Flashback 2021: गंगा मिशन चीफ ने माना, कोरोना की दूसरी लहर में लाशों का 'डंपिंग ग्राउंड' बन गई थी नदी

Flashback 2021: गंगा मिशन चीफ ने माना, कोरोना की दूसरी लहर में लाशों का 'डंपिंग ग्राउंड' बन गई थी नदी

नई दिल्ली, 24 दिसंबर: साल 2021 में कोरोना ने काफी ज्यादा अपना कहर बरपाया। जिन देशों में इस साल कोरोना का सबसे ज्यादा असर देखने को मिला, उनमें भारत भी एक है। देश में कोरोना की दूसरी लहर के दौरान स्वास्थ्य और प्रशासनिक व्यवस्थाएं एकदम धराशायी हो गई थीं। हालत ये थी कि गंगा में लोगों ने शवों को फेंक दिया था। उत्तर प्रदेश और बिहार से ऐसी तस्वीरें सामने आई थीं। अब गंगा मिशन के चीफ ने भी स्वीकार किया है कि गंगा में शव फेंके गए और उस दौरान नदी कोरोना से मरने वालों की लाशों का 'डंपिंग ग्राउंड' बनी हुई थी।

अफसर ने किताब में लिखी है ये बात

अफसर ने किताब में लिखी है ये बात

कोरोना वायरस महामारी की दूसरी लहर ने पूरे देश में तबाही मचाई थी। उत्तर प्रदेश में सैकड़ों लाशें गंगा में बहती नजर आई थीं। वहीं गंगा के किनारे भी शवों को दफना दिया गया था। इन शवों को कोविड से मरने वालों के माने गए थे। उत्तर प्रदेश की सरकार इसे मानने से बचती रही थी। राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के महानिदेशक राजीव रंजन मिश्रा ने अपनी नई किताब में गंगा में लाशे तैरने की बात कही है, जो उन्होंने आईडीएएस अधिकारी पुस्कल उपाध्याय के साथ मिलकर लिखी है। गुरुवार को ये किताब लॉन्च हुई है। किताब का विमोचन प्रधानमंत्री के आर्थिक सलाहकार परिषद के अध्यक्ष बिबेक देब्रॉय ने किया है।

किताब में इस पर पूरा अध्याय

किताब में इस पर पूरा अध्याय

इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक नमामि गंगे कार्यक्रम के प्रमुख राजीव रंजन मिश्रा ने अपनी किताब 'गंगा: रीइमैजिनिंग, रीजूवनेटिंग, रीकनेक्टिंग' का पूरा हिस्सा गंगा में लाशे बहने को लेकर लिखा है। मिश्रा ने लिखा है, कोविड महामारी की वजह से लाशों की संख्या बढ़ने लगी। उत्तर प्रदेश और बिहार के श्मशान घाटों की क्षमता से ज्यादा लाशें आने लगी तो गंगा में लाशों को डाली जानें लगीं। ऐसा लगता था कि नदियां, खासतौर से गंगा शवों का डंपिग ग्राउंड बन गई थी।

ज्यादातर मामले उत्तर प्रदेश से थे

ज्यादातर मामले उत्तर प्रदेश से थे

मिश्रा ने लिखा है कि गंगा में लाश बहाने के ज्यादा मामले उत्तर प्रदेश के ही थे। ज्यादातर लाशें उत्तर प्रदेश के कन्नौज और बलिया के बीच गंगा में डाली गईं। उन्होंने किताब में लिखा है कि इन घटनाओं के बारे में पता चलने के बाद उन्होंने सभी 59 जिला गंगा समितियों को इस स्थिति से निपटने का आदेश दिया था। साथ ही उत्तर प्रदेश और बिहार सरकार से विस्तृत रिपोर्ट मांगी थी। बता दें कि मिश्रा तेलांगना कैडर के आईएएस अधिकारी हैं और 31 दिसंबर को सेवानिवृत्त होने वाले हैं।

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