इसरो के पूर्व वैज्ञानिकों का दावा-नंबी नारायणन की फिल्म में किये गए 90 % दावे गलत
नई दिल्ली, 25 अगस्त: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के पूर्व वैज्ञानिकों का एक समूह अपने पूर्व सहयोगी नंबी नारायणन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। वैज्ञानिकों ने कहा कि नारायणन इसरो में अपनी भूमिका के बारे में झूठे दावे कर रहे हैं। खासकर क्रायोजेनिक्स के विकास के संबंध में। फिल्म 'रॉकेट्री: द नंबी इफेक्ट' और कुछ टेलीविजन चैनलों के माध्यम से किए गए दावे झूठे हैं और अंतरिक्ष एजेंसी को बदनाम करने के समान हैं।

इसरो के एलपीएसई के निदेशक डॉ. ए ई मुतुनायगम, परियोजना निदेशक प्रो. ई वी एस नंबूतीरी , डी शशिकुमारन और इसरो के अन्य पूर्व वैज्ञानिकों ने बुधवार को यहां प्रेस कॉन्फ्रेंस कर फिल्म में किए गए दावों को खारिज कर दिया। नंबी नारायणन को लेकर विवाद ऐसे समय सामने आया है जब उनकी लाइफ पर बनी फिल्म 'रॉकेटरी: द नांबी इफेक्ट'हाल ही में रिलीज हुई थी। जिसके लोगों का जबरदस्त रिस्पॉन्स मिल था।
पूर्व वैज्ञानिकों ने कहा, "हम सार्वजनिक रूप से कुछ बातें बताने के लिए मजबूर हुए हैं क्योंकि नंबी नारायणन इसरो और अन्य वैज्ञानिकों को "रॉकेटरी: द नांबी इफेक्ट" फिल्म के माध्यम से और टेलीविजन चैनलों के माध्यम से बदनाम करने पर तुले हुए हैं। उनका दावा है कि वह कई प्रोजेक्ट के जनक हैं। यह बिल्कुल गलत है। उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम के अधीन केवल कुछ महीनों के लिए काम किया था। लेकिन, आरोप के मुताबिक नंबी नारायणन ने फिल्म में दावा किया है कि उन्होंने एक बार अब्दुल कलाम को भी गलत फैसला लेने से रोका था।
पूर्व वैज्ञानिकों ने इसरो के वर्तमान अध्यक्ष एस सोमनाथ से फिल्म में किए गए झूठे दावों पर निर्णय लेने के लिए कहा है। पूर्व वैज्ञानिकों ने कहा कि फिल्म में नारायणन का यह दावा गलत है कि उनकी गिरफ्तारी के कारण भारत को क्रायोजेनिक तकनीक हासिल करने में देरी हुई। उन्होंने कहा कि इसरो ने 80 के दशक में क्रायोजेनिक तकनीक विकसित करना शुरू किया था और ई वी एस नंबूदरी प्रभारी थे। उन्होंने दावा किया, नारायणन का परियोजना से कोई संबंध नहीं था।
पूर्व वैज्ञानिकों ने कहा कि क्रायोजेनिक इंजन प्रौद्योगिकी को स्थानांतरित करने के लिए 1993 में रूस के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे। भारत की ओऱ से वासुदेवन गांधी को रूस के साथ समझौते की शर्तों पर बातचीत करने की जिम्मेदारी दी गई थी। उनके ही नेतृत्व में एक दल रूस गया था। लेकिन अमेरिका के दबाव के चलते रूस समझौते से पीछे हट गया । कुछ महनीने बाद दिसंबर 1993 में रूस के साथ फिर से बातचीत शुरू हुई और इस समझौते का नवीनीकरण किया गया। पूर्व वैज्ञानिकों ने दावा किया कि, नंबी नारायणन ने नवंबर 1994 में रिटायरमेंट का आवेदन दिया था। उसी महीने गिरफ्तारी के बाद उन्हें क्रायोजेनिक टीम से बाहर कर दिया गया था। वैज्ञानिकों के मुताबिक नंबी नारायणन का क्रायोजेनिक विकास से कोई लेना-देना नहीं था।
इसरो के पूर्व साइंटिस्टों ने ग्रुप ने आगे कहा कि, इसरो के संबंध में फिल्म में उल्लेखित कम से कम 90 प्रतिशत मामले झूठे हैं। उन्होंने कहा, हमें यह भी पता चला है कि नारायणन ने कुछ टेलीविजन चैनलों में दावा किया है कि फिल्म में जो कुछ कहा गया है वह सच है। कुछ वैज्ञानिकों ने यह भी चिंता जतायी कि नारायणन उनकी कई उपलब्धियों का श्रेय ले रहे हैं। हालांकि अभी तक इस पूरे मामले पर नारायणन या फिल्म के निर्माताओं की कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।












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