भारत में ड्रोन कारोबार में कैसे हो रहा है चमत्कार, आम लोगों की पहुंच में कब तक आएगा ? जानिए
भारत में ड्रोन की मांग में तेजी आने से इसकी अगुवा स्वदेशी कंपनी को भारी मुनाफा होने लगा है। सिर्फ दो साल में ही यह कंपनी 10 गुना की रफ्तार से बढ़ी है। आने वाले कुछ वर्षों में यह आम आदमी के पहुंच में हो सकता है।

भारत में ड्रोन उद्योग एक बड़े कारोबार का शक्ल अख्तियार करने लगा है। इसकी घरेलू डिमांड ही इतनी है कि इसकी अगुवा स्वदेशी कंपनी को भारी मुनाफा होने लगा है। हालांकि, कोरोना महामारी के दौरान कंपनी को नुकसान भी झेलनी पड़ी थी, लेकिन पिछले दो वर्षों में कंपनी ने ड्रोन निर्माण के क्षेत्र में काफी सफलता हासिल की है और वह 10 गुना तेज गति से बढ़ने लगी है। यह स्थिति तब है जब फिलहाल ड्रोन के सबसे बड़े उपभोक्ता सेना, पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां ही हैं। जब नागरिकों के इस्तेमाल और लॉजिस्टिक के क्षेत्र में इसकी खपत बढ़ेगी तो इसका कारोबार और तेजी से बढ़ने की संभावना है।

ड्रोन की अगुवा कंपनी की 90% से अधिक कमाई सरकार से
ईटी की एक रिपोर्ट के मुताबिक मुंबई स्थित आइडियाफोर्ज टेक्नोलॉजी ड्रोन बनाने वाली भारत की सबसे बड़ी स्वदेशी कंपनी बन चुकी है। देश में मानवरहित विमान प्रणाली के बाजार में यह लीडर है, जिसका इस बाजार में 50% से ज्यादा हिस्सेदारी है। फिलहाल यह कंपनी भारतीय सशस्त्र सेना, पुलिस और आंतरिक सुरक्षा जरूरतों के मुताबिक ड्रोन बना रही है। इस कंपनी की 90% से ज्यादा कमाई सरकारी खरीद से हो रही है। जब इस कंपनी के विकास की कहानी के बारे में सुनेंगे तो चौंक जाएंगे कि कितने कम समय में इसने बहुत ज्यादा तरक्की की है।

कैसे आया ड्रोन बनाने का आइडिया ?
अपनी कंपनी के बारे में ideaForge के सीईओ अंकित मेहता ने बताया कि कैसे उन्होंने आईआईटी बॉम्बे के तीन और छात्रों के साथ इसकी परिकल्पना की। वो बोले कि '2008 में दो घटनाएं हुई थीं। हम एक प्रतियोगिता में जीते थे, जहां हमने आईआईटी बॉम्बे को अमेरिका की एमआईटी के साथ एक पोजिशन दिलाने में मदद की थी। और जब मुंबई में ताज होटल पर हमले हो रहे थे, तब हमें लगा कि तीसरी, चौथी या पांचवीं मंजिल तक पहुंचने के लिए नौसेना के हेलीकॉप्टर जो कोशिश कर रहे थे, शायद हमारे ड्रोन होते तो वह काम ज्यादा आसानी से काम कर सकते थे, जिसमें ज्यादा जोखिम भी नहीं होती।' तब जाकर इनके दिमाग में ड्रोन टेक्नोलॉजी विकसित करने का जुनून जाग गया।

भारत में ड्रोन कारोबार में कैसे हो रहा है चमत्कार ?
उन्होंने बताया कि '...और इस तरह 2009 में हमने देश का पहला ऑटोनोमस ड्रोन लॉन्च किया।' आज इनकी कंपनी प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव स्कीम के तहत अनमैन्ड एरियल व्हीकल (UAV) उद्योग में सबसे तेजी से बढ़ने वाली और सबसे ज्यादा मुनाफा कमाने वाली कंपनी बन चुकी है। हालांकि, वित्त वर्ष 2020 और 2021 में कंपनी को घाटा झेलना पड़ा, लेकिन 2022 में इसे जबर्दस्त मुनाफा मिला है। वित्त वर्ष 2023 के पहले 6 महीनों में कंपनी ने 140 करोड़ रुपए की कमाई की है और इसका शुद्ध मुनाफा 45 करोड़ रुपए का रहा है, जिसमें ऑपरेटिंग प्रॉफिट मार्जिन 44. 5% भी शामिल है।

आम लोगों की पहुंच में कब तक आएगा ड्रोन ?
अब ड्रोन उद्योग में कई बड़ी और छोटी कंपनियां हाथ आजमा रही हैं। अभी रक्षा क्षेत्र ड्रोन का सबसे बड़ा उपभोक्ता है। लेकिन, मेहता के मुताबिक यह स्थिति बहुत ही कम समय के लिए रहने वाली है। 3 से 5 वर्षों में इसका नागरिकों और लॉजिस्टिक के लिए इस्तेमाल ज्यादा होने लगेगा और यह मौजूदा रक्षा क्षेत्र के स्तर को छू लेगा। उन्होंने अनुमान जताया है कि 2030 के अंत तक यह तीनों पूरे ड्रोन इकोसिस्टम में बराबर के भागीदार हो सकते हैं।
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दो वर्षों में 10 गुना रफ्तार से विकास
उन्होंने बताया है कि पिछले दो वर्षों में उनकी कंपनी 10 गुने रफ्तार से बढ़ी है। इसकी वजह ये है कि महामारी के माइंडसेट से बाजार बाहर निकल रहा है, स्वामित्व योजना काम आ रही है, सीमा पर भी जरूरतें बढ़ी हैं और वैश्विक स्तर पर भी ऐसे हालात बने हैं कि इसकी मांग बढ़ रही है। इसलिए इसके विकास में इतनी रफ्तार दिखाई पड़ रही है। अब यह उद्योग अपने संसाधनों को बढ़ाने पर जोर दे रहा है, ताकि प्लांट की क्षमता को बेहतर किया जा सके। क्योंकि, भविष्य में ड्रोन की मांग में और ज्यादा तेजी आने की संभावना है। (तस्वीरें- प्रतीकात्मक)












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