इन उपायों से करें भगवान गणेश को खुश, बन जाएंगे सारे काम
नई दिल्ली। सोमवार को सभी देवों में प्रथम पूज्य श्रीगणेश की स्थापना घर-घर में हो गई है। कोई भी देव पूजा विधान हो या कोई शुभ कार्य का प्रारंभ, बगैर गणेशजी की आराधना के वह पूर्ण और सफल नहीं हो सकता। इसलिए भगवान गणेश को विघ्नहर्ता और सिद्धिदायक कहा जाता है। भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी से चतुर्दशी तक के दस दिन भगवान गणेश को प्रसन्न करने के लिए सर्वश्रेष्ठ दिन कहे गए हैं।
इन दिनों में जो सच्ची श्रद्धा से श्रीगणेश की की आराधना करता है उन पर वर्षभर गणेशजी की कृपा बनी रहती है। इसलिए यहां मैं आपको कुछ ऐसे विधान बता रहा हूं जिनसे गजानन शीघ्र प्रसन्न होकर मनचाहा वरदान प्रदान करेंगे, लेकिन ध्यान रहे आप जिस भी विधान या मंत्र को अपनाएं उसे पूरी श्रद्धा, शुद्धता और भक्ति के साथ करें।

हरित गणपति प्रयोग
भगवान गणेश का हरित रूप सर्वसिद्धी दायक कहा गया है। हरित रूप यानी भगवान गणेश की हरे रंग की प्रतिमा। अधिकांशतः मंदिरों में और घरों में गणेश की सिंदूरी या लाल प्रतिमा ही देखी होगी, लेकिन हरे रंग की गणेश प्रतिमा सर्वविघ्न दूर करने में सक्षम है। यदि किसी का व्यापार-व्यवसाय या नौकरी ठीक नहीं चल रही है।
व्यापार में खूब मेहनत करने के बाद भी मनचाहा परिणाम नहीं मिल रहा है तो उसे व्यापार स्थल पर उत्तर की ओर मुख करके हरित गणेश की स्थापना करना चाहिए। हरे रंग की गणेश प्रतिमा को गद्दे और तकियों के साथ विराजमान करना चाहिए और उनका नियमित पूजन करें। प्रत्येक बुधवार को गणेशजी को शमी चढ़ाएं और पीली मिठाई का भोग लगाएं। सारे कार्य यथाशीघ्र बनने लगेंगे। बाधाएं दूर होंगी और व्यापार में तरक्की होने लगेगी।

श्वेतार्क गणपति
सफेद आंकड़े की जड़ में स्वतः बनने वाले गणपति की पूजा भी सिद्धिदायक होती है। ध्यान रहे श्वेतार्क गणपति की प्रतिमा का मुख पूर्व दिशा की ओर हो। उन्हें आसन पर विराजित कर लाल रंग के वस्त्र पहनाएं और मोदक का भोग लगाकर ओम गणपतये नमः की 11, 21 या 51 माला का नियमित जाप करें। हर माला के बाद ओम गणपतये नमः बोलकर घी से अग्नि में आहुति दें।

विवाह कार्य
अगर परिवार में कोई समस्या चल रही हो। क्लेश बना हुआ है। पारिवारिक सदस्यों के बीच मनमुटाव बना हुआ है। सब एक-दूसरे से नाराज रहते हों। या परिवार में विवाह योग्य युवक- युवती हों और उनके विवाह की बात नहीं बन पा रही हो तो ओम वक्रतुंडाय हुं का जाप करें।

शत्रु संकट से मुक्ति
यदि आपका कोई शत्रु हो और वो कोई कार्य सफल नहीं होने दे रहा है। जीवन में कोई दुख हो या कोई बीमार हो तो ओम गं ग्लौं गणपतये विघ्न विनाशिने स्वाहा मंत्र की 21 माला 10 दिन तक जाप करें। शत्रु विनाश चाहते हैं तो गणपति की प्रतिमा के पास बैठक हस्ति पिशाचि लिखे स्वाहा का जाप करें और गणपति को लाल चंदन और लाल पुष्प चढ़ाएं।

भय दूर करने के लिए
यदि आपके मन में किसी कार्य के पूर्ण होने को लेकर संशय है। या मन में किसी तरह का अनजाना भय रहता है तो एक सिद्ध तांत्रिक प्रयोग किया जा सकता है। चूंकि यह एक तांत्रिक प्रयोग है इसलिए इसके लिए कुछ नियमों का पालन करना होगा। इसमें प्रमुख रूप से शुद्धता का पालन है।
तन और मन की शुद्धता आवश्यक है। प्रयोग इस प्रकार है: किसी कुम्हार के घर जाकर उसके चाक से मिट्टी ले आएं और उससे अंगूठे के बराबर आकार की गणेश की मूर्ति बनाएं। उस मूर्ति के सामने बैठक ओम ह्रीं ग्रीं ह्रीं मंत्र 101 माला जपें। सात दिनों तक रोजाना इसी तरह करें। आप स्वयं चमत्कार देखेंगे।

कर्ज मुक्ति के लिए
यदि आप कर्ज में फंसे हुए हैं और न चाहते हुए भी कर्ज लेने की नौबत आ जाती है तो गणेश अथर्वशीर्ष का नियमित पाठ करें।












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