Chunavi Kisse: डॉ. बीआर अंबेडकर को पहले आम चुनाव में देखना पड़ा हार का मुंह, दूध बेचने वाले ने दी थी मात
Chunavi Kisse: लोकसभा चुनाव के अब सिर्फ 4 दिन शेष बच गए हैं। 19 अप्रैल को पहले चरण के मतदान होने जा रहे हैं। सभी राजनीतिक पार्टियां अपनी तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुट गई है। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और कांग्रेस के बीच जोरदार टक्कर देखने को मिलेगी। दोनों पार्टियों ने अपनी-अपनी चुनावी गारंटी भी जारी कर दी है।
चुनाव में जिस तरह इस बार बीजेपी का टिकट ही जीत की गारंटी है, वैसे ही एक समय पर कांग्रेस को अपराजेय पार्टी के रूप में देखा जाता था। संविधान निर्माताओं में से एक डॉ. भीमराव अंबेडकर को भी कांग्रेस के उम्मीदवार से हार का स्वाद चखना पड़ा था। आइए जानते हैं वो चुनावी किस्सा...

बात 76 साल पहले की है। उस वक्त देश में जवाहर लाल नेहरू की लहर थी। उस वक्त कांग्रेस ने जिसे भी चुनाव में उतार, समझों जीत तय। देश में पहले लोकसभा चुनाव 1952 में कांग्रेस ने पीए नारायण एस काजरोलकर को चुनावी रण में उतारा। वहीं, महाराष्ट्र की उत्तरी मुंबई सीट से शेड्यूल्ड कास्ट फेडरेशन पार्टी के टिकट पर डॉ. भीमराव अंबेडकर टक्कर देने के लिए मैदान में उतरे। लेकिन, अंबेडकर को हार का सामना करना पड़ा। सियासी गलियारों में चर्चा हुई कि अंबेडकर एक दूध बेचने वाले से हार गए। काजोलकर, आंबेडकर के पूर्व सहयोगी रहे थे।
चुनाव में आंबेडकर को 1,23,576 वोट मिले और काजोलकर को 1,37,950 वोट मिले। 1952 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को संसद में 489 में से 364 सीटों पर और पूरे देश में 3280 विधानसभा सीटों में से 2247 सीटों पर जीत हासिल हुई। सीपीआई को 16, जनसंघ को 3, सोशलिस्ट पार्टी को 12, किसान मजदूर प्रजा पार्टी को 9 और निर्दलीय को 37 सीटें हासिल हुई थी।
1954 के लोकसभा उपचुनाव में भी पराजय
बात यही नहीं रूकी। साल 1954 में बंडारा लोकसभा के लिए हुए उपचुनाव हुए। जिसमें आबंडेकर को एक बार फिर पराजय का सामना करना पड़ा। इसमें भी कांग्रेस ने विजय हासिल की। चुनाव में कांग्रेस जीतने के बाद जवाहरलाल नेहरू भारत के पहले निर्वाचित प्रधानमंत्री बने।












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