Dr Rajendra Prasad Jayanti: बिहार से दिल्ली तक कैसे उठी डॉ. राजेंद्र प्रसाद की आवाज, पढ़िए उनका प्रेरक सफर
Dr. Rajendra Prasad Birth Anniversary 2025: भारत आज 3 दिसंबर 2025 को देश के प्रथम राष्ट्रपति, भारतरत्न डॉ. राजेंद्र प्रसाद की जयंती मना रहा है। देश की राजनीतिक इतिहास की सबसे ऊँची और सम्मानित हस्तियों में शामिल डॉ. प्रसाद न केवल स्वतंत्रता आंदोलन के महान योद्धा थे, बल्कि भारत के संविधान निर्माता, एक प्रतिष्ठित वकील, विद्वान, शिक्षक और राष्ट्रनिर्माण के महत्वपूर्ण स्तंभ भी थे।
राजेंद्र बाबू अक्सर कहा करते थे कि जो बात सिद्धांत में गलत है वह व्यवहार में भी गलत है उनका पूरा जीवन सादगी, समर्पण, ईमानदारी और राष्ट्रहित के आदर्शों से भरा हुआ था।

1884 में बिहार के जीरादेई में जन्मा एक विलक्षण प्रतिभा
डॉ. राजेंद्र प्रसाद का जन्म 3 दिसंबर 1884 को बिहार के सिवान जिले के जीरादेई गांव में हुआ। प्रारंभिक शिक्षा से ही उनकी प्रतिभा की चमक दिखने लगी थी। पांच वर्ष की उम्र में ही उनके पिता ने उन्हें एक मौलवी के पास फारसी, हिंदी और अंकगणित की शिक्षा दिलानी शुरू की। चमकदार मेधा के कारण वे आगे चलकर कलकत्ता विश्वविद्यालय पहुंचे और वहां अपनी पढ़ाई में शीर्ष स्थानों पर रहे।
वकालत से समाज सेवा-राष्ट्रनिर्माण में कदम
राजेंद्र प्रसाद ने वकालत के क्षेत्र में प्रवेश किया और जल्द ही अपनी तेज़ कानूनी बुद्धि से उच्च स्थान प्राप्त कर लिया। वे बिहार और बंगाल के प्रमुख वकीलों में गिने जाने लगे। लेकिन जब राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का आह्वान आया, तो उन्होंने बिना हिचक वकालत छोड़ दी और असहयोग आंदोलन में कूद पड़े। गांधीजी से प्रेरित होकर वे पूरी तरह से राष्ट्र सेवा में लग गए। स्वतंत्रता संग्राम में उनकी भूमिका अत्यंत निर्णायक रही।
कांग्रेस के प्रमुख नेता
समय के साथ वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सबसे प्रभावशाली नेताओं में शामिल हो गए। वे कई बार कांग्रेस के अध्यक्ष चुने गए और हर बड़े आंदोलन- नमक सत्याग्रह, सविनय अवज्ञा आंदोलन, Quit India Movement में उन्होंने सक्रिय भागीदारी निभाई। इतना ही नहीं 1931 और 1942 में उन्हें ब्रिटिश सरकार ने जेल भी भेजा।
स्वतंत्रता से पहले और बाद में, वे देश की जनता और भारतीय लोकतंत्र की मजबूती के लिए निरंतर कार्यरत रहे।
भारतीय संविधान निर्माण में अभूतपूर्व योगदान
डॉ. राजेंद्र प्रसाद भारतीय संविधान सभा के अध्यक्ष चुने गए-एक जिम्मेदारी जिसे उन्होंने अद्वितीय निष्पक्षता, धैर्य और नेतृत्व क्षमता के साथ निभाया। संविधान के निर्माण के दौरान उन्होंने विभिन्न समितियों के बीच तालमेल बनाया और देश को एक मजबूत लोकतांत्रिक ढांचा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
भारत के प्रथम राष्ट्रपति-12 वर्ष का ऐतिहासिक कार्यकाल
1950 में भारत गणराज्य बनने के बाद, डॉ. राजेंद्र प्रसाद को देश का पहला राष्ट्रपति चुना गया। वे आज तक भारत के एकमात्र राष्ट्रपति हैं जिन्होंने दो पूर्ण कार्यकाल पूरे किए-लगभग 12 वर्ष। उनके कार्यकाल के दौरान राष्ट्र ने कई बड़े सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक बदलाव देखे, और वे हमेशा अपनी सादगी व नैतिकता के लिए पहचाने गए।
राष्ट्रहित में उठाए अनोखे कदम
राष्ट्रपति पद छोड़ने के बाद उन्होंने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया और सांसदों तथा जनप्रतिनिधियों के नैतिक आचरण के लिए नई दिशानिर्देश तय किए। यह सादगी और नैतिक मूल्यों का ऐसा उदाहरण था, जिसकी तुलना आज भी दुर्लभ है। 1934 में जब भीषण भूकंप ने बिहार को हिला दिया, उस समय राजेंद्र प्रसाद जेल में थे।
हालात की गंभीरता को देखते हुए ब्रिटिश सरकार ने उन्हें दो दिन बाद रिहा किया ताकि वे राहत कार्यों का नेतृत्व कर सकें। इसके बाद उन्होंने बिहार सेंट्रल रिलिफ कमिटी की स्थापना की, जिसने बड़े पैमाने पर सहायता पहुंचाई।
कमाल के लेखक थे डॉ. प्रसाद
स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान उन्होंने Searchlight और Desh जैसे क्रांतिकारी समाचार पत्रों के लिए लेख लिखे। वे धन जुटाकर इन पत्रों को चलाए रखने में भी मदद करते थे। वे एक प्रखर लेखक भी थे। उनकी प्रमुख पुस्तकें हैं:
- India Divided
- Words of Freedom
- Ideas of a Nation: Rajendra Prasad
- At the Feet of Mahatma Gandhi
इन रचनाओं ने भारतीय राष्ट्रवाद, राजनीति और लोकतंत्र पर गहरा प्रभाव छोड़ा। 1962 में, देश ने उनके योगदान को मान्यता देते हुए उन्हें सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया।












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