UN में एस जयशंकर ने पाकिस्तान-चीन को जमकर सुनाई खरी-खरी, कहा- सीमापर आतंकवाद बर्दाश्त नहीं
न्यूयॉर्क, 25 सितंबर: भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 77वें सत्र को संबोधित करते हुए चीन और पाकिस्तान पर निशाना साधा। एस जयशंकर ने कहा कि, वर्ष 2022 भारत की यात्रा में एक मील का पत्थर है। भारत अपनी आजादी के 75 साल मना रहे हैं, जिसे हम आजादी का अमृत महोत्सव कह रहे हैं। उस दौर की कहानी लाखों भारतीयों के परिश्रम, दृढ़ संकल्प और उद्यम की है।
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पड़ोसी देशों पर निशाना साधते हुए विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि,भारत शांति का पक्षधर है और हमेशा इसका पैरोकार रहेगा। हम उस पक्ष में हैं जो बातचीत और कूटनीति को एकमात्र रास्ता बताता है। सात दशकों तक सीमा पार आतंकवाद का खामियाजा भुगतता रहा भारत 'जीरो टॉलरेंस' के दृष्टिकोण की दृढ़ता से वकालत करता है।हम आतंकवाद को किसी भी रूप में बर्दाश्त नहीं करेंगे।
उन्होंने संयुक्त राष्ट्र से आतंकवाद के प्रायोजक देशों और उन्हें बचाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। संयुक्त राष्ट्र को आतंकवाद को प्रमोट करने वाले देशों पर प्रतिबंध लगाना चाहिए। जो लोग आतंकवाद को खत्म करने और प्रतिबंध लगाने में समस्या पैदा कर रहे हैं उन्हें भी देखने की जरूरत है।
एस जयशंकर ने कहा कि, भारत संयुक्त राष्ट सुरक्षा परिषद में सुधार का पक्षधर रहा है। भारत बड़े दायित्वों को लेने के लिए तैयार है। भारत शांति के पक्ष में है और रहेगा। हम यूएन चार्टर के पक्ष में हैं। हम डायलॉग और डिप्लोमेसी से इसे हल करने के पक्ष में हैं। यह हमारा सामूहिक प्रयास है कि हम संयुक्त राष्ट्र और बाहर भी इसे हल करने के पक्ष में प्रयास करें। भारत यूक्रेन संकट के अलावा अपने पड़ोसियों से संकट का सामना कर रहा है।
विदेश मंत्री ने कहा कि, ये सदियों के विदेशी हमलों, उपनिवेशवाद से पीड़ित समाज का कायाकल्प कर रहे हैं और लोकतांत्रिक ढांचे में ऐसा कर रहे हैं। जिसका अध्ययन प्रगति, अधिक प्रामाणिक आवाजों और जमीनी नेतृत्व में परिलक्षित होती है। वर्ष 2022 भारत की यात्रा में एक मील का पत्थर है। भारत अपनी आजादी के 75 साल मना रहे हैं, जिसे हम आजादी का अमृत महोत्सव कह रहे हैं। उस दौर की कहानी लाखों भारतीयों के परिश्रम, दृढ़ संकल्प और उद्यम की है।
जयशंकर ने कहा कि, वे सदियों के विदेशी हमलों, उपनिवेशवाद से पीड़ित समाज का कायाकल्प कर रहे हैं और लोकतांत्रिक ढांचे में ऐसा कर रहे हैं। जिसकी अध्ययन प्रगति अधिक प्रामाणिक आवाजों और जमीनी नेतृत्व में परिलक्षित होती है। जलवायु परिवर्तन पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि, जलवायु कार्रवाई और जलवायु न्याय विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। भारत ने अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन, एक सूरज एक दुनिया एक ग्रिड पहल और आपदा धार्मिक बुनियादी ढांचे के टकराव पर अपने सहयोगियों के साथ काम किया है।
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