपनी शुरू करेंगे। और, यही वो वक्त था जब देश में सर्कस की दुनिया ने नया मोड़ लिया। 1951 में शंकरन ने महाराष्ट्र की विजया सर्कस कंपनी को 6 हजार रुपए में खरीदा और अपनी राशि के नाम पर इसे जेमिनी सर्कस नाम दिया। शंकरन के जेमिनी सर्कस ने अपना पहला शो 15 अगस्त 1951 को गुजरात के बिलिमोरा में किया।

देखते ही देखते शंकरन ने शुरू कर दी तीन सर्कस कंपनियां
एमवी शंकरन के जेमिनी सर्कस ने तेजी से लोगों के बीच अपनी पहचान बनाई और 2 अक्टूबर 1977 को सर्कस की दुनिया में सबसे बड़ी कंपनी बन गई। शंकरन के कदम यहीं नहीं रुके और उन्होंने जंबो सर्कस के नाम से एक और कंपनी शुरू कर दी। कुछ ही समय बीता था कि शंकरन ने ग्रेट रॉयल सर्कस नाम से एक कंपनी खड़ी कर दी। शंकरन की बदौलत भारतीय सर्कस को दुनियाभर में पहचान मिली और उनके इस योगदान के लिए केंद्र सरकार ने उन्हें लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से नवाजा।

एमवी शंकरन के परिवार में कौन कौन हैं?
एमवी शंकरन के परिवार में उनके दो बेटे और एक बेटी है। बेटे- अजय शंकरन और अशोक शंकरन जेमिनी और जंबो सर्कस में मैनेजिंग पार्टनर हैं, जबकि उनकी बेटी रेनू शंकरन ऑस्ट्रेलिया में रहती हैं। एमवी शंकरन के निधन पर केरल के मुख्यमंत्री पिनारई विजयन ने भी ट्वीट कर शोक प्रकट किया है।

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