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दहेज हत्याएं रेप मर्डर से 25 गुना ज्यादा! निक्की भाटी कांड से उजागर हुआ चौंकाने वाला सच

Dowry Deaths In India: ग्रेटर नोएडा की 28 वर्षीय निक्की भाटी की दर्दनाक मौत ने पूरे देश को हिला दिया है। उनकी मौत से उपजा गुस्सा और न्याय की मांग केवल एक घटना तक सीमित नहीं है, बल्कि आंकड़े बताते हैं कि भारत में शादीशुदा महिलाओं पर होने वाली हिंसा कितनी गहरी और खतरनाक है। 21 अगस्त को ग्रेटर नोएडा के में निक्की भाटी को दहेज के लिए उसके पति और ससुराल वालों ने मिलकर जला दिया। पुलिस ने उनके ससुराल पक्ष के चारों लोगों को हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर लिया है।

गृह मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की 2022 की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में 6,516 महिलाएं दहेज हत्या (धारा 304B) का शिकार हुईं। यह संख्या रेप या गैंगरेप के बाद हत्या से मारी गई महिलाओं की तुलना में 25 गुना ज्यादा है।

Dowry Deaths In India

दहेज कानून की कमजोर पकड़

  • हिन्दुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक 2022 में 13,641 महिलाओं को दहेज प्रतिषेध अधिनियम (1961) के तहत पीड़ित के रूप में दर्ज किया गया। लेकिन अगर यही सही संख्या मान ली जाए, तो इसका मतलब हुआ कि हर तीसरी महिला, जिसे दहेज के लिए परेशान किया गया, अंत में मर जाती है।
  • साफ है कि ज्यादातर महिलाएं तब तक कानून का सहारा नहीं लेतीं जब तक स्थिति "नो रिटर्न" पर न पहुंच जाए। दहेज हत्याओं की संख्या, 1961 के दहेज निषेध अधिनियम के तहत मामलों की कम रिपोर्टिंग की सीमा को भी दिखाता है।

इंसाफ की धीमी रफ्तार

  • 2022 के अंत तक 60,577 दहेज हत्या के केस अदालतों में लंबित थे। इनमें से 54,416 केस पुराने थे। 2022 में सिर्फ 3,689 मामलों का निपटारा हुआ और उनमें भी सिर्फ 33% में सजा हुई।
  • उस साल 6,161 मामले ट्रायल के लिए भेजे गए, लेकिन सिर्फ 99 में सजा मिली। यानी निक्की भाटी का केस भी अगर चलेगा, तो उसके एक साल में सजा मिलने की संभावना 2% से भी कम है।

दहेज: सबसे सामान्य अपराध!

  • भारत में दहेज एक तरह से सबसे "सामान्यीकृत गैर-कानूनी प्रथा" बन चुका है। 2010 की किताब Human Development in India के मुताबिक दुल्हन के परिवार का शादी पर खर्च दूल्हे के परिवार से 1.5 गुना ज्यादा होता है।
  • 24% परिवारों ने स्वीकार किया कि उन्होंने टीवी, फ्रिज, कार या बाइक दहेज में दिया। 29% लोगों ने माना कि अगर दहेज में अपेक्षित पैसा न मिले तो महिला को पीटना "सामान्य बात" है।

NFHS का चौंकाने वाला डेटा

  • राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे (NFHS 2019-21) के मुताबिक 29% विवाहित महिलाएं (18-49 आयु वर्ग) अपने पति/साथी से शारीरिक या यौन हिंसा झेल चुकी हैं। इनमें से 24% ने पिछले एक साल में हिंसा का सामना किया।
  • इनमें से कई को गंभीर चोटें लगीं, 3.3% को गंभीर जलन, 7.3% को आंखों की चोट, हड्डी खिसकना या हल्की जलन और 6.2% को गहरी चोट, हड्डी टूटना, दांत टूटना और 21.8% को कटने-छिलने या शरीर में दर्द की समस्या हुई।

रिसर्च क्या कहती है?

  • 2024 में Public Library of Science ONE में प्रकाशित अध्ययन बताता है कि जिन लड़कियों के ससुराल वालों ने दहेज मांगा, उनके हिंसा झेलने की संभावना 3.64 गुना ज्यादा होती है।
  • आंकड़े साफ दिखाते हैं कि भारत में दहेज आज भी महिलाओं की जान लेने वाला सबसे बड़ा अपराध है। लेकिन असली सवाल यह है कि कानून और समाज कब तक इसे "सामान्य परंपरा" मानकर अनदेखा करते रहेंगे?
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