चीन भारत का दुश्मन नहीं, पर अच्छा दोस्त भी नहीं

[ऋचा बाजपेई] एक तरफ नई दिल्‍ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चीन के राष्‍ट्रपति शी जिनपिंग का स्‍वागत कर रहे हैं तो वहीं लद्दाख में चीन के करीब 1000 सैनिक भारत की सीमा में दाखिल हो चुके हैं।

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बुधवार को दोनों देशों के बीच हुई फ्लैग मीटिंग के बावजूद यह घटना पेश आई है। विशेषज्ञों की मानें तो भले ही चीन के राष्‍ट्रपति का यह दौरा भारत के लिए अहम हो, लेकिन भारत को कभी चीन के साथ एकदम नरम रवैया नहीं अपनाना होगा। साथ ही दोनों देशों के बीच मौजूद सीमा को भी नजरअंदाज करने की भूल नहीं करनी चाहिए।

चीन को कम न आंकें

आगरा में रिटायर्ड कर्नल एनके उपाध्‍याय की मानें तो नरेंद्र मोदी अभी तक विदेश नीति पर खरे साबित हुए हैं। चाहे वह पाकिस्‍तान हो या चीन, दोनों ही पड़ोसियों के साथ वह संबंधों को काफी सोच-विचारकर और बड़े ही डिप्‍लोमैटिक अंदाज में आगे बढ़ा रहे हैं। वह पूरी तरह से इस बात से वाकिफ होंगे कि चीन लद्दाख में किस तरह की हरकतों को अंजाम दे रहा है।

उन्‍होंने हमें बताया, 'मोदी पूरी स्थिति से वाकिफ निश्‍चित ही वाकिफ होंगे और उन्‍हें इस मुद्दे को पूरी मजबूती से चीन के सामने रखना होगा। चीन को समझना काफी मुश्किल है। ऐसे में चीन को कभी भी अंडरएस्‍टीमेट करने की भूल न करें ।'

उन्‍होंने यह भी कहा कि जिनपिंग को पूरी तरह से मालूम होगा कि उनकी सेना लद्दाख में क्‍या कर रही है।

अभी आलोचना पड़ोसी को गलत संदेश

वहीं रिटायर्ड कर्नल वीएन थापर की मानें तो अभी इन सब बातों पर ध्‍यान देने की जरूरत नहीं है। अगर हम ऐसा करते हैं तो दुश्‍मन को गलत संदेश जा सकता है। उन्‍होंने हमें फोन पर बताया, 'अभी बहुत समय पड़ा है, चीन की आलोचना करने के लिए अभी काफी समय पड़ा है।

जिनपिंग भारत यात्रा पर हैं और ऐसे में अगर हमारे देश का मीडिया इस तरह की बातें करेगा तो हो सकता है कि पड़ोसी की विचारधारा हमारे लिए गलत बन जाए।'

कर्नल थापर की मानें तो वैसे भी अगर हम इस समय कुछ भी कहेंगे या सुनेंगे तो उसका कोई भी असर प्रधानमंत्री मोदी पर नहीं होगा और वह सिर्फ इन बातों के आधार पर अपनी योजनाओं को नहीं बदलने वाले हैं।

वास्‍तविक स्थिति की समीक्षा जरूरी

गुरुवार को चीन की ओर से हुए हालिया घुसपैठ के मामले पर सुरक्षा मामलों के जानकार उदय भास्‍कर का मानना है कि दोनों देशों को वास्‍तविक स्थिति समझनी होगी और उसकी समीक्षा करनी होगी। अगर ऐसा नहीं हुआ तो फिर दोनों देशों के बीच सामंजस्‍य काफी मुश्किल हो जाएगा।

वहीं सुर क्षा मामलों के एक और जानकार आलोक बंसल की मानें तो चीन एलएसी पर अपनी समझ के मुताबिक पेट्रोलिंग करता है तो भारत भी अपनी समझ के मुताबिक ही पेट्रोलिंग करता है। इस बात को हमें काफी गहराई से समझना होगा और इसका कोई न कोई हल निकालना ही होगा।

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