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डिनर पर चर्चा: उपचुनाव में बीजेपी की हार से क्यों उत्साहित है कांग्रेस?

By अखिलेश श्रीवस्तव, संपादक, हिंदी वनइंड
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अखिलेश श्रीवास्तव

संपादक, हिंदी वनइंडिया
प्रिंट, टेलीविजन और डिजिटल पत्रकारिता में 18 वर्षों का अनुभव।
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    नई दिल्ली। 14 मार्च को आए उपचुनाव के नतीजों से कांग्रेस में उत्साह का माहौल है बावजूद इसके कि फूलपुर और गोरखपुर में उसके उम्मीदवार अपनी जमानत तक नहीं बचा पाए। ये सब देखने को मिला, उस डिनर पार्टी में जो इन नतीजों के एक दिन बाद कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद के घर पर आयोजित की गई। इस डिनर में पार्टी के तमाम वरिष्ठ और युवा नेता मौजूद थे। प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया के पत्रकारों को भी आमंत्रित किया गया था। कांग्रेसी नेताओं के चेहरे पर संतोष के भाव दिखाए दे रहे थे। अखिलेश-मायावती ने कांग्रेस को ये सबक दिया कि सही वक्त पर अगर सही रणनीति अपनाई जाए तो बीजेपी को 2019 में हराया जा सकता है और मोदी लहर को एमपी, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में थामा जा सकता है।

    उपचुनाव में बीजेपी की हार से क्यों उत्साहित है कांग्रेस?

    ज्योतिरादित्य सिंधिया और मध्यप्रदेश की जीत
    ज्योतिरादित्य सिंधिया इस पार्टी में आकर्षण का मुख्य केंद्र थे। मुंगावली और कोलारस उपचुनाव की जीत का सारा श्रेय स्वभाविक तौर पर उन्हें ही दिया जा रहा था। वो बता रहे थे कि कितनी कठिन थी लड़ाई। "इससे पहले मैंने इतना कठिन चुनाव नहीं लड़ा था, जिसमें मैं एकतरफ और दूसरी तरफ मुख्यमंत्री और उनकी पूरी सरकार थी।" कांटे की इस टक्कर में अंतिम परिणाम के तौर पर विजय भाव उनके चेहरे पर जरूर था।

    सिंधिया कह रहे थे कि चुनाव जीतना कोई रॉकेट साइंस नहीं है, बस कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर नेताओं को जमीन पर काम करने की जरूरत है। खुद को सीएम चेहरा घोषित करने के सवाल पर वो बोले, भले पार्टी नेतृत्व ये करे या ना करे लेकिन सभी संबंधित पक्षों को एकसाथ बैठाकर जल्द से जल्द रोडमैप तैयार करे और उसके क्रियान्वयन की नियमित अंतराल में समीक्षा करे। उनका मानना था कि मध्यप्रदेश में बीजेपी को हराना मुश्किल नहीं है लेकिन कांग्रेस को तुरंत इस काम में जुटने के लिए रणनीति और उस पर अमल शुरू करना होगा।

    पीएल पुनिया और छत्तीसगढ़
    पीएल पुनिया पर छत्तीसगढ़ को बीजेपी से छीनने की जिम्मेदारी है। कभी मायावती के साथी रहे पुनिया यूपी के नतीजों से तो खुश नजर आ रहे थे लेकिन वहां कांग्रेस की हालत पर बोले, कि यूपी के अलावा भी देश बहुत बड़ा है। वो बोले "जहां हम बीजेपी से सीधे मुकाबले में हैं, उधर हम उन्हें कड़ी टक्कर दे रहे हैं।" छत्तीसगढ़ में चुनावी तैयारियों के बारे में वो आश्वस्त नजर आए। उनका मानना था कि छत्तीसगढ़ पहला राज्य होगा जहां से बीजेपी का सफाया होना शुरू होगा। छत्तीसगढ़ में जोगी फैक्टर कितना प्रभावी है, इस सवाल पर वो बोले कि उनका अपना एक प्रभाव है लेकिन कोई एक व्यक्ति दावेदार नहीं, हम भी उन इलाकों में पुरजोर तरीके से काम कर रहे हैं।

    सीपी जोशी और राजस्थान
    मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के अलावा राजस्थान को लेकर पार्टी आशान्वित है। उप चुनाव और उसके बाद नगरीय निकाय के चुनाव में सचिन पायलट के नेतृत्व में पार्टी ने जिस तरह परफॉर्म किया है उससे पार्टी उत्साहित है। उपचुनाव के नतीजों ने बीजेपी को चिंता में जरूर डाला है और यही वजह है कि पार्टी ने अपनी बदली रणनीति के तहत जातीय समीकरण साधना शुरू कर दिया है। किरोड़ीलाल मीणा को शामिल करना इसी रणनीति का हिस्सा है। आने वाले दिनों में बीजेपी की तरफ से कुछ अप्रत्याशित कदम दिखाई दे सकते हैं जो कांग्रेस के लिए ये लड़ाई और कठिन बना सकते हैं।

    नाक की लड़ाई कर्नाटक
    हिंदी प्रदेशों की चुनावी जंग से पहले असल नाक की लड़ाई कर्नाटक की है। भ्रष्टाचार के आरोपों पर सिद्धारमैया सरकार कठघरे में है तो बीजेपी के सीएम चेहरा येदुरप्पा भ्रष्टाचार के आरोपों में जेल काट चुके हैं। कांग्रेसी नेताओं का मानना है कि अगर हम कर्नाटक में बीजेपी को रोक पाने में कामयाब हो गए तो बीजेपी के सांप्रदायिक एजेंडे का अंत करने में कामयाब होंगे और उसके बाद तीनों हिंदी प्रदेशों से बीजेपी की उल्टी गिनती शुरू हो जाएगी। कर्नाटक के बारे में हालांकि कांग्रेस के एक युवा नेता और पूर्व मंत्री का कहना था कि किसी चुनाव के बारे में कुछ भी नहीं कहा जा सकता, उस वक्त की परिस्थितियों पर बहुत कुछ निर्भर करता है। आज के वक्त में तो हमेशा साथ रहने वाली पत्नी का भी भरोसा नहीं रहता कि वो किसे वोट देंगीं।

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    English summary
    Discussion on dinner : reasons behind why congress are happy after the verdict of UP ByPoll 2018.

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