Manpreet Singh Badal Congress से अलग, पीयूष गोयल ने पंजाब के पूर्व वित्त मंत्री को BJP की सदस्यता दिलाई
पंजाब कांग्रेस के सदस्य मनप्रीत सिंह बादल ने कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। मनप्रीत भाजपा में शामिल हो गए। 17 साल तक विधायक रहे मनप्रीत वित्त मंत्री भी रह चुके हैं।

कांग्रेस नेता और पंजाब में 17 साल विधायक रह चुके Manpreet Singh Badal ने कांग्रेस पार्टी छोड़ दी। उन्होंने भाजपा में शामिल होने का फैसला लिया। बता दें कि कैप्टन अमरिंदर सिंह के बाद मनप्रीत सिंह बादल पंजाब कांग्रेस का एक और बड़ा चेहरा हैं जिन्होंने हाथ का साथ छोड़कर कमल थामने का फैसला लिया।
पूर्व कांग्रेसी ने भाजपा का दामन थामा
रिपोर्ट्स में कहा गया कि पंजाब विधानसभा में 17 साल तक कांग्रेस विधायक रह चुके मनप्रीत सिंह बादल का मोहभंग हो गया है। कांग्रेस से इस्तीफा दे चुके पूर्व वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल ने केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल की मौजूदगी में भाजपा का दामन थाम लिया।
पीयूष गोयल ने दिलाई सदस्यता
मनप्रीत सिंह बादल के बारे में आई मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया कि कमल थामने का फैसला करने वाले मनप्रीत सिंह बादल का इस्तीफा कांग्रेस के लिए एक और बड़ा झटका है। बुधवार को मनप्रीत ने जब दिल्ली स्थित भाजपा मुख्यालय में बीजेपी की सदस्यता ग्रहण की, उस समय पीयूष गोयल के अलावा कुछ अन्य भाजपा पदाधिकारी भी मौजूद रहे।
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इस्तीफे के लिए राहुल को लेटर लिखा
बीजेपी में शामिल होने से पहले पूर्व वित्त मंत्री मनप्रीत बादल के इस्तीफे के बारे में ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक पंजाब कांग्रेस नेताओं के साथ मतभेदों के कारण, मनप्रीत ने बुधवार को अपने ट्विटर हैंडल पर कांग्रेस से इस्तीफे की घोषणा की।
मनप्रीत का मोहभंह क्यों हुआ ?
राहुल गांधी को लिखे त्याग पत्र में मनप्रीत सिंह बादल ने कहा कि सात साल पहले उन्होंने पीपल्स पार्टी ऑफ पंजाब का कांग्रेस में विलय कर दिया था। उन्होंने कहा, "मैंने ऐसा बहुत आशा के साथ किया, और एक समृद्ध इतिहास के साथ एक संगठन में एकीकृत होने की उम्मीद भी थी। ऐसा लगा था कि कांग्रेस के साथ आने के बाद मुझे पंजाब के लोगों और इसके हितों की सेवा करने की मेरी क्षमता के अनुसार सबसे अच्छे मौके मिलेंगे। शुरुआती उत्साह के बाद धीरे-धीरे मोहभंग होता गया।
बदनाम करने का आरोप लगाया गया
राहुल गांधी को लिखे पत्र में मनप्रीत ने बतौर वित्त मंत्री पंजाब को वित्तीय गड़बड़ी से बाहर लाने" के लिए किए गए प्रयासों को भी याद किया। उन्होंने कहा कि उनके प्रयासों को स्वीकार किए जाने की बात तो दूर, पंजाब कांग्रेस में "उन्हें केवल नाम के लिए याद किया जाए" ऐसे कई प्रयास हुए, लेकिन विफल रहे। इसके बाद उन्हें बदनाम करने के लिए राजकोषीय लापरवाही जैसे आरोप लगाए गए।
कांग्रेस का रवैया निराशाजनक
बकौल मनप्रीत सिंह बादल, "मुझे उन सभी कार्यवाहियों के बारे में विस्तार से बताने का कोई मतलब नहीं दिख रहा है, जो मेरे अंतिम और न बदले जा सकने वाले असंतोष का कारण बने। यह कहना पर्याप्त है कि जिस तरह से कांग्रेस पार्टी ने अपने मामलों का संचालन किया है और विशेष रूप से पंजाब के संबंध में फैसले लिए हैं, निराशाजनक रहा है।
पंजाब में दिल्ली के फरमान ! Coterie के आरोप
मनप्रीत ने कहा कि कांग्रेस की पंजाब इकाई को दिल्ली का हुक्म चलाने को कहा गया। इसका अधिकार जिन पुरुषों की मंडली को सौंपा गया वह जमीनी हकीकत से दूर है। उन्होंने कहा कि पहले से ही विभाजित सदन में आंतरिक असहमति को कम करने का प्रयास करने के बजाय, कोर्टरी (Coterie) में शामिल कांग्रेस नेताओं ने गुटबाजी को और बढ़ाने का काम किया। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों ने पार्टी में सबसे खराब तत्वों को मजबूत किया।

तीन दशक के करियर में चौथी पार्टी !
शिरोमणि अकाली दल के संरक्षक प्रकाश सिंह बादल के भतीजे, मनप्रीत ने 1995 में गिद्दड़बाहा उपचुनाव जीतकर अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की थी। लगभग तीन दशक लंबे राजनीतिक करियर में बीजेपी मनप्रीत के लिए चौथी पार्टी होगी। रिपोर्ट्स के मुताबिक पंजाब कांग्रेस प्रमुख अमरिंदर सिंह राजा वारिंग के साथ उनके मतभेद थे।












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