Pranab Mukherjee ने चीन बॉर्डर पर 20 सैनिकों की शहादत पर क्या कहा था?

नई दिल्ली। पूर्व राष्ट्रपति डॉ. प्रणब मुखर्जी का निधन हो गया है। 84 साल के प्रणब मुखर्जी 20 दिन से वो मौत और जिंदगी के बीच लड़ रहे थे। 20 दिन पहले उनकी उनकी ब्रेन सर्जरी की गई थी। ऑपरेशन के बाद से ही उनकी हालत नाजुक बनी हुई थी और वे लगातार वेंटिलेटर सपोर्ट पर थे। डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। प्रणब मुखर्जी की तबीयत अचानक ही ज्यादा खराब हो गई थी और फिर बिगड़ती ही चली गई। जून में जब भारत और चीन की सेनाओं में झड़प हुई थी और 20 सैनिक शहीद हुए थे तो प्रणब मुखर्जी ने बयान जारी करते हुए कहा था कि देशहित से ऊपर कुछ नहीं है।

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    गलवान झड़प पर क्या बोले थे प्रणब मुखर्जी

    गलवान झड़प पर क्या बोले थे प्रणब मुखर्जी

    पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने चीन के साथ टकराव और 20 भारतीय सैनिकों की शहादत पर अपना बयान जारी कर कहा था, ये घटना ना सिर्फ देश बल्कि दुनिया के लिहाज से भी अहम है। हमारी सरकार को देशहित को ध्यान में रखते हुए इस पर आगे बढ़ना होगा। चीन के साथ हालात को संभालते हुए सरकार को इसमें सभी को विश्वास लेकर यह सुनिश्चित करना चाहिए कि राष्ट्रीय हित से ऊपर कुछ भी नहीं है।

    शहादत से बढ़कर भारत माता की कोई और सेवा नहीं

    शहादत से बढ़कर भारत माता की कोई और सेवा नहीं

    प्रणब मुखर्जी ने शहादत देने वाले जवानों की श्रद्धांजलि देते हुए कहा था, मेरा मानना है कि हमारी संप्रभुता और अखंडता की रक्षा करने वाले वीर जवानों की शहादत से बढ़कर भारत माता की कोई और सेवा नहीं हो सकती। उनके बलिदान के दम पर ही हम स्वतंत्र हैं। लद्दाख में देश की अंतरात्मा को चोट पहुंचाई गई है। ऐसा दोबारा ना हो, इसके लिए सभी संभव विकल्प तलाशे जानें चाहिए। पूरे राजनीतिक वर्ग को आपसी सहयोग के माध्यम से संतोषजनक तरीके से इससे निपटने की जरूरत है। इसके लिये केंद्र सरकार को सशस्त्र बलों समेत विभिन्न हितधारकों को साथ लेना चाहिए।

     अहम पदों पर रहे प्रणब मुखर्जी

    अहम पदों पर रहे प्रणब मुखर्जी

    प्रणब मुखर्जी भारतीय राजनीति का बड़ा नाम रहे। वो कई दफा केंद्रीय मंत्री और दूसरे बड़े पदों पर रहे। वे जुलाई 1969 में पहली बार राज्य सभा में चुनकर आए। तब से वे कई बार राज्य सभा के लिए चुने गए । फरवरी 1973 में पहली बार केंद्रीय मंत्री बनने के बाद मुखर्जी ने चालीस साल में कांग्रेस के नेतृत्व वाली सभी सरकारों में मंत्री पद संभाला था। इसके बाद भारत के राष्ट्रपति भी रहे। कई मौकों पर उनको प्रधानमंत्री पद का भी दावेदार माना गया। पिछले साल अगस्त में प्रणब मुखर्जी को भारत रत्न दिया गया था।

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