किसान ट्रैक्टर परेड पर बोले एक्टर सुशांत- सौ से ज्यादा किसानों की शहादत तो हिंसा नहीं है?
एक्टर सुशांत बोले- किसानों की शहादत तो हिंसा नहीं है?
नई दिल्ली। 26 जनवरी को किसानों की ट्रैक्टर परेड के एक हिस्से के दिल्ली में आने और हिंसा को लेकर लगातार अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। एक्टर सुशांत सिंह ने सवाल उठाया है कि अब तक 100 से ज्यादा किसानों की जान गई है लेकिन उसको लेकर बात नहीं हो रही है। एक ट्वीट पर जवाब देते हुए सुशांत ने ये कहा है।

सुशांत ने किसानों की मौत पर चुप्पी को लेकर उठाए सवाल
विमलेश झा ने दिल्ली में ट्रैक्टर परेड में हिंसा को लेकर ट्वीट करते हुए लिखा, बसों की टूटी हुई खिड़की के शीशे हमारे टीवी एंकरों और राजनीतिक टिप्पणीकारों को बहुत परेशान कर रहे हैं, उनमें गुस्सा है। वहीं पिछले दो महीनों में ठंड में कितने ही प्रदर्शनकारी किसानों की मौत हुई, जिसको लेकर गुस्सा नहीं दिखा। मुझे लगता है कि दोनों ही बातें निराशाजनक हैं।
इस पर जवाब देते हुए सुशांत ने लिखा- सौ से ज़्यादा किसान शहीद हो चुके हैं अब तक। पर वो हिंसा नहीं है। कुछ कानून आए प्राकृत रूप से, और उनकी वजह से मरने वालों की प्राकृत मौत हो गई। इसे हिंसा नहीं कहते। किसने कहा था कि लड़ो और मरो, ज़िंदा रहने के लिए?

लालकिले पर झंडा लगाने वाले को लेकर भी किया सवाल
सुशांत ने अपने कई ट्वीट में ट्रैक्टर परेड में हुई हिंसा पर बात की है। लालकिले में जाने वाले प्रदर्शनकारियों की अगुवाई कर रहे दीप सिद्धू को लेकर भी सुशांत ने सवाल किए हैं। दीप के पीएम और गृहमंत्री के साथ फोटो हैं। इसको लेकर एक ट्वीट को सुशांत ने रीट्वीट किया है, जिसमें कहा गया है कि अगर दीप सिद्धू की की फोटो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जगह राहुल गांधी के साथ होती तो अब तक गोदी मीडिया स्टूडियो में कोहराम मचा चुका होता।

क्या हुआ दिल्ली में
केंद्र के नए कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलनरत किसानों की मंगलवार को गणतंत्र दिवस के मौके पर राजधानी में ट्रैक्टर परेड दौरान कई जगहों पर हिंसा हुई है। किसानों के बीच से कुछ लोग तय रूट को ना मानते हुए आईटीओ और लाल किले जा पहुंचे। लालकिले पर कुछ किसानों ने अपना झंडा भी फहरा दिया। जिसके बाद पुलिस ने किसानों पर लाठीचार्ज करते हुए आंसू गैस के गोले दागे। कई पुलिसकर्मी और किसान इसमें घायल हुए हैं। एक किसान की मौत भी हुई है। किसान नेताओं ने करीब एक महीने पहले ही 26 जनवरी पर परेड निकालने का ऐलान कर दिया था। तीन दिन पहले किसान नेताओं और दिल्ली पुलिस की बैठक के बाद परेड के रूट को लेकर भी सहमति बन गई थी लेकिन कुछ संगठनों ने इसे ना मानते हुए दिल्ली के भीतर प्रवेश कर लिया। पुलिस ने जब बलपूर्वक इनको रोकने की कोशिश की, जिससे टकराव हुआ।
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