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कुपवाड़ा एनकाउंटर की पहली तस्‍वीर, दूर तक बर्फ की मोटी चादर और हेलीकॉप्‍टर से कमांडोज को किया गया एयरड्रॉप

श्रीनगर। पांच अप्रैल को नॉर्थ कश्‍मीर के कुपवाड़ा के केरन में हुए एनकाउंटर में सेना के पांच कमांडोज ने पाकिस्‍तान से आए पांच आतंकियों को ढेर किया है। इस एनकाउंटर में जवान भी शहीद हो गए हैं। कुपवाड़ा में जो एनकाउंटर हुआ है उसकी एक तस्‍वीर सामने आई है। कहा जा रहा है कि यह फोटोग्राफ एनकाउंटर से पहले की है। केरन एनकाउंटर पांच दिन तक चला था। सेना के जो पांच पैराट्रूपर मिशन को पूरा करते हुए शहीद हुए हैं, वे उसी यूनिट से जुड़े थे जिसने साल 2016 में पीओके में सर्जिकल स्‍ट्राइक को अंजाम दिया था।

आर्टिकल 370 हटने के बाद सबसे बड़ा एनकाउंटर

आर्टिकल 370 हटने के बाद सबसे बड़ा एनकाउंटर

जो फोटो सामने आई है उसमें कमांडोज को हेलीकॉप्‍टर से एयरड्रॉप करते हुए कमांडोज को देखा जा सकता है। पांच अगस्‍त 2019 को जम्‍मू कश्‍मीर से आर्टिकल 370 को हटाया गया था और यह एनकाउंटर उसके बाद हुआ सबसे बड़ा एनकाउंटर था जिसमें सेना को इतना नुकसान हुआ है। इस मिशन को पूरा करना कमांडोज के लिए आसान नहीं था और कई फीट तक जमी बर्फ भी पैराट्रूपपर्स के इरादों को कमजोर नहीं कर पाई। कुपवाड़ा का केरन श्रीनगर से करीब 120 किेलोमीटर की दूरी पर है और बर्फ से ढंके रिंगडोरी के जंगलों में एनकाउंटर हुआ था।

 सर्जिकल स्‍ट्राइक वाली यूनिट के जवान

सर्जिकल स्‍ट्राइक वाली यूनिट के जवान

पांच अप्रैल को नॉर्थ कश्‍मीर के कुपवाड़ा के केरन में हुए एनकाउंटर में सेना के पांच कमांडोज ने पाकिस्‍तान से आए पांच आतंकियों को ढेर किया है। इस एनकाउंटर में जवान भी शहीद हो गए हैं। कुपवाड़ा में जो एनकाउंटर हुआ है उसकी एक तस्‍वीर सामने आई है। कहा जा रहा है कि यह फोटोग्राफ एनकाउंटर से पहले की है। केरल एनकाउंटर पांच दिन तक चला था।

एक अप्रैल को आतंकियों ने की घुसपैठ

एक अप्रैल को आतंकियों ने की घुसपैठ

कुपवाड़ा में एक अप्रैल को सेना को नियंत्रण रेखा (एलओसी) के दूसरी तरफ से घुसपैठ का पता चला था। खराब मौसम, बर्फ की मोटी चादर और उस पर खराब विजबिलिटी एक बड़ी समस्‍या थी। उत्‍तर कश्‍मीर के कुपवाड़ा में अप्रैल माह की शुरुआत में एनकाउंटर उस समय शुरू हुआ जब भारी हथियारों से लैस आतंकी पीओके से सीमा पार करने की कोशिशें कर रहे थे। इसी दिन एलओसी पर जमा बर्फ में आतंकियों के पैर के निशान नजर आए थे। सेना सूत्रों के मुताबिक भारी बर्फबारी की वजह से यह इलाका पूरी तरह से कट चुका था। इसी मौके का फायदा उठाते हुए आतंकी लगातार घुसपैठ की कोशिशों में लगे हुए थे।

ड्रोन से पता चली लोकेशेन

ड्रोन से पता चली लोकेशेन

सर्च टीमें आतंकियों की तलाश में गईं और करीब 13 राउंड फायरिंग हुई। इसी समय सेना को महसूस हुआ कि आतंकी हमले का इंतजार कर रहे हैं। इसके बाद अतिरिक्‍त जवानों को तुरंत तैनात कर दिया गया। अगले दिन यानी दो अप्रैल को सर्च पूरी हुई और शाम करीब 4 बजकर 30 मिनट पर आतंकियों से कॉन्‍टैक्‍ट हुआ मगर वे भागने में कामयाब रहे। इसी तरह तीन और चार अप्रैल को आतंकियों ने फिर घुसपैठ की कोशिश की। बि‍ल्‍कुल चूहे-बिल्‍ली की खेल की तरह आतंकी लगातार जवानों को चकमा देते रहे। इसके बाद सेना ने ड्रोन का प्रयोग करके घुसपैठियों की लोकेशन का पता लगाया। पांच अप्रैल को तड़के स्‍पेशल फोर्सेज के जवानों को एयरड्रॉप किया गया और छिपे हुए आतंकियों को ढेर करने के लिए ऑपरेशन लॉन्‍च हुआ।

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