किसान आंदोलन: कमेटी सदस्यों को बदलने की अर्जी पर SC ने जारी किया नोटिस
नई दिल्ली। farmers protest updates, पिछले 56 दिनों से दिल्ली के अलग अलग बॉर्डर पर कृषि कानूनों(farm laws) के खिलाफ किसानों का आंदोलन(farmers protest) जारी है। आज सुप्रीम कोर्ट(supreme court) में कृषि कमेटी पर फिर से सुनवाई हुई। किसान महापंचायत की ओर से पेश वकील ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि किसान समिति के एक सदस्य के हटने के बाद समिति की ओर से दोबारा कमेटी बनाने के लिए अर्जी दाखिल की गई है। इस पर सुप्रीम कोर्ट समिति के सदस्यों को बदलने की अर्जी पर अदालत ने नोटिस जारी किया है।
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कमेटी को लेकर किसानों के विरोध पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि- कृषि कानून पर गठित कमेटी पर सवाल उठाना ठीक नहीं। कमेटी के सभी मेंबर अपनी फील्ड के एक्सपर्ट हैं। कोर्ट ने कहा कि अगर व्यक्ति किसी मामले में अपनी एक राय रखता है तो इसका मतलब क्या? कभी कभी जज भी राय रखते हैं, लेकिन सुनवाई के दौरान वो अपनी राय बदलकर फैसला देते हैं। कमेटी के पास कोई अधिकार नहीं है तो आप कमेटी पर पूर्वाग्रह का आरोप नहीं लगा सकते।
चीफ जस्टिस ने कहा कि अगर आप कमेटी के समक्ष पेश नहीं होना चाहते तो हम आपको बाध्य नहीं करेंगे। लेकिन इस तरह किसी की छवि को खराब करना सही नहीं है। आपको कमेटी के समक्ष पेश नहीं होना, मत हो, लेकिन किसी को इस तरह ब्रांड न करें। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि पब्लिक ओपिनियन को लेकर अगर आप किसी की छवि को खराब करेंगे तो कोर्ट सहन नहीं करेगा।
किसानों की 26 जनवरी को होने वाली ट्रैक्टर रैली को लेकर दिल्ली पुलिस की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। कोर्ट ने एक बार फिर दोहराया है कि ये मामला दिल्ली पुलिस का है। कोर्ट ने किसानों की ट्रैक्टर रैली पर आदेश देने से इंकार किया है।8 किसान यूनियनों की ओर से पेश वकील प्रशांत भूषण ने चीफ जस्टिस को बताया कि किसान केवल बाहरी रिंग रोड पर शांतिपूर्ण तरीके से गणतंत्र दिवस मनाना चाहते हैं। उनका शांति को भंग करने का कोई इरादा नहीं है।












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