Explainer: क्या होता है UAPA कानून? क्यों कहलाता है बेरहम? भारत में किस-किस पर हुई कार्रवाई
What is UAPA: गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम यानी UAPA एक्ट भारत का एक विशेष कानून है। यह आतंकवाद और अन्य अवैध गतिविधियों को रोकने और नियंत्रित करने के लिए बनाया गया है। यह कानून भारत की एकता, अखंडता और संप्रभुता के खिलाफ होने वाली अवैध गतिविधियों को रोकने के लिए कड़े प्रावधान करता है। इसमें आतंकवादी कृत्यों, आतंकवादी संगठनों और आतंकवादी व्यक्तियों को शामिल किया गया है।
UAPA को समय-समय पर संशोधित किया गया है ताकि इसे अधिक सख्त और प्रभावी बनाया जा सके। हालांकि, विशेष रूप से मानवाधिकार संगठनों द्वारा इस कानून की कठोरता और इसके दुरुपयोग को लेकर आलोचना भी होती रही है। आइए प्वाइंट्स में जानते हैं क्या है UAPA कानून? और क्यों कहलाता है बेरहम? ....

UAPA कानून को समझें
- गिरफ्तारी और हिरासत: UAPA के तहत पुलिस को बिना वारंट गिरफ्तारी और लंबी हिरासत का अधिकार है। यह कानून गिरफ्तारी के बाद 180 दिनों तक बिना चार्जशीट दाखिल किए हिरासत में रखने की अनुमति देता है।
- कठोर सजा: UAPA के तहत दोषी पाए जाने पर कठोर सजा का प्रावधान है, जिसमें आजीवन कारावास और मौत की सजा शामिल है।
- आतंकवादी संगठनों की सूची: सरकार के पास अधिकार है कि वह किसी संगठन को आतंकवादी संगठन घोषित कर उसे प्रतिबंधित कर सके।
- जांच एजेंसियों के अधिकार: यह कानून राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) और अन्य जांच एजेंसियों को अधिक शक्तियां प्रदान करता है, जिससे वे आतंकवादी गतिविधियों की जांच में अधिक प्रभावी हो सकें।
- संपत्ति जब्त करना: UAPA के तहत संदिग्ध आतंकवादियों और संगठनों की संपत्तियों को जब्त करने का प्रावधान है।
क्यों कहलाता है बेरहम ?
- लंबी हिरासत अवधि: UAPA के तहत पुलिस को बिना वारंट के गिरफ्तार करने और 180 दिनों तक हिरासत में रखने का अधिकार है, जो मानवाधिकार संगठनों और नागरिक समाज के द्वारा बेरहम माना जाता है।
- बिना चार्जशीट दाखिल किए लंबी अवधि तक हिरासत: 180 दिनों तक बिना चार्जशीट दाखिल किए हिरासत में रखने की अनुमति देती है, जिससे आरोपी को न्याय मिलने में देरी होती है।
- जमानत मिलना मुश्किल: UAPA के तहत आरोपी को जमानत मिलना बहुत कठिन होता है, क्योंकि जमानत के प्रावधान बहुत सख्त हैं।
- मानवाधिकार उल्लंघन: कई बार इस कानून के तहत हिरासत में लिए गए व्यक्तियों के साथ दुर्व्यवहार और मानवाधिकारों का उल्लंघन होने की शिकायतें आई हैं।
भारत में UAPA के तहत इन पर हुई कार्रवाई
- अरुण फरेरा और वर्नोन गोंसाल्विस (2018): ये दोनों मानवाधिकार कार्यकर्ता और वकील हैं। इन्हें भीमा कोरेगांव हिंसा मामले में गिरफ्तार किया गया था और उन पर माओवादी संगठनों से संबंध रखने का आरोप लगाया गया था।
- शर्जील इमाम (2020): शर्जील इमाम एक जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) के छात्र हैं। उन्हें नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों के दौरान भड़काऊ भाषण देने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।
- आसिफ इकबाल तन्हा (2020): आसिफ इकबाल तन्हा एक छात्र नेता हैं और उन्हें दिल्ली दंगों के संबंध में गिरफ्तार किया गया था। उन पर दंगों को भड़काने का आरोप था।
- दिशा रवि (2021): दिशा रवि एक युवा पर्यावरण कार्यकर्ता हैं। उन्हें किसान आंदोलन के समर्थन में एक "टूलकिट" साझा करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। उन पर UAPA के तहत कार्रवाई की गई थी।
- उमर खालिद (2020): उमर खालिद एक पूर्व JNU छात्र नेता हैं। उन्हें दिल्ली दंगों के मामले में गिरफ्तार किया गया था और उन पर UAPA के तहत आरोप लगाए गए थे।
- अरुधंति रॉय (2024): लेखिका और समाजिक कार्यकर्ता अरुधंति रॉय के खिलाफ दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA के तहत मुकदमा चलाने की अनुमति दी।
- शेख शौकत हुसैन (2024): दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA के तहत मुकदमा चलाने की अनुमति दी।












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