पूर्व वैज्ञानिक पीके घोष बोले- विक्रम का पता चलना खुशखबरी, स्थिति का पता लगाना भी जरूरी
नई दिल्ली। चंद्रयान-2 को लेकर पूर्व वैज्ञानिक पीके घोष ने सोमवार को कहा है कि जब चंद्रमा की सतह पर विक्रम लैंडर की स्पॉटिंग बहुत अच्छी खबर है। लेकिन यहां यह जानना अधिक महत्वपूर्ण है कि यह काम करने की में स्थिति में है या नहीं। एएनआई से बात करते हुए घोष ने कहा कि मुझे लगता है कि विक्रम लैंडर की स्पॉटिंग वास्तव में अच्छी और उम्मीदों से भरी खबर है। उन्हें लगता है कि विक्रम बाहर से फिट है लेकिन उसके अंदर की स्थिति को जानना बेहद जरूरी है।

बता दें कि इससे पहले भारत अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने लैंडर विक्रम के स्थान का पता लगाया। चंद्रमा की कक्षा में मौजूद आर्बिटर ने विक्रम की फोटो ली और ईसरो को भेजा। जिसमें विक्रम पहले से निर्धारित जगह से 500 मीटर की दूरी पर पाया गया है। इसरो की माने तो विक्रम हल्का सा झुका हुआ है। वो उससे संपर्क करने की पूरी कोशिस कर रहे हैं।
पूर्व वैज्ञानिक ने कहा कि इस बात का पता लगाना भी जरूरी है कि आखिर विक्रम की लैंडिंग किस तरह से हुई। हो सकता है कि उसने ऑटोमेटिक इंटेलिजेंस से मिले इनपुट के बाद खुद की लैंडिंग की हो। क्योंकि हर कोई जानना चाहता है कि लैंडिंग के अंतिम मिनटों में जब लैंडर का धरती से संपर्क टूट गया तो क्या उसने ऑटोमेटिक इंटेलिजेंस के जरिए लैंड किया।
लेकिन हम यह नहीं जानते की यह सॉफ्ट लैंडिंग हुई है या फिर हार्ड लैंडिंग। ऐसे में जब तक इसरो लैंडर से संपर्क करने में सफलता हासिल नहीं पा लेता तब तक हम कुछ नहीं कह सकते। यदि लैंडिंग के समय यह झुका हुआ है तो इससे समस्या पैदा हो सकती है, क्योंकि प्रज्ञान को लैंडर विक्रम से बाहर आने में दिक्कत हो सकती है। उन्होंने कहा कि आशा करता हूं कि इसरो को विक्रम लैंडर से संपर्क साधते में सफलता मिले।
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