अपने बिछाए जाल में फंसा 5 लाख का इनामी नक्सली, जवानों ने ऐसे बचाई अपने दुश्मन की जान

रायपुर। एक कहावत है कि, जो दूसरों के लिए गड्ढा खोदता है, खुद ही उसमें गिर जाता है। यह कहावत छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा के घने जंगलों में उस समय चरितार्थ होते दिखी जब जवानों को नुकसान पहुंचाने बनाए गए गड्‌ढों में खुद एक नक्सली गिर गया। घटना दंतेवाड़ा- सुकमा सीमावर्ती क्षेत्र गादीरास नागलगुड़ा की है। सर्चिंग पर निकले जवानों को करीब आता देख अन्य नक्सली भागने लगे लेकिन एक खुद के बनाए स्पाइक होल्स गिर गया। जिसके बाद सुरक्षाबलों ने एक घायल पड़े हुए खूंखार नक्सली को 12 किलोमीटर तक जंगलों में चलकर हॉस्पिटल तक पहुंचाया।

साथी को छोड़कर भागे नक्सली

साथी को छोड़कर भागे नक्सली

मामला शनिवार का है। जब दंतेवाड़ा पुलिस को सूचना मिली थी कि दंतेवाड़ा- सुकमा सीमावर्ती क्षेत्र गादीरास नागलगुड़ा में नक्सलियों की मौजूदगी है। इसी सूचना पर दंतेवाड़ा से डीआरजी के जवान निकले थे। जवानों के आने की खबर पर यहां एकत्रित हुए नक्सली भाग गए। लेकिन घायल भीमा भाग नहीं सका। घायल नक्सली की पहचान भीमा के तौर पर हुई है। जिस पर पांच लाख का इनाम है।

खुद के बिछाए जाल में फंसा नक्सली

खुद के बिछाए जाल में फंसा नक्सली

दरअसल, उसने नागलगुड़ा क्षेत्र में स्पाइक होल्स लगाए थे, क्योंकि इस इलाके में जवान पहुंचने लगे थे। लेकिन जुलाई महीने वह खुद ही इस गड्ढे में लगाए लोहे की नुकीली सरिया पर गिरकर जख्मी हो गया। दो महीने इलाज के लिए जंगल मे तड़पता रहा। डीआरजी के जवानों ने घायल को खटिया पर बैठाया और पैदल ही लगभग 12 किलोमीटर दूर हॉस्पिटल तक लेकर गए। बताया जा रहा है कि घायल हालत में मिला नक्सली पिछले 11 सालों से हथियारबंद हिंसा में शामिल था। वह मालनगिरि एरिया समिति का सदस्य था और उस पर 5 लाख का इनाम भी था।

भीमा का दाहिना पैर बुरी तरह जख्मी है

भीमा का दाहिना पैर बुरी तरह जख्मी है। पैर में लोहे के सरिया और नुकीले पत्‍थरों के जख्‍म हैं और सूजन भी है। घायल अवस्था में पड़े नक्सली को जवानों ने शनिवार की देर रात दंतेवाड़ा जिला अस्पताल भर्ती कराया। डॉक्‍टर उसका इलाज कर रहे हैं। डॉक्‍टरों के अनुसार जंग लगे लोहे की छड़ से जख्‍म गहरा और हड्डियों तक पहुंच गया। जवानों को नुकसान पहुंचाने के लिए नक्सली गड्ढा खोदकर इसके अंदर नुकीली लोहे की सरिया गाड़ते हैं। फिर इसे सूखे पत्तों से ढंक देते हैं। ताकि जंगल मे ऑपरेशन पर आने वाला जवान इसकी चपेट में आकर घायल हो जाए। अक्सर यहां आईईडी भी नक्सली लगाते हैं।

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