जानिए कैसे लगवाया गया भारतीय ट्रेनों में टॉयलेट?
नयी दिल्ली। भारतीय ट्रेन का इतिहास बहुत पुराना है। सालों पहले इस की शुरुआत हुई। लेकिन क्या आप भारतीय ट्रेनों में लगे शौचालयों की शुरुआत के बारे में जानते हैं? क्या आप जानते है कि भारतीय ट्रेनों में शौचालयों की शुरुआत कैसे हुई? अगर नहीं तो जानिए कि आखिर कैसे भारतीय ट्रेनों में शौचालय लगाने का प्रस्ताव आया?

आपको यह जानकर हैरानी होगी कि भारत में पहली ट्रेन चलने के पचास साल बाद टॉयलेट की जरूरत महसूस हुई, शौचालयों की शुरुआत एक पत्र के जरिए की गई। इस पत्र को 1909 में एक यात्री ने लिखा था। 1909 में ओखिल चंद्र सेन नामक एक यात्री को पैसेंजर ट्रेन से यात्रा के दौरान शौचालय न होने की वजह से बड़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। जिसके बाद उन्होंने एक चिट्ठी लिखी थी और उनकी चिट्ठी के बाद ही शौचायल का प्रस्ताव आया। उन्होंने साहिबगंज रेल डिवीजन के ऑफिस को एक पत्र लिखा।
पढ़िए क्या था वो पत्र जिसकी वजह से ट्रेनों में लगवाए गए टॉयलेट
प्रिय श्रीमान,
मैं पैसेजंर ट्रेन से अहमदपुर स्टेशन आया और मेरे पेट दर्द की वजह से सूज रहा था। मैं शौच के लिए वहां एकांत में गया। मैं शौच से निवृत्त हो ही रहा था कि ट्रेन चल पड़ी। मैं एक हाथ में लोटा और दूसरे हाथ में धोती पकड़कर दौड़ा, लेकिन प्लेटफार्म पर गिर पड़ा। मेरी धोती खुल गई और मुझे वहां मौजूद सभी महिला-पुरुषों के सामने शर्मिन्दा होना पड़ा। मेरी ट्रेन छूट गई और मैं अहमदपुर स्टेशन पर ही रह गया।

यह कितनी बुरी बात है कि एक यात्री शौच के लिए गया हो और ट्रेन का गार्ड कुछ मिनट उसका इंतजार भी नहीं कर सकता। इसलिए मेरा विनम्र निवेदन है कि जनता की भलाई के लिए उस गार्ड पर भारी जुर्माना करे।
आपका विश्वसनीय सेवक
ओखिल चंद्र सेन












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