हरियाणा के वोटरों ने ‘आप’ को दिखाया ठेंगा, भाजपा को 7 सीटें

हरियाणा में पांच माह बाद होने वाले विधानसभा चुनाव से पूर्व हुए लोकसभा चुनाव में राज्य में सत्ताधारी कांग्रेस के लिए बुरे संकेत उभरे हैं। राज्य में कांग्रेस बुरी तरह पराजित हुई है और पार्टी के सभी कद्दावर नेता राज्य में हार गए हैं। राज्य की 10 में से सिर्फ एक सीट पर ही कांग्रेस को जीत हासिल हो सकी है जिसे देखते हुए आगे होने जा रहे विधानसभा चुनाव के बाद की तस्वीर का अनुमान लगाया जा सकता है।
चुनाव परिणाम से जुड़ी हर खबर
सबसे ज्यादा लाभ में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) रही है जिसके खाते में सात सीटें आई हैं। इससे साफ परिलक्षित हो जाता है कि पार्टी ने हरियाणा में अपना अच्छा आधार तैयार कर लिया है। पूर्व मुख्यमंत्री भजन लाल के बेटे कुलदीप बिश्नोई की हरियाणा जनहित कांग्रेस (एचजेसी) के साथ गठबंधन के तहत भाजपा ने राज्य में 8 प्रत्याशी उतारे थे।
यहां तक कि बिश्नोई हिसार से नहीं जीत सके फिर भी गठबंधन पर कोई आंच नहीं आ रही है। हरियाण के मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के लिए राहत सिर्फ यही है कि उनके बेटे दीपेंद्र हुड्डा रोहतक सीट बचाने में कामयाब रहे, लेकिन यह सफलता भी दिल को तसल्ली देने के लिए नाकाफी है।
राज्य में कांग्रेस को 2009 के चुनाव में नौ और 2004 में सभी 10 सीटों पर सफलता मिली थी। कांग्रेस के लिए सबसे शर्मनाक यह रहा कि उसके नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष अशोक तंवर सिरसा सीट से जीतने में नाकामयाब रहे। तंवर को पार्टी उपाध्यक्ष राहुल गांधी का करीबी माना जाता है।
उद्योगपति और कांग्रेस प्रत्याशी नवीन जिंदल कुरुक्षेत्र से चुनाव हार गए हैं। सबसे खराब यह रहा कि उन्हें इस बार यहां तीसरा स्थान मिला। इस सीट से जिंदल 2004 और 2009 में चुने गए थे। हरियाणा की मुख्य विपक्षी पार्टी इंडियन नेशनल लोकदल के लिए भी यह चुनाव सुखद नहीं रहा है। नौ वर्षो से सत्ता से बेदखल पार्टी के हिस्से में केवल दो सीटें सिरसा और हिसार ही आ सकी हैं और तीन और सीटों पर उसके प्रत्याशी दूसरे स्थान पर रहे। 2009 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को 90 सीटों में से केवल 40 सीटें ही मिल पाई थी। इसके बावजूद पार्टी कुछ निर्दलीय और तोड़फोड़ कराकर सरकार बनाने में कामयाब हो गई।












Click it and Unblock the Notifications