पूजा स्थल अधिनियम 1991 के खिलाफ SC में दायर हुई एक और याचिका

नई दिल्ली, 28 मई: सुप्रीम कोर्ट में पूजा स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम 1991 के खिलाफ शनिवार को एक और याचिका दायर की गई है। यह याचिका कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर ने दाखिल की है। इस याचिका को मिलाकर अब तक कुल सात याचिकाएं उच्चतम अदालत में दाखिल हो चुकी है। दायर याचिका में पूजा स्थल कानून की कुछ धाराओं की संवैधानिक वैधता को लेकर चुनौती दी गई। याचिका में कहा गया है कि, ये अधिनियम, धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग या जन्म स्थान के आधार पर भेदभाव का कानून और समानता के प्रावधानों का उल्लंघन करता है।

fresh petition filed in Supreme Court challenging Places of Worship (Special Provisions) Act 1991

देवकीनंदन ठाकुर द्वारा दायर याचिका में 1991 के अधिनियम की धारा 2, 3, 4 की वैधता को चुनौती दी गई है। इसमें दावा किया गया है कि यह हिंदुओं, जैनियों, बौद्धों और सिखों के उनके पूजा स्थलों को वापस लेने के न्यायिक माध्यम का अधिकार छीन लेता है। अधिवक्ता आशुतोष दुबे के माध्यम से याचिका में कहा गया है कि हिंदुओं, जैनियों, बौद्धों और सिखों पर कानून के माध्यम से बड़ा चोट किया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि ये तीनों धाराएं भारत के संविधान की धारा 5, 26, 29 और धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांतों और कानून के शासन का उल्लंघन करता है, जो संविधान की प्रस्तावना और बुनियादी ढांचे का एक अभिन्न अंग है।

जानकारी के लिए आपको बता दें कि, कानून के अधिनियम की धारा 2, 3, 4 ने अदालत जाने का अधिकार छीन लिया है। जबकि अधिनियम की धारा 3 पूजा स्थलों के रूपांतरण पर रोक से संबंधित है, धारा 4 कुछ पूजा स्थलों के धार्मिक चरित्र और अदालतों के अधिकार क्षेत्र के बार के रूप में घोषणा से संबंधित है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि केंद्र ने न्यायिक समीक्षा के उपाय को छोड़कर अपनी विधायी शक्ति का उल्लंघन किया है जो संविधान की एक बुनियादी विशेषता है।

याचिका में आरोप लगाया गया है कि यह अधिनियम कई कारणों से 'शून्य और असंवैधानिक' है और यह हिंदुओं, जैनियों, बौद्धों और सिखों के पूजा स्थलों और तीर्थस्थलों के प्रबंधन, रखरखाव और प्रशासन के अधिकारों का उल्लंघन करता है। वाराणसी के रहने वाले रुद्र विक्रम और धार्मिक नेता स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने पहले ही इस अधिनियम के खिलाफ शीर्ष अदालत में याचिका दायर की है।

देवकीनंदन ठाकुर ने कहा कि हिंदू सैकड़ों वर्षों से शांतिपूर्ण सार्वजनिक आंदोलन के साथ भगवान कृष्ण की जन्मभूमि के जीर्णोद्धार के लिए लड़ रहे हैं, लेकिन अधिनियम को अधिनियमित करके केंद्र ने अयोध्या में भगवान राम के जन्मस्थान को तो मुक्त करा लिया, लेकिन मथुरा में भगवान कृष्ण के जन्मस्थान को नहीं मुक्त करा पाई है। हालांकि दोनों ही भगवान विष्णु के अवतार हैं।

पूजा स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम 1991 एक अधिनियम है, जो 15 अगस्त 1947 तक अस्तित्व में आए हुए किसी भी धर्म के पूजा स्थल को एक आस्था से दूसरे धर्म में परिवर्तित करने और किसी स्मारक के धार्मिक आधार पर रखरखाव पर रोक लगाता है। यह केंद्रीय कानून 18 सितंबर, 1991 को पारित किया गया था। राम मंदिर विवाद को इससे बाहर रखा गया था। क्यों कि उस समय ये मामला कोर्ट में था।

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