जानिए देश में लड़कियों की शिक्षा के क्या हैं असली हालात
नई दिल्ली। इस बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूनाइटेड नेशंस में अपना भाषण दिया तो उन्होंने सतत विकास पर बात करते हुए उन्होंने बताया कि कैसे भारत ने 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ,' कार्यक्रम के जरिए देश में लड़कियों की बेहतर शिक्षा के लिए लोगों को जागरुक करने की कोशिश की है। यूनाइटेड नेशंस ने 11 अक्टूबर को इंटरनेशनल डे फॉर गर्ल चाइल्ड के तौर पर घोषित किया हुआ है। पिछले कुछ वर्षों में देश में बालिकाओं की शिक्षा में परिवर्तन आया है लेकिन यह सिर्फ प्राथमिक शिक्षा के स्तर तक ही सीमित है।
अभी बदलनी होगी सोच
भारतीय एनजीओ चाइल्ड राइट एंड यू या जिसे आप क्राइ के तौर पर जानते हैं, उसने इस मुद्दे से जुड़े कुछ जरूरी आंकड़ें जारी किए हैं। इन आंकड़ों से देश में मौजूद हालात की ओर इशारा मिल जाता है। क्राइ की निदेशक कोमल गनोत्रा कहती है कि भारत में लड़कियों की शिक्षा के लिए अभिभावकों की सोच बदल रही है। लेकिन उच्च शिक्षा के लिए कायम सोच को बदलने में अभी काफी टाइम लगेगा।
क्या कहते हैं आंकड़ें
- प्राइमरी स्कूलों में लड़कियों के एडमिशन 89 प्रतिशत तक होता है।
- सेकेंड्री और हायर सेकेंड्री स्तर पर इसमें 32 प्रतिशत तक गिरावट आ जाती है।
- आरटीई के तहत छह वर्ष से लेकर 14 वर्ष तक के बच्चों की शिक्षा मुफ्त है।
- इस वजह से 14 वर्ष के बाद लड़कियों की आगे की शिक्षा पर खाया असर पड़ रहा है।
- प्राइमरी स्तर से सेकेंड्री स्तर तक आते-आते 17.8 प्रतिशत लड़कियां स्कूल छोड़ देती हैं।
- पहले यह आंकड़ा 4.14 प्रतिशत तक था।
- भारत में सिर्फ 15.4 प्रतिशत स्कूल ही ऐसे हैं जहां सेकेंड्री एजुकेशन की व्यवस्था है।
- सिर्फ 7 प्रतिशत स्कूल ही ऐसे हैं तो हायर सेकेंड्री एजुकेशन मुहैया कराते हैं।
देश में किस वर्ष में कितने सेकेंड्री स्कूल हैं, इससे जुड़े आंकड़ों पर स्लाइड्स के जरिए नजर डालिए।

2010 से 2011 में प्राइवेट सेकेंड्री स्कूल
क्राइ ने यू-डीआईएसई के हवाल से बताया है कि इस वर्ष देश में 54.8% स्कूल ऐसे थे जो सेकेंड्री स्कूल थे और प्राइवेट थे।

2012-13 में कम हो गए
वर्ष 2012-13 में यह आंकड़ा 52.38 तक पहुंच गया।

आर्थिक हालात बने रोड़ा
भारत में 55% से ज्यादा स्कूल सेकेंड्री और हायर सेकेंड्री स्तर की शिक्षा मुहैया करा रहे हें। ये स्कूल राज्य सरकारो की ओर से संचालित नहीं होते हैं। ऐसे में आर्थिक हालातों की वजह से लड़कियों की पढ़ाई बंद करा दी जाती है।

राज्यों की हालत
देश में सिर्फ 10 राज्यों ही ऐसे हैं जहां पर राज्य सरकारों ने सेकेंड्री और हायर सेकेंड्री स्तर पर स्कूलों का मालिकाना हक हासिल किया हुआ है।

उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा प्राइवेट स्कूल
उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में 90 प्रतिशत यानी सबसे ज्यादा सेकेंड्री और हायर सेकेंड्री स्कूल ऐसे हैं जो निजी है।

क्या है पंचवर्षीय योजना का नियम
12वीं पंचवर्षीय योजना के मुताबिक अगर कोई बच्चा प्राइवेट स्कूल में जाता है तो निजी स्कूल की वजह से प्रति बच्चा 893 रुपए का खर्च आना चाहिए और सरकारी स्कूल में यही र्ख सिफ्र 275 रुपए प्रतिमाह है।

शिक्षा से वंचित लड़कियां
इस समय देश में करीब 15 से 17 वर्ष के 4.6 मिलियन बच्चे ऐसे हैं जिनकी शादी हो चुकी है। इनमें से 70 प्रतिशत या 3.35 मिलियन संख्या उन लड़कियों की है जिन्हें सेकेंड्री और हायर सेकेंड्री स्तर की शिक्षा से वंचित रखा गया।












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