'विवादों का समाधान बातचीत-कूटनीति से होना चाहिए', BRICS में बोले विदेश मंत्री जयशंकर
BRICS Summit 2024: रूस के कजान में आयोजित 16वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भाग लिया। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में विदेश मंत्री जयशंकर ने विवादों को सुलझाने के लिए बातचीत और कूटनीति की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने इस बात पर जोर देते हुए कहा कि एक बार समझौते हो जाने के बाद उनका अक्षरशः पालन किया जाना चाहिए।
विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा, 'प्रधानमंत्री मोदी ने इस बात पर ज़ोर दिया है कि यह युद्ध का युग नहीं है। विवादों और मतभेदों को बातचीत और कूटनीति के ज़रिए सुलझाया जाना चाहिए। एक बार जब समझौते हो जाते हैं, तो उनका पूरी ईमानदारी से सम्मान किया जाना चाहिए। बिना किसी अपवाद के अंतर्राष्ट्रीय कानून का पालन किया जाना चाहिए।'

विदेश मंत्री की यह टिप्पणी भारत और चीन के बीच पूर्वी लद्दाख में लंबे समय से चले आ रहे सैन्य गतिरोध को हल करने के लिए एक महत्वपूर्ण समझौते पर पहुंचने के तुरंत बाद आई है। भारत और चीन के बीच हाल ही में हुए समझौते ने पीएम नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच पांच साल में पहली द्विपक्षीय वार्ता का मार्ग प्रशस्त किया है।
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान प्रतिनिधिमंडल स्तर की चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, 'आपसी विश्वास, सम्मान और संवेदनशीलता द्विपक्षीय संबंधों का मार्गदर्शन करेंगे।' इतना ही नहीं, विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने कहा कि हम इस विरोधाभास का सामना कर रहे हैं कि परिवर्तन की ताकतें आगे बढ़ने के बावजूद कुछ पुराने मुद्दे और भी जटिल हो गए हैं।
एक ओर, उत्पादन और उपभोग में लगातार विविधता आ रही है। उपनिवेशवाद से स्वतंत्रता प्राप्त करने वाले राष्ट्रों ने अपने विकास और सामाजिक-आर्थिक प्रगति को गति दी है। नई क्षमताएं उभरी हैं, जिससे अधिक प्रतिभाओं का इस्तेमाल आसान हुआ है। यह आर्थिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पुनर्संतुलन अब उस बिंदु पर पहुंच गया है जहां हम बहु-ध्रुवीयता पर विचार कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि हम एक अधिक न्यायसंगत वैश्विक व्यवस्था कैसे बना सकते हैं? 1) सबसे पहले स्वतंत्र प्रकृति के प्लेटफ़ॉर्म को मज़बूत और विस्तारित करके। विभिन्न डोमेन में विकल्पों को व्यापक बनाकर और उन पर अनावश्यक निर्भरता को कम करके जिनका लाभ उठाया जा सकता है। इसमें ब्रिक्स ग्लोबल साउथ के लिए एक अंतर बना सकता है।
2- स्थापित संस्थानों और तंत्रों में सुधार करके, विशेष रूप से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थायी और गैर-स्थायी श्रेणियों में सुधार करके। इसी तरह बहुपक्षीय विकास बैंक मे सुधार करके, जिनकी कार्य प्रक्रियाएँ संयुक्त राष्ट्र की तरह ही पुरानी हैं। भारत ने अपने जी20 प्रेसीडेंसी के दौरान एक प्रयास शुरू किया और हमें यह देखकर खुशी हुई कि ब्राज़ील ने इसे आगे बढ़ाया।
3- अधिक उत्पादन केंद्र बनाकर वैश्विक अर्थव्यवस्था का लोकतंत्रीकरण करके। 4- वैश्विक बुनियादी ढांचे में विकृतियों को ठीक करके जो औपनिवेशिक युग से विरासत में मिली हैं। दुनिया को अधिक कनेक्टिविटी विकल्पों की आवश्यकता है जो रसद को बढ़ाएं और जोखिमों को कम करें। यह एक सामूहिक प्रयास होना चाहिए, जिसमें क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता का पूरा सम्मान हो।












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