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Rajastha: राजपूत समाज पर अनर्गल टिप्पणी से दिगराज सिंह शाहपुरा ने जताई नाराजगी, याद दिलाया शौर्य भरा इतिहास

Rajasthan News: गर्मी के इस मौसम में जारी लोकसभा चुनाव के बीच सियासी तापमान भी चढ़ा हुआ है। राजनीतिक पार्टियों के विवादित बयान से राजपूत समाज नाराज है, जिस पर अब दिगराज सिंह शाहपुरा (Digraj Singh Shahpura) ने अपनी कड़ी प्रतिक्रिया जाहिर की है।

दरअसल, चुनावी माहौल के बीच रैलियों को संबोधित कर रहे बीजेपी-कांग्रेस समेत अन्य पार्टियों के नेता एक-दूसरे पर हमला करते वक्त ऐसे शब्दों का इस्तेमाल करते है, जिनसे लोगों की भावनाओं को भी ठेस पहुंचती है। ऐसे में अब उन नेताओं को अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा (ABKM) राजस्थान प्रदेश अध्यक्ष युवा विंग के दिगराज सिंह शाहपुरा ने सीख दी है।

Digraj Singh Shahpura

लोकसभा चुनाव के मद्देनजर बीते कई दिनों से राजपूत समाज को लेकर कई राजनीतिक पार्टियां ने तरह-तरह के बयान दिए हैं, जिससे राजपूत समाज में खासी नाराजगी है, जिस पर समाजसेवी और मशहूर शाहपुरा होटल्स एंड रिसॉर्ट्स के निदेशक दिगराज सिंह ने कहा है कि देश की संस्कृति को बचाने के लिए हमारे पूर्वजों ने बलिदान दिया है। उन्होंने कहा कि संस्कृतियों की देश की सभ्यताओं की रक्षा करने के लिए मरना पड़ता है। हमारे पूर्वजों ने वह बलिदान दिया है।

दिगराज सिंह ने कहा कि पशु जब धमकाने से बाहर ना निकले तो लठ उठाने पड़ते हैं। संस्कृतियों की देश की सभ्यताओं की रक्षा करने के लिए मरना पड़ता है। हमारे पूर्वजों ने वह बलिदान दिया है। लड़े थे, मरे थे, कटे थे लेकिन कभी पीछे नहीं हटे जिन्होंने प्रजा को सदैव ईश्वर रूप में पूजा उनकी रक्षा के लिए अपने प्राण , आत्मसम्मान व परिवार तक को न्योछावर कर दिया, जिन्होंने प्रजा की रक्षा के लिए अपने रक्त को पानी के मोल से सस्ता कर दिया। ऐसे वीरो हेतु उपयोग में लिए गए अपशब्दों की मैं कड़ी निंदा करता हूं।

दिगराज सिंह शाहपुरा ने कहा कि आज कोई भी आकर अनावश्यक टिप्पणी करके अपने विवादित बयानों से केवल जनता को भ्रमित कर वोटो की राजनीति कर रहा है। वे यह भूल रहे हैं कि आज भी इस देश में जब उस पल को याद किया जाता है तो ज्ञात होता है कि जिन राजा महाराजाओं पर वे टिप्पणी कर रहे हैं, उनके परिवार में 18 वर्ष से अधिक की आयु के युवा नहीं मिलते थे क्योंकि वह अपनी धरती मां व प्रजा की रक्षा हेतु अपने प्राणों को हथेली पर लेकर चलते थे।

उन्होंने कहा कि अपने आप को तप कि भांति समर्पित कर दुश्मन आक्रांताओं से लड़ते हुए अपने प्राणों को न्यौछावर कर देते थे। शाहपुरा ने कहा कि हमारा इतिहास, रक्त रंजित है। हमने इस धरती को अपने खून से सींचा है। इस मातृभूमि की अपने प्राण देकर रक्षा की है।

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