असम सरकार ने फिर से दोहराई 20 साल पुरानी मांग, हिमन्त बिश्व शर्मा ने कहा- हम भारत में हो सकते हैं सबसे आगे
नई दिल्ली, 31 मार्च। असम सरकार (Assam Government) ने अपनी दो दशक पुरानी मांग एक बार फिर दोहराई है। प्रदेश के मुख्यमंत्री हिमन्त बिश्व शर्मा (Himanta Biswa Sarma) ने सदियों पहले अंग्रेजों की एक परिकल्पना को सही ठहराया है। उन्होंने कहा है कि हम न केवल अपनी बिजली की खपत को बचा सकते हैं बल्कि अपने स्वास्थ्य और प्रबंधन में भी सुधार कर सकते हैं। विधानसभा (Assam Government) में सीएम हेमंत बिस्व सरमा ने प्रदेश के मुद्दों को विकास के लिए बाधक बताया और कहा कि असम के लोग आज भी आधी रात तक काम कर रहे होते हैं।

मुख्यमंत्री हिमन्त बिश्व शर्मा ने असम विधानसभा में साल 2002 से संसद के हर सत्र में बार-बार दोहराया गए सवाल को एक बार फिर से उठाया। उन्होंने कहा कि असम को अक्सर 'पिछड़ों की भूमि' या 'लाहे लाहे' यानि धीरे- धारे चलने वाला प्रदेश कहा जाता है। लेकिन यह प्रदेश अब कम से कम कुछ घंटों तक शेष भारत से आगे बढ़ सकता है। सीएम ने इसके लिए फिर असम में अलग समय क्षेत्र की मांग उठाई और कहा कि हमें एक अलग समय क्षेत्र की आवश्यकता है। जब तक हम नींद से उठते हैं और काम पर जाते हैं सूरज हमारे सिर के ऊपर होता है।
असम को कम से 2 घंटे आगे के टाइम जोन की आवश्यता: सीएम
असम विधानसभा में सीएम हिमन्त बिश्व शर्मा ने कहा कि हमें कम से कम दो घंटे आगे के समय क्षेत्र (IST) की आवश्यकता है। इससे न केवल बिजली की खपत बचाने के साथ स्वास्थ्य और प्रबंधन में भी सुधार कर सकते हैं। सीएम ने कहा कि वर्तमान में हम लगभग आधी रात तक काम कर रहे हैं। लेकिन अगर हमारी मांग पूरी होती है तो एक उन्नत समय क्षेत्र में हम अपनी जैविक घड़ी के अनुसार काम कर रहे होंगे और सो रहे होंगे। उन्होंने मांग पर बल देते हुए कहा कि हमारे पास एक संयुक्त समय क्षेत्र और एक संयुक्त कराधान नीति की आवश्यता है। इसमें सीमा विद वाऔर मुद्दे एक बाधा बन रहे हैं ऐसे में लोगों में अविश्वास की भावना है।
सदियों पहले अंग्रेजों की परिकल्पना सही
सीएम सीएम हिमन्त बिश्व शर्मा ने असम में देरी से काम शुरू होने की बात कही। उन्होंने कहा कि जब शेष देश और राज्य अपनी दैनिक व्यस्तता पर निकलते हैं तब तक असम के हरे-भरे बागानों ने एक घंटे का काम हो चुका होता है। सदियों पहले अंग्रेजों ने असम के चाय बागानों में एक अलग समय क्षेत्र की परिकल्पना को सीएम ने सही ठहराया और कहा कि अंग्रेजों की दूरदर्शिता और सम्पदा में औपनिवेशिक अभ्यास की निरंतरता के कारण के कारण उन्होंने असम में अलग समय क्षेत्र की बात की थी। चाय बागानों में बगान समय या स्थानीय समय का पालन मुख्य रूप से सूर्योदय पर निर्धारित एक समय क्षेत्र होता है।
साल 2004 में असम विधान सभा में अलग समय क्षेत्री की उठी थी मांग
वर्तमान में असम में सरकारी कार्यालय सुबह 9.30 बजे से शाम 5 बजे तक काम करते हैं। वर्ष 2014 में असम के तत्कालीन मुख्यमंत्री तरुण गोगोई ने एक स्थानीय समय क्षेत्र का प्रस्ताव दिया था। जिसमें भारतीय मानक समय (IST) से कम से कम 60 मिनट आगे था। उन्होंने तर्क दिया था कि इससे राज्य की ऊर्जा बचाने में सहायता मिलेगी। सूर्य के प्रकाश का पूरा उपयोग हो सकेगा। गोगोई ने दावा किया था कि ब्रिटिश शासन के दौरान भारत को तीन समय क्षेत्रों - बॉम्बे, कलकत्ता और बागान में विभाजित किया गया था। अब असम सरकार (Assam Government) ने फिर से यही मांग विधानसभा (Assam Assembly) में दोहराई है।
संसद में 2002 में उठाई गई थी मांग
इससे पहले ये सवाल मार्च 2002 में संसद में उठाया गया था। जिसके बाद उसी वर्ष विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा गठित एक उच्च स्तरीय समिति ने इस मुद्दे का अध्ययन किया था। अध्न्ययन में यह निष्कर्ष निकाला था कि कई जोन कठिनाइयों का कारण बन सकते हैं जो एयरलाइंस, रेलवे, रेडियो, टेलीविजन और टेलीफोन सेवाएं के सुचारू कामकाज को बाधित करेंगे। इसलिए एकीकृत समय के साथ जारी रखना सबसे अच्छा था। भारत पूर्व से पश्चिम तक लगभग 3000 किमी तक फैला हुआ है।
भारत पूर्वी से पश्चिमी छोर के समय में 2 घंटे का अंतर
देश के पूर्वी और पश्चिमी छोरों के बीच लगभग 28 डिग्री देशांतर है जिसके परिणामस्वरूप पश्चिमी और पूर्वी बिंदु के बीच लगभग दो घंटे का अंतर होता है। भारतीय मानक समय (उत्तर प्रदेश के मिजार्पुर में 82.5′ E देशांतर के आधार पर गणना की गई), अधिकांश भारतीयों को प्रभावित नहीं करता है, उन लोगों को छोड़कर जो पूर्वोत्तर क्षेत्र में रहते हैं जहां सूरज गर्मियों में सुबह 4 बजे के आसपास उगता है और शाम 4 बजे से पहले सर्दियों में अंधेरा हो जाता है। इसलिए पूर्वोत्तर क्षेत्र ने लंबे समय से उनके जीवन और उनकी अर्थव्यवस्थाओं पर एकल समय क्षेत्र के प्रभाव के बारे में शिकायत की है।












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