पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में कटौती पर कांग्रेस का तंज, सुरजेवाला बोले- जनता को बेवकूफ ना बनाएं
नई दिल्ली, मई 21। केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में कटौती का ऐलान कर आम आदमी को थोड़ी राहत प्रदान की है। बता दें कि केंद्र सरकार के इस फैसले के बाद पेट्रोल 9.50 रुपए प्रति लीटर और डीजल 7 रुपए प्रति लीटर सस्ता हो गया है। हालांकि सरकार के इस फैसले से विपक्ष खुश नजर नहीं आ रहा है। कांग्रेस पार्टी का कहना है कि सरकार जनता को बेवकूफ बनाना बंद करे, क्योंकि पिछले दो महीने में पेट्रोल की कीमतें जितनी बढ़ी हैं, सरकार ने उससे कम ही कटौती की है।

जनता को बेवकूफ बना रही है सरकार- सुरजेवाला
कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने ट्वीट कर कहा है कि केंद्र की मोदी सरकार जनता को बेवकूफ बना रही है, क्योंकि दो महीने पहले पेट्रोल की कीमत 95.41 रुपए प्रति लीटर थी। पिछले 2 महीने में सरकार ने पेट्रोल की कीमतों में 10 रुपए प्रति लीटर से भी अधिक की बढ़ोतरी की है और अब 9.50 रुपए प्रति लीटर की कटौती की है।
रणदीप सुरजेवाला ने अपने ट्वीट में कहा है, "प्रिय वित्त मंत्री जी, जनता को कितना बेवक़ूफ़ बनाएँगे?
आज पेट्रोल की क़ीमत है ₹105.41/लीटर।
आज आपने पेट्रोल की क़ीमत ₹9.50 कम की।
21 मार्च , 2022 को सिर्फ़ 60 दिन पहले,
पेट्रोल की क़ीमत ₹95.41/लीटर थी
60 दिन में आपने पहले पेट्रोल की क़ीमत ₹10/लीटर बढ़ा दी और अब ₹9.50/लीटर घटा दी।
सरकार के फैसले का क्रेडिट गहलोत ने दिया कांग्रेस को
रणदीप सुरजेवाला के अलावा राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सरकार के इस फैसले का क्रेडिट कांग्रेस पार्टी को दिया है। दरअसल, उन्होंने कहा है कि केंद्र सरकार ने यह फैसला विपक्ष के विरोध के दबाव में आकर लिया है। अशोक गहलोत ने कहा, "कांग्रेस द्वारा देशभर में लगातार मंहगाई के खिलाफ किए जा रहे विरोध प्रदर्शन एवं "नवसंकल्प शिविर, उदयपुर" में तय किए गए मंहगाई के विरुद्ध जनजागरण अभियान के दबाव से आज केन्द्र सरकार को पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी कम करने का फैसला करना पड़ा।"
केंद्र के फैसले पर अन्य नेताओं की प्रतिक्रिया
- टीएमसी सांसद सौगत रॉय ने कहा है कि केंद्र का यह फैसला बहुत अच्छा तो नहीं है, क्योंकि पिछले 2 महीने में सरकार ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों 10 रुपये तक की बढ़ोतरी की थी, लेकिन अब कटौती कम की है। केंद्र सरकार के पास अभी भी राज्यों पर (वैट को कम करने के लिए) दबाव डालने के बजाय उत्पाद शुल्क को कम करने का लचीलापन है क्योंकि राज्य का वित्त ज्यादातर मुश्किल में है।
- एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने कहा है कि यह कुछ नहीं से तो बेहतर ही है।












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