दीदी के करीबी मुकुल रॉय के बीजेपी में आने से बंगाल दूर नहीं ?
2014 के चुनाव के बाद भाजपा पश्चिम बंगाल में अपनी पहुंच बढ़ाने की लगातार कोशिश में है लेकिन पार्टी के लिए सबसे बड़ी चुनौती किसी मजबूत बंगाली मानुष का चेहरा न होने को लेकर है।
नई दिल्ली। तृणमूल कांग्रेस से निलंबित नेता मुकुल रॉय ने बीजेपी ज्वाइन कर लिया है। इसके साथ ही पश्चिम बंगाल में बीजेपी को एक चर्चित राजनीतिक चेहरा भी मिल गया है। मुकुल रॉय अपने साथ तृणमूल कार्यकर्ता और समर्थकों को भाजपा के साथ जोड़ सकते हैं, जिससे पार्टी का आधार पहले के मुकाबले काफी बढ़ सकता है। इसके अलावा बीते सितंबर में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह राज्य में पार्टी के कामकाज से खुश नहीं दिखे थे। माना जा रहा है कि मुकुल रॉय के पार्टी में आने के बाद उनकी यह शिकायत भी दूर हो सकती है।

ममता के खिलाफ मोर्चा खोलेंगे मुकुल
अब मुकुल रॉय पश्चिम बंगाल में भाजपा नेता के रूप में अपनी पुरानी पार्टी और सत्ताधारी टीएमसी को चुनौती देते हुए दिख सकते हैं। बीते कुछ समय से भाजपा पश्चिम बंगाल में अपनी पहुंच बढ़ाने की कोशिश कर रही है। लेकिन उसकी राह में एक बड़ी चुनौती है किसी दमदार स्थानीय चेहरे का न होना। मुकुल रॉय अगर उसके साथ आते हैं तो उसकी एक बड़ी मुश्किल हल हो सकती है।दूसरी ओर मुकुल रॉय जैसे संगठनकर्ता के पार्टी छोड़ने के बाद भाजपा में शामिल होने के बाद ममता बनर्जी के लिए नई चुनौतियां पैदा हो सकती हैं।

बीजेपी के मिशन बंगाल का हिस्सा
2014 के चुनाव के बाद भाजपा पश्चिम बंगाल में अपनी पहुंच बढ़ाने की लगातार कोशिश में है लेकिन पार्टी के लिए सबसे बड़ी चुनौती किसी मजबूत बंगाली मानुष का चेहरा न होने को लेकर है। मुकुल रॉय जैसे पके हुए नेता के पार्टी में शामिल होने के बाद माना जा रहा है कि भाजपा की यह मुश्किल भी खत्म हो सकती है और वे आगामी चुनावों में ममता बनर्जी के सामने बीजेपी का चेहरा हो सकते हैं। बीजेपी राज्य में जितनी मजबूत होगी, तृणमूल कांग्रेस उतनी ही कमजोर हो सकती है। 2014 के चुनाव से पहले ही भाजपा की विरोधी दल के नेताओं को पार्टी में शामिल करने की नीति रही है।इस नीति से उसे फायदा भी होता दिखा है। असम में हिमंता बिस्वा सरमा हों या मणिपुर में एन बीरेन सिंह, ये सभी भाजपा में शामिल होने से पहले कांग्रेस के प्रमुख नेता रह चुके हैं।

पश्चिम बंगाल में नए कवेलर में दिखेगी बीजेपी
मुकुल रॉय को बीजेपी ज्वाइन कराने के पीछे बीजेपी के महासचिव और पश्चिम बंगाल के प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय की अहम भूमिका रही है। उन्होंने ही मुकुल की खिलाफत कर रहे प्रदेश इकाई के नेताओं को समझाने का काम किया है। भाजपा नेता ने कहा कि कैलाश जी राज्य भाजपा इकाई में अच्छे आयोजकों की कमी को दूर करने में सदैव ही तत्पर रहते हैं। उन्होंने महसूस किया कि राय को भाजपा में लेने से कहीं न कहीं 2018 के पंचायत चुनाव और 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को लाभ मिलेगा। पश्चिम बंगाल बीजेपी इकाई के अध्यक्ष दिलीप घोष भी मुकुल की संगठनात्मक क्षमता की प्रशंसा की थी और कहा था कि वे एक कुशल नेता हैं। मुकुल का तृणमूल को आगे बढ़ाने में अहम योगदान रहे हैं। अब ये उम्मीद की जा रही है कि ये तीनों नेता मिलकर पश्चिम बंगाल बीजेपी को नई दिशा देंगे।












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