जावेद चिकना, सलीम कुत्ता, जावेद फावड़ा, ये भी नाम हैं भला !
नई दिल्ली, 10 मई। जावेद चिकना, सलीम कुत्ता, जावेद फावड़ा, रफीक डब्बा, सलीम गुटका, ताहिर टकला ! ये भी नाम हैं भला ? सुनने में कितने अटपटे हैं ! लेकिन अंडरवर्ल्ड की काली दुनिया में इन नामों का कभी खौफ रहा है। डर के मारे लोग इनका नाम अदब से लेते थे। जुर्म की दुनिया में असली नाम गुम हो जाते हैं और अजीबोगरीब नाम ही अपराधी की पहचान बन जाते हैं। ये नाम अपराधी की कदकाठी, रूप-रंग, काम करने के तरीके और आदतों के आधार पर पड़ जाते हैं। एनआइए ने सोमवार को अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम के करीबियों के ठिकानों पर छापा मारा था।

इस रेड में दाऊद के गुर्गे जावेद चिकना से जुड़े लोगों के ठिकाने भी खंगाले गये हैं। जावेद चिकना का मूल नाम जावेद पटेल है। एनआइए ने जांच में पाया है कि दाऊद टेरर फंडिंग का इस्तेमाल कर मुम्बई में फिर अपने गैंग को खड़ा करना चाहता है। भारत में उसके गुर्गे अवैध वसूली करते हैं और इन पैसों का इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों के लिए किया जा रहा है। उसने खूंखार शूटरों का एक दस्ता तैयार किया है जो मुम्बई में नामचीन हस्तियों पर हमला कर एक बार फिर भय का साम्राज्य स्थापित करना चाहता है। इन सबका कनेक्शन 1993 के मुम्बई सीरियल ब्लास्ट से है।

जावेद चिकना
जावेद चिकना भी अब दाउद तरह पाकिस्तान में ही रहता है। चिकना ही वह शख्स है जिसने टाइगर मेमन के साथ मिल कर 1993 में मुम्बई बम धमाके की साजिश रची थी। वह हवाला कारोबार से जुड़ा है। छह साल पहले खबर आयी थी कि चिकना पाकिस्तान में रेस्टोरेंट चला रहा था। पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आइएसआइ से भी उसका संबंध है। जावेद चिकना टाइगर मेमन का खास आदमी था। वह देखने में गोरा और सुंदर था। उसकी दाढ़ी-मूछें नहीं के बराबर उगीं थीं। इसलिए उसे चिकना कहा जाने लगा। वह मेमन के लिए सोना की तस्करी किया करता था। जब दाउद ने मुम्बई धमाके की साजिश तो उसने टाइगर मेमन को भरोसेमंद लोगों को चुनने का जिम्मा दिया था। जावेद चिकना भी इनमें एक था। मेमन ने चिकना को दुबई के रास्ते पाकिस्तान भेजा था जहां उसने बम बनाने की ट्रेनिंग ली थी।

सलीम कुत्ता
सलीम शेख का नाम सलीम कुत्ता इसलिए पड़ा क्यों कि वह अपने शिकार पर किसी खतरनाक कुत्ते की तरह झपटता था और बर्बर तरीके से मार डालता था। दाऊद इब्राहिम के भारत छोड़ने के बाद उसका काला धंधा उसकी बहन हसीना पारकर संभालती थी। अंडरवर्ल्ड के एक और डॉन अरुण गवली की दाऊद से जानी दुश्मनी थी। गवली के शूटरों ने हसीना पारकार के पति यानी दाऊद के बहनोई को मार डाला था। हत्या का आरोप गवली के खास शूटर शैलेश हलदकर पर लगा था। शैलेश इलाज के सिलसिले में मुम्बई के जेजे अस्पताल में भर्ती था। अपने बहनोई की हत्या का बदला लेने के लिए दाऊद ने अस्पताल में भर्ती शैलेश पर हमला कराया था। ये जुलाई 1992 की बात है। अंडरवर्ल्ड गैंगवार में पहली बार एक-47 का इस्तेमाल किया गया था। सलीम कुत्ता पर ही शैलेश को मारने का आरोप लगा था। इसके बाद सलीम कुत्ता दाऊद का सबसे भरोसेमंद शूटर न गया। उसका खौफ इतना बढ़ गया था कि वह छोटा शकील के साथ मिल कर वारदात को अंजाम देता था।

फावड़ा, मचमच जैसे भी नाम
जावेद फावड़ा दाऊद गैंग का शार्प शूटर माना जाता था। उसके दांत फावड़ा की तरह बाहर निकले हुए थे। इसलिए अपराध की दुनिया में उसे जावेद फावड़ा कहा जाता था। 2013 में मुम्बई में अबु सायेमा नाम के एक शख्स की हत्या हुई थी। पुलिस का कहना था कि मारे गये व्यक्ति का नाम जावेद फावड़ा है और वह कुख्यात गैंगस्टर है। फावड़ा पर कैसेट किंग गुलशन कुमार की हत्या का आरोप था। लेकिन इस मामले में पुलिस पर इनकाउंटर का आरोप लगा था। फहीम मचमच छोटा शकील का खास आदमी था। वह बहुत ज्यादा बोलता था इसलिए उसके नाम में मचमच जुड़ गया था। दाऊद के पाकिस्तान जाने के बाद छोटा शकील मुम्बई का धंधा संभाल रहा था। फहीम मचमच दाउद के नाम पर हफ्ता वसूली करता था। वह मुम्बई के भिंडी बाजार इलाके का रहने वाला था। बाद में वह भी पाकिस्तान चला गया। खबरों के मुताबिक अगस्त 2001 में उसकी पाकिस्तान में ही कोरोना से मौत हो गयी थी। मुम्बई बम धमाके का एक और दोषी था ताहिर मर्चेंट। वह चूंकि गंजा था इसलिए उसका नाम ताहिर टकला पड़ गया। टकला को इस केस में सजाये मौत सुनायी गयी थी। वह यरवदा जेल में सजा काट रहा था। लेकिन अप्रैल 2018 में उसे दिल का दौरा पड़ा और जेल में उसकी मौत हो गयी थी।
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