अबतक छप्पन नहीं 100 एंकाउंटर करने वाले प्रदीप शर्मा उतरे चुनाव मैदान में

नई दिल्ली (विवेक शुक्ला)। मुंबई के एनकाउंटर स्पेशलिस्ट प्रदीप शर्मा, जिनके नाम से पूरा अंडरवर्ल्ड कांपता था, और जिनके जीवन पर फिल्म अब तक छप्पन बनी है, आगामी महाराष्ट्र विधानसभा का चुनाव लड़ रहे हैं। हालांकि हम आपको बता दें कि प्रदीश शर्मा ने अपने जीवन में 56 नहीं बल्कि 100 से ज्यादा एंकाउंटर किये हैं। वे आरएसपी के उम्मीदवार हैं। इस रियल लाइफ हीरो के नाम एनकाउंटर का शतक भी है। हालांकि वे शुरू में भाजपा की टिकट से चुनाव लड़ना चाहते थे। उन्होंने भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और भाजपा नेता राजीव प्रताप रूडी से मुलाकात भी की थी।

pradeep sharma

अठवाले ने दिया टिकट

राज्यसभा सदस्य रामदास आठवले ने आरपीआई से एनकाउंटर स्पेशलिस्ट प्रदीप शर्मा और रवींद्र आंग्रे को टिकट देकर सभी को चौका दिया है। वह हाल के दौर में बीजेपी सांसद पूनम महाजन के घर पर भी दिखे। वहां प्रदीप शर्मा अमित शाह से मिलने पहुंचे थे। पहले तो माना जा रहा था कि वे बीजेपी के उम्मीदवारों की लिस्ट में होंगे। प्रदीप शर्मा कई दिनों से इसके लिए तैयारी भी कर रहे थे।

प्रदीप शर्मा मुंबई पुलिस का जाना माना चेहरा है। शोहरत और विवाद से भरे करियर में प्रदीप पर आय से अधिक संपत्ति से लेकर अंडरवर्ल्ड से ताल्लुक रखने के आरोप लगे। लखन भैया फर्जी एनकाउंटर मामले में कई साल केस चलने के बाद प्रदीप शर्मा बरी हुए थे। प्रदीप शर्मा ने जब मुंबई में कदम रखा, तब अंडरवर्ल्ड अपने चरम पर था। दाउद इब्राहिम, छोटा राजन जैसे नामी अपराधी पुलिस की हिट लिस्ट में थे। शर्मा ने आते ही अंडरवर्ल्ड पर अपनी नजरें टेढ़ी करना शुरू कर दी।

नामी बदमाशों का किया एंकाउंटर

उन्होंने आते ही दो नामी बदमाशों का एनकाउंटर किया। इसके बाद मुंबई में उनका नाम गूंजने लगा। लोगों को लगा उनके लिए कोई मसीहा आ गया हो। हालांकि, वर्ष 2008 में प्रदीप शर्मा पर अंडरवर्ल्ड से जुड़े होने का आरोप लगा। इसके बाद उन्हें मुंबई पुलिस से सस्पेंड कर दिया गया, लेकिन 2009 में कोर्ट से बरी होने पर उन्होंने वापस मुंबई पुलिस ज्वाइन की। प्रदीप शर्मा के नाम 100 से भी अधिक एनकाउंटर का रिकॉर्ड है, जिसमें लश्कर-ए-तयैबा के तीन खूंखार आतंकवादी भी शामिल हैं।

एनकाउंटर स्पेशलिस्ट प्रदीप शर्मा ने वर्ष 1983 में बतौर सब इंस्पेक्टर मुंबई पुलिस ज्वाइन की। शर्मा ने अपनी नौकरी की शुरुआत माहिम पुलिस थाने से की थी। इसके बाद इनका ट्रांसफर कुछ वर्षों के लिए स्पेशल ब्रांच में किया गया। प्रदीप शर्मा पर घाटकोपर और जुहू पुलिस स्टेशन जैसे बड़े थानों का भी चार्ज रहा। बताया जाता है, उस वक्त घाटकोपर थाने का चार्ज लेने से हर पुलिस वाला घबराता था, लेकिन प्रदीप के आने के बाद से अपराधियों ने उस इलाके से किनारा कर लिया। अब देखना है कि सियासत की पारी उन्हें कितनी रास आती है।

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