OROP के लिए पूर्व सैनिकों ने PM मोदी का जताया आभार, कहा-'आपके प्रयास से यह संभव हुआ'
OROP के लिए पूर्व सैनिकों के एक संगठन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताया है। संगठन ने कहा कि आपके के अथक प्रयासों की वजह से यह सब संभव हुआ है।

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने बीते दिनों 1 जुलाई, 2019 से वन रैंक वन पेंशन के तहत सशस्त्र बलों के पेंशनरों और पारिवारिक पेंशनरों की पेंशन को संशोधित करने का आदेश दिया था। अब सरकार के इस फैसले को लेकर अखिल भारतीय पूर्व सैनिक सेवा परिषद ने आभार जताया है। पूर्व सैनिकों के संगठन ने कहा कि यह सब पीएम मोदी के अथक प्रयास की वजह से ही संभव हो पाया है।
पूर्व सैनिकों के संगठन की तरफ से जारी एक रिलीज में कहा गया है कि ओआरओपी बकाया का भुगतान किया जाएगा। 1 जुलाई, 2019 से समतुल्यता का लाभ मिलेगा। कोरोना जैसी आपदा के बावजूद सरकार ने इसके लिए अतिरिक्त धनराशि आवंटित की है, जो बहुत ही सराहनीय है।
आपको बता दें कि अखिल भारतीय पूर्व सैनिक सेवा परिषद के अध्यक्ष लेफ्टिनेंट जनरल वीके चतुर्वेदी (सेवानिवृत्त) हैं। उन्होंने कहा कि इस फैसले से "सभी पूर्व सैनिक, वीर नारी और उनके परिवार बेहद खुश हैं। हम सभी पीएम मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का आभार व्यक्त करते हैं, जिन्होंने हमेशा पूर्व सैनिकों और उनके परिवार के सदस्यों का ख्याल रखा है। पूर्व सैनिक इससे अभिभूत हैं।"
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लेफ्टिनेंट जनरल चतुर्वेदी ने कहा कि पूर्व सैनिक हमेशा देश की सेवा के लिए समर्पित रहते हैं। बता दें कि पीएम मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पिछले सप्ताह 1 जुलाई, 2019 से वन रैंक वन पेंशन (ओआरओपी) के तहत सशस्त्र बल पेंशनरों / पारिवारिक पेंशनरों की पेंशन में संशोधन को मंजूरी दी थी।
इस आदेश के मुताबिक पिछले पेंशनभोगियों की पेंशन समान सेवा अवधि के साथ उसी रैंक में कैलेंडर वर्ष 2018 के रक्षा बलों के सेवानिवृत्त सैनिकों की न्यूनतम और अधिकतम पेंशन के औसत के आधार पर पुन: निर्धारित की जाएगी। 1 जुलाई, 2014 से पूर्व-परिपक्व सेवानिवृत्त (पीएमआर) को छोड़कर, 30 जून, 2019 तक सेवानिवृत्त सशस्त्र बल कार्मिक इस संशोधन के तहत कवर किए जाएंगे।
केंद्र सरकार की तरफ से जारी आंकड़ों के मुताबिक इस आदेश से सशस्त्र बलों के पेंशनरों और पारिवारिक पेंशनरों के 25.13 लाख से अधिक लाभान्वित होंगे। आपको बता दें कि ओरओपी की मांग पूर्व सैनिक पिछले कई वर्षों से कर रहे थे। मोदी सरकार के दौरान भी कई बार पूर्व सैनिकों की तरफ से इस मुद्दे को उठाया गया था।
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