चंद्रयान-3 के बाद सूरज के लिए Aditya-L1 मिशन कितना जरूरी? जानें ISRO के पूर्व चीफ ने क्या कहा
Aditya L1 Mission: चंद्रमा के साउथ पोल पर मिली सफलता के बाद अब भारत सूर्य के अध्ययन के लिए अपना पहला स्पेस मिशन आदित्य-एल1 (Aditya-L1) लॉन्च करने जा रहा है।
आदित्य-एल1 की लॉन्चिंग 2 सितंबर को श्रीहरिकोटा से होने वाली है। जिससे पहले इस मिशन को लेकर इसरो के पूर्व अध्यक्ष जी माधवन नायर की बड़ी प्रतिक्रिया आई है।

इसरो के पूर्व चीफ जी माधवन नायर ने देश के पहले सोलर मिशन को लेकर कहा कि चंद्रयान मिशन के बाद आदित्य-एल1 के प्रक्षेपण की घोषणा एक तार्किक कदम है।
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न्यूज एजेंसी को दिए अपने बयान में पूर्व इसरो चीफ ने कहा, "मुझे यह जानकर खुशी हुई कि आदित्य-एल1 का प्रक्षेपण 2 सितंबर को श्रीहरिकोटा से होने वाला है। यह एक ऐसा मिशन है, जिस पर लंबे समय से इसरो विचार कर रहा है।"
उन्होंने सोलर मिशन को चंद्रयान के बाद भेजना उचित बताया है। पूर्व इसरो अध्यक्ष ने एएनआई से बात करते हुए कहा कि सूर्य और सौर सतह पर होने वाली इसकी विभिन्न घटनाओं और पृथ्वी पर इसके प्रभाव के बारे में ज्यादा अध्ययन करना आदित्य मिशन के लिए निर्धारित लक्ष्य है।
मिशन के बारे में बताते हुए जी माधवन नायर ने कहा, "पृथ्वी से लगभग 1.5 मिलियन किमी दूर लैग्रेंजियन प्वाइंट पर रखा जा रहा है और यह लगातार सौर सतह का निरीक्षण करेगा।" मिशन की अहमियत के बारे में बताते हुए पूर्व इसरो प्रमुख ने कहा कि सूर्य ही एकमात्र स्रोत है, जिस पर पृथ्वी निर्भर है।
इससे पहले इसरो के पूर्व वैज्ञानिक नंबी नारायणन ने कहा कि आदित्य एल1 का प्रक्षेपण एक अच्छी परियोजना है और इसरो में ज्ञान की कोई कमी नहीं है।
जानिए क्या है भारत का पहला सोलर मिशन?
मालूम हो कि आदित्य L-1 की लॉन्चिंग 2 सितंबर को सुबह 11.50 बजे होगी, जो कि इसरो का पहला सोलर मिशन है। आदित्य L-1 चार महीने में धरती से 15 लाख किमी दूर पहुंचेगा। L1 सूरज की स्टडी करने वाली पहली स्पेस बेस्ड इंडियन लेबोरेट्री होगी।












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