Farmers Protest: जानिए किसान कैसे कर रहे हैं 'रिले भूख हड़ताल', 24-24 घंटों के लिए अनशन पर बैठेंगे इतने लोग
जानिए किसान कैसे कर रहे हैं रिले भूख हड़ताल, हर 24 घंटे बाद बदलेंगे स्ट्राइक पर बैठे लोग
Farmers Protest Update: खेती से जुड़े नए कानूनों (Farm Laws) के खिलाफ आंदोलन कर रहे किसानों ने सोमवार से भूख हड़ताल का ऐलान किया है। किसान संगठनों ने बताया है कि केंद्र सरकार के नए कृषि कानूनों को वापस लिए जाने की मांग के साथ एक दिवसीय रिले भूख हड़ताल की जाएगी। इस दौरान सभी धरना स्थलों पर 11-11 किसान सोमवार से अनशन करेंगे। इसके तहत 24 घंटे के लिए 11 किसान यूनियनों का एक समूह भूख हड़ताल पर जाएगा। 24 घंटे के बाद, 11 किसान यूनियनों का एक और समूह भूख हड़ताल शुरू करेगा।
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स्वराज इंडिया के प्रमुख योगेंद्र यादव ने सिंघू बॉर्डर पर प्रेस वार्ता में बताया कि सोमवार को सभी प्रदर्शन स्थलों पर किसान एक दिन की क्रमिक भूख हड़ताल करेंगे। इसकी शुरुआत यहां प्रदर्शन स्थलों पर 11 सदस्यों का एक दल करेगा। किसानों ने ऐलान किया है कि 25 से 27 दिसंबर तक हरियाणा में राजमार्गों पर टोल वसूली को भी मुफ्त करेंगे। किसानों ने 27 दिसंबर को जब प्रधानमंत्री की तरफ से 'मन की बात' की जाएगी, उस वक्त किसान देश भर में थाली, ताली के शोर में उनकी आवाज को दबाएंगे।
किसान यूनियनों के जो प्रतिनिधि 24 घंटे की भूख हड़ताल पर हैं, उनके नाम हैं- जय किसान आंदोलन की रविंदरपाल कौर गिल, भारतीय किसान यूनियन एकता (सिद्धपुर) के अध्यक्ष जगजीत सिंह दलेवाल, कुलदीप सिंह दयाला (वित्त सचिव, दोआबा किसान यूनियन पंजाब) फरमान सिंह संधू ( अध्यक्ष, भारतीय किसान यूनियन पंजाब), बूटा सिंह चक्र, राज्य नेता, पंजाब किसान यूनियन, डेमोक्रेटिक किसान सभा पंजाब के अध्यक्ष डॉ. सतनाम सिंह अजनाला, क्रांतिकारी किसान यूनियन पंजाब के अवतार सिंह कौरजेवाला, कीर्ति किसान यूनियन के भूपिंदर सिंह लोंगोवाल, दोआबा किसान समिति के अध्यक्ष जंगबीर सिंह चौहान, दोआबा किसान संघर्ष समिति के मुकेश चंद्र, कुल हिंद किसान सभा (बलनवाल) के बलजीत सिंह और लोक न्याय कल्याण के अध्यक्ष बलदेव सिंह सिरसा।
केंद्र सरकार की ओर से इस बीच एक बार फिर से किसानों को बातचीत का न्योता भेजा गया है। सरकार की ओर से फिर 40 किसान संगठनों के नाम एक चिट्ठी लिखी गई है. कृषि मंत्रालय के संयुक्त सचिव विवेक अग्रवाल ने क्रांतिकारी किसान मोर्चा समेत 40 किसान संगठनों को चिट्ठी लिखकर एक बार फिर बातचीत करने का न्योता दिया है।
बता दें कि केंद्र सरकार के नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसान कई महीने से आंदोलन कर रहे हैं। 26 नवंबर से ये आंदोलन दिल्ली आ गया है। दिल्ली के सिंघु बॉर्डर पर हजारों किसान धरने पर बैठे हैं। 26 नवंबर के बाद से लगातार किसान दिल्ली के बॉर्डरों से अपनी आवाज उठा रहे हैं। कई दौर की बातचीत भी अब तक हो चुकी है लेकिन सरकार और किसानों के बीच कोई सुलह होती नहीं दिख रही है।












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