डीएमके कोषाध्यक्ष दुरईमुर्गन ने की चंद्रबाबू नायडू से मुलाकात, नए राजनीतिक समीकरणों की लगी अटकलें

अमरावती: लोकसभा चुनाव अपने अंतिम दौर में है और सबको 23 मई को आने वाले चुनाव नतीजों का इंतजार है। देश मे एक तरफ मोदी सरकार को रोकने के लिए गैर बीजेपी गठबंधन के लिए कोशिशें तेज हो गई हैं। वहीं दूसरी और गैर बीजेपी और गैर कांग्रेस गठबंधन की जगह फेडरल फ्रंट के लिए भी रणनीति बननी शुरू हो गई है। जानकारों के मुताबिक इस बार त्रिशंकु लोकसभा के आसार हैं। इसी कड़ी में डीएमके कोषाध्यक्ष दुरईमुरुगन ने मंगलवार को आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एवं टीडीपी प्रमुख एन चंद्रबाबू नायडू से मुलाकात की।ट

डीएमके कोषाध्यक्ष की नायडू से मुलाकात के मायने

डीएमके कोषाध्यक्ष की नायडू से मुलाकात के मायने

डीएमके कोषाध्यक्ष और पार्टी के सीनियर नेता दुरईमुरुगन ने नायडू से मुलाकात टीआरएस प्रमुख के चंद्रशेखर राव और डीएमके प्रमुख स्टालिन के बीच चेन्नई में हुई बैठक के बाद की है। इन दोंनो नेताओं के बीच फेडरल फ्रंट के प्रस्ताव पर बातचीत हुई थी। केसीआर लोकसभा चुनाव के शुरू होने से पहले ही फेडरल फ्रंट के पक्ष में रहे हैं। जबकि स्टालिन कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी को पीएम पद के लिए समर्थन देने की बात कर चुके हैं। स्टालिन ने केसीआरक के प्रस्तावित फेडरल फ्रंट का समर्थन करने से इनकार कर दिया है। इसलिए दुरईमुरुगन और नायडू की मुलाकात को राजनीतिक महत्व से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

नायडू और राव राष्ट्रीय राजनीति में चाहते हैं जगह

नायडू और राव राष्ट्रीय राजनीति में चाहते हैं जगह

अपने परिवार के साथ नायडू से मिलने अमरावती आए दुरईमुरुगन ने बैठक के बाद मीडियाकर्मियों से बात करने से इनकार कर दिया। मीडिया उनकी प्रतिक्रिया के लिए काफी देर से जमा थी। गौरतलब है कि चंद्रबाबू नायडू और केसीआर राष्ट्रीय राजनीति में अपनी भूमिकाओं को लेकर पिछले कुछ महीनों से काम कर रहे हैं। ये दोनों क्षत्रप खुद को एक-दूसरे से बड़ा दिखाने में लगे हैं।

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नए राजनीतिक समीकरणों की आहट

नए राजनीतिक समीकरणों की आहट

टीडीपी प्रमुख जो पहले एनडीए में थे। एनडीए छोड़ने के बाद वो दावा कर रह हैं कि वो गैर बीजेपी दलों को राष्ट्रीय स्तर पर एक मंच पर लाए हैं। वहीं दूसरी तरफ केसीआर फेडरल फ्रंट के लिए क्षेत्रीय दलों से समर्थन मांग रहे हैं। उनका कहना है कि केंद्र में गैर बीजेपी और गैर कांग्रेसी सरकार बननी चाहिए। लेकिन दिलचस्प पहलू ये है कि दोनों की तरफ से करी जा रही राजनीतिक गोलबंदी को कोई आकार अभी तक नहीं मिला है। हालांकि दक्षिण भारत के प्रमुख राज्यो के दोनों सीएम इसकी पुरजोर कोशिशों में लगे हैं। दोनों नेताओं के मेहनत के बीच डीएमके कोषाध्यक्ष की टीडीपी प्रमुख से मुलाकात ने राजनीति को दिलचस्प बना दिया है।

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