'मेरा एकमात्र अफसोस...', 6 बार चुनाव हारने के बाद पूर्व कप्तान बाइचुंग भूटिया का राजनीति से संन्यास
Baichung Bhutia Quits Politics: दिग्गज खिलाड़ी और भारतीय फुटबॉल टीम के पूर्व कप्तान बाईचुंग भूटिया ने चुनावी राजनीति छोड़ने का फैसला किया है। उन्होंने सिक्किम विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद राजनीति से संन्यास लेने का निर्णय किया है। उन्होंने अपने फैसले को लेकर एक प्रेस स्टेटमेंट जारी किया।
भारतीय दिग्गज फुटबॉलर और सिक्किम की राजनीति में खुद को स्थापित करने के लिए लगातार कोशिश करने वाले बाइचुंग भूटिया ने राजनीति को अलविदा कह दिया। अपने फैसले के बारे में बताते हुए भूटिया ने साफ कहा कि उन्हें एहसास हो गया है कि चुनावी राजनीति उनके लिए नहीं है।

10 साल में मिली 6 बार हार
अपने बयान में भारतीय दिग्गज फुटबॉलर ने कहा, 'मुझे 2024 के चुनाव परिणामों के बाद ये लगा है कि राजनीति मेरे लिए नहीं है और मैं राजनीति को छोड़ रहा हूं।' हाल के ही सिक्किम विधानसभा चुनाव में उन्हें छठी बार हार का सामना करना पड़ा।
इसबार बारफुंग से चुनाव लड़ा और हारे
बता दें कि भूटिया को 10 साल में छठी बार चुनाव में हार का मुंह देखता पड़ा है। बाइचुंग भूटिया ने 2018 में अपनी 'हमरो सिक्किम पार्टी' बनाई थी, जिसका इस साल की शुरुआत में सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट में विलय कर किया था। वहीं बाइचुंग भूटिया ने इस बार बारफुंग से चुनाव लड़ा था। लेकिन उनको सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा (एसकेएम पार्टी) के रिक्शाल दोरजी भूटिया के हार झेलनी पड़ी।
4300 से ज्यादा वोटों से मिली हार
भूटिया को दोरजी भूटिया के हाथों 4300 से ज्यादा वोटों से हार का सामना करना पड़ा। विधानसभा चुनाव में उनको 4,012 वोट मिले थे, जबकि दोरजी को 8,300 वोट हासिल हुए।
जानिए क्या बोले बाइचुंग भूटिया?
वहीं अपने राजनीति छोड़ने के फैसले के बारे में बताते हुए भूटिया ने कहा, 'मुझे इस बात का एकमात्र अफसोस है कि मुझे लगता था कि मेरे पास खेल और पर्यटन के विकास को लेकर अच्छे विचार हैं। अगर मुझे मौका मिला तो मैं उन्हें लागू करना चाहता। मैं राज्य के विकास में योगदान देना चाहता था, दुर्भाग्य ऐसा नहीं हो सका। मुझे यकीन है कि ऐसा करने के लिए बेहतर विचारों वाले और भी लोग होंगे।
बता दें कि भूटिया ने तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर भी दो बार चुनाव लड़ा था, लेकिन सफलता नहीं मिला। टीएमसी ने उनको 2014 के लोकसभा चुनाव में दार्जिलिंग और 2016 के विधानसभा चुनाव में सिलिगुड़ी से उम्मीदवार बनाया था।
इसके अलावा 2019 लोकसभा चुनाव में उन्होंने गैंगटोक और तुमेन-लिंगी से चुनाव लड़ा। लेकिन फिर भी नहीं जीत पाए। वहीं इसी साल 2019 में गैंगटोक में हुए उपचुनाव में भी भूटिया को हार का मुंह देखना पड़ा।
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