Gautam Gambhir: राजनीति के मैदान में फ्लॉप! क्रिकेट में हिट, कैसा रहा अब तक का करियर
गौतम गंभीर अपने क्रिकेट के दिनों में एक भरोसेमंद ओपनर ही नहीं मैन विनर भी माने जाने थे। गौतम गंभीर का इंटरनेशनल क्रिकेट करियर 15 साल का रहा है। क्रिकेट में तो वो तो पूरी तरह हिट और फिट रहे, लेकिन दूसरी ओर उनका राजनीतक करियर भी रहा, क्रिकेट के मुकाबले आगे नहीं बढ़ पाया।
रोहित शर्मा की कप्तानी में भारतीय टीम ने पिछले ही महीने टी20 वर्ल्ड कप 2024 खिताब जीता। इसके साथ ही बतौर कोच राहुल द्रविड़ का कार्यकाल भी खत्म हो गया। बीसीसीआई ने अब यह जिम्मेदारी भारतीय टीम के पूर्व ओपनर 42 साल के गौतम गंभीर को दी है।

गंभीर का क्रिकेट करियर
गौतम गंभीर का इंटरनेशनल क्रिकेट करियर 15 साल का रहा था। गंभीर ने 147 वनडे में 39.68 की औसत से 5238 रन बनाए. वनडे में उन्होंने 11 शतकीय पारियां खेलीं. गंभीर ने टी20 इंटरनेशनल मैचों में 37 मैच में सात अर्धशतकों की मदद से 932 रन बनाए, जिसमें उनकी औसत 27.41 की रही।
गंभीर ने 11 अप्रैल 2003 को इंटरनेशनल क्रिकेट में डेब्यू किया था। यह मैच बांग्लादेश के खिलाफ ढाका में खेला था। उन्होंने अपने करियर में कई दमदार पारियां खेलीं। इसके अलावा 2007 टी20 और 2011 वनडे वर्ल्ड कप उनके करियर में गंभीर ने इन दोनों ही वर्ल्ड कप के फाइनल में मैच विनिंग पारी खेली। 2007 टी20 वर्ल्ड कप के फाइनल में गंभीर ने पाकिस्तान के खिलाफ 54 गेंदों पर 75 रन बनाए थे।
2011 वर्ल्ड कप में विनिंग पारी
2011 वर्ल्ड कप फाइनल में खेली गई 97 रनों की यादगार पारी खेली। जिसके चलते भारत को नाम वर्ल्ड कप हो पाया। तब भारत का मुकाबला फाइनल में श्रीलंका से था और इंडिया को 274 का टारगेट मिला था। तब गंभीर ने 122 गेंदों पर मैच विनिंग 97 रनों की पारी खेली। वहीं टेस्ट, ओडीआई के अलावा गौतम गंभीर ने IPL पर भी अपना सिक्का जमाया। वे कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) के लिए लकी साबित हुए। गौतम गंभीर के रहते केकेआर ने तीन बार आईपीएल में खिलाब अपने नाम किया।
राजनीति में कैसा रहा करियर
गौतम गंभीर 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए। चुनाव में बीजेपी ने उन पर हाथ भी आजमाया और उन्हें पूर्वी दिल्ली निर्वाचन क्षेत्र से मौका दिया। गौतम गंभीर ने इस सीट में आम आदमी पार्टी की आतिशी मार्लेना को हराकर ये सीट हासिल की। लेकिन सांसद बने गंभीर कुछ खास सक्रिय नहीं रहे। लगातार मिल रही शिकायतों के बीच पार्टी नेतृत्व ने इस बार उनका टिकट काटने का मन बना लिया था। इससे पहले ही उन्हें इस बात का अंदेशा हो गया और उन्होंने राजनीतिक दायित्व से अलग होने का फैसला ले लिया।












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