Gambhira Bridge Cost: गंभीरा पुल की मरम्मत पर कितने करोड़ रुपए खर्च हुए थे? अब 212 करोड़ से बनेगा नया पुल
Gambhira Bridge: गुजरात में वडोदरा और आणंद के बीच महीसागर नदी पर बना गंभीरा पुल 8 जुलाई 2025 की सुबह अचानक ढह गया। पाडरा तालुका के मुझपुर गांव में हुए इस हादसे में करीब 10 लोगों की मौत हो गई। आधा दर्जन से ज्यादा वाहन पानी में गिर गए। गंभीरा ओवरब्रिज ढहने के बाद लोगों के मन में यह सवाल उठने लगा है कि आखिर यह पुल कब बना था और इसे बनाने में कितने करोड़ रुपए खर्च हुए थे?
गंभीरा पुल की असली निर्माण तिथि सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज नहीं है, लेकिन स्थानीय लोग बताते हैं कि यह पुल 40 साल से अधिक पुराना था। बताया जाता है कि यह पुल 1981 में बनकर तैयार हुआ था और 1985 में वाहन चालकों के लिए खोला गया था। साल 2019-20 में पुल पर मरम्मत कार्य हुआ था, जिसमें करीब 1.75 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे।

इसके बावजूद, स्थानीय मीडिया लगातार इसकी जर्जर हालत की चेतावनी देता रहा। स्थानीय विधायक चैतन्य सिंह झाला ने भी पहले ही इस पुल को लेकर चेतावनी दी थी और नए पुल की मांग की थी। बावजूद इसके, पुल पर वाहनों की आवाजाही बंद नहीं की गई।
अब गुजरात सरकार ने 212 करोड़ रुपये की लागत से नए पुल के निर्माण को मंजूरी दे दी है और इसके लिए सर्वेक्षण भी कराया जा चुका है।
गंभीरा पुल क्यों था खास?
गंभीरा पुल पिछले चार दशकों से वडोदरा, आनंद, भरूच और सौराष्ट्र के बीच एक महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग के रूप में काम कर रहा था। इसी पुल के माध्यम से किसान अपनी फसलें बेचने शहर तक पहुंचते थे। दैनिक यात्री आवागमन करते थे और एम्बुलेंस समय रहते मरीजों को अस्पताल पहुंचा पाती थीं। यह पुल वडोदरा को आनंद और भरूच से जोड़ता था। यात्रा का समय 30 से 45 मिनट तक कम कर देता था। एनएच-64 को आंतरिक सड़कों से जोड़कर व्यापारिक आवाजाही को सरल बनाता था। अब इस पुल के गिरने से स्थानीय गांवों और कस्बों के लोगों को वैकल्पिक रास्तों से तीन गुना लंबा सफर करना पड़ रहा है।
अब लोग कौन-से रूट अपनाएं?
वडोदरा और आणंद को जोड़ने में अहम भूमिका निभाने वाले गंभीरा पुल के ढहने के बाद इस मार्ग से आवागमन पूरी तरह बंद हो गया है। अब यात्रियों को वैकल्पिक रूट अपनाने पड़ रहे हैं।
विकल्प 1: अहमदाबाद-वडोदरा एक्सप्रेसवे के जरिए
किनके लिए उपयुक्त: ट्रक, बस और लंबी दूरी के यात्री
पाडरा से एनएच-64 के माध्यम से मुझपुर जंक्शन पहुंचें। वहां से अहमदाबाद-वडोदरा एक्सप्रेसवे पकड़ें। आणंद इंटरचेंज से बाहर निकलें। फिर राज्य मार्गों से वडोदरा की ओर बढ़ें। इस रूट पर दोपहिया वाहनों की अनुमति नहीं है और टोल प्लाज़ा पर भीड़ की संभावना बनी रहती है।
विकल्प 2: गोटरी-छाणी मार्ग से स्थानीय रास्ता
किनके लिए उपयुक्त: बाइक, कार और रोजाना आने-जाने वाले लोग
पाडरा से गोटरी होते हुए एयरपोर्ट सर्कल की ओर बढ़ें। फिर छाणी और निज़ामपुरा के रास्ते अमित नगर पहुंचें। यहां से आप वडोदरा के मध्य भागों में प्रवेश कर सकते हैं
क्या ध्यान रखें यात्री?
आपातकालीन सेवाएं: एंबुलेंस को आनंद होते हुए एक्सप्रेसवे से लाना बेहतर रहेगा
वाणिज्यिक वाहन: ट्रकों के लिए एक्सप्रेसवे का उपयोग करना ही उचित होगा
स्थानीय यात्री: बाइक और हल्के वाहनों के लिए गोटरी-छाणी-अमित नगर रूट सबसे बेहतर रहेगा
सावधानी: किसी भी रूट पर निकलने से पहले वडोदरा ट्रैफिक अपडेट अवश्य जांचें
समय की योजना: सफर में विलंब तय है, इसलिए अतिरिक्त समय निकालकर ही यात्रा करें
गंभीरा पुल के गिरने से गुजरात के एक बड़े परिवहन नेटवर्क में गंभीर व्यवधान उत्पन्न हो गया है। जब तक नया या अस्थायी पुल तैयार नहीं हो जाता, यही दो वैकल्पिक रूट हजारों लोगों की आवश्यक जीवनरेखा बने रहेंगे। चाहे आप किसान हों, छात्र, व्यापारी या नौकरीपेशा, यदि आप इन रूट्स की सही जानकारी रखते हैं, तो आप समय, परेशानी और जोखिम-तीनों से बच सकते हैं।












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