कोर्ट पब्लिसिटी के लिए नहीं है जहां कोई भी चला आए, EVM पर SC से इस पार्टी की याचिका खारिज
नई दिल्ली, 30 सितंबर: सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को ईवीएम पर निगरानी करने के लिए दायर एक राजनीतिक दल की याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी है कि कोर्ट ऐसी जगह नहीं है, जहां कोई भी थोड़ी पब्लिसिटी के लिए आ जाए। इस राजनीतिक दल की याचिका में दावा किया था कि इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) को कुछ कंपनियों ने नियंत्रित कर रखा है, ना कि चुनाव आयोग ने। अदालत ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि कोर्ट ऐसी जगह नहीं है, जहां कोई भी 'थोड़ी पब्लिसिटी' के लिए पहुंच जाए।

कोर्ट पब्लिसिटी के लिए नहीं है जहां कोई भी चला आए-सुप्रीम कोर्ट
अदालत ने कहा कि चुनाव की प्रक्रिया जनप्रतिनिधित्व कानून, 1951 के तहत चुनाव आयोग की निगरानी में संचालित होती है और चुनावों में अब ईवीएम दशकों से इस्तेमाल हो रहा है। सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस एसके कौल और जस्टिस एएस ओका की बेंच ने मध्य प्रदेश की जन विकास पार्टी की ओर से दायर यह याचिका खारिज की है। इस पार्टी ने ईवीएम पर सवाल उठाए थे और मध्य प्रदेश हाई कोर्ट से पिछले साल दिसंबर में याचिका खारिज होने के बाद सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
'वोटरों से महत्त्व नहीं मिला तो कोर्ट चले आए'
सर्वोच्च अदालत ने याचिका खारिज करते हुए कहा, 'ऐसा लगता है कि जिस पार्टी को चुनाव प्रक्रिया के बाद आए परिणाम में वोटरों से बहुत ज्यादा महत्व नहीं मिला, वह अब याचिकाएं दायर करके महत्व प्राप्त करना चाहती है।' बेंच ने कहा कि ईवीएम अब लंबे समय से इस्तेमाल हो रही है, लेकिन समय-समय पर इस मुद्दे को उठाया जाता है। पार्टी की ओर से जो वकील पेश हुए, उन्होंने संविधान के आर्टिकल 324 का हवाला दिया, जिसके तहत चुनाव का अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण चुनाव आयोग में निहित है। वकील ने कहा था कि हालांकि आर्टिकल 324 कहता है कि सबकुछ चुनाव आयोग नियंत्रित करता है, लेकिन ईवीएम कुछ कंपनियों के द्वारा नियंत्रित की जा रही हैं।
चुनाव की प्रक्रिया बहुत ही विशाल है- सुप्रीम कोर्ट
अदालत ने पूछा कि 'क्या आपको पता है कि संसदीय चुनाव में पूरे देश में कितने लोग वोट डालते हैं? यह बहुत ही विशाल प्रक्रिया है।' अदालत ने पूछा कि क्या याचिकाकर्ता चाहते हैं कि अदालत इस प्रक्रिया कि निगरानी करे कि ईवीएम किस तरह से इस्तेमाल किया जाता है। दरअसल, वकील ने कहा था कि याचचिकाकर्ता इस प्रक्रिया में थोड़ा नियंत्रण चाहते हैं। उन्होंने कहा था, याचिकाकर्ता चाहते हैं कि आर्टिकल 324 को उसकी पूर्ण भावना के साथ लागू किया जाए, जिसमें हर कुछ चुनाव आयोग के द्वारा नियंत्रित किया जाता है, ना किसी कंपनी के द्वारा किया जाए। वकील के मुताबिक वह सिर्फ स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव चाहते हैं।
लेकिन, अदालत ने याचिका रद्द करने से पहले कहा कि 'यह ऐसी जगह नहीं है जहां कोई भी आ जाए सिर्फ थोड़ी लोकप्रियता हासिल करने के लिए।' (इनपुट-पीटीआई)












Click it and Unblock the Notifications