धोनी झारखंड के स्थायी निवासी माने जाएंगे या नहीं ? 1932 के खतियान में नाम रहना हुआ जरूरी
रांची, 15 सितंबर: झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार ने तमाम राजनीतिक संकटों के बीच एक बहुत बड़ा फैसला किया है। उसने प्रदेश में नई डोमिसाइल पॉलिसी की घोषणा कर दी है, जिसके तहत राज्य के स्थायी निवासी का लाभ उठाने के लिए 1932 के लैंड रिकॉर्ड में नाम होना जरूरी है। जो लोग भूमिहीन हैं या किसी वजह से उनका नाम 1932 के खतियान में दर्ज नहीं है तो वह अपने ग्राम सभा से इसके लिए संपर्क कर सकते हैं। लेकिन, भारत के स्टार क्रिकेटर महेंद्र सिंह धोनी इनमें से किसी भी दायरे में नहीं आते। जबकि, धोनी का परिवार पिछले करीब 6 दशकों से स्थायी तौर पर रांची में रह रहा है।

धोनी झारखंड के स्थायी निवासी माने जाएंगे या नहीं ?
मुश्किल से 6 महीने पहले ही झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा था कि डोमिसाइल नीति लागू करने के लिए सिर्फ 1932 के खतियान को ही आधार नहीं माना जा सकता। क्योंकि, न्यायिक परीक्षण में यह नाकाम हो सकता है। लेकिन, बुधवार को झारखंड सरकार ने प्रदेश के आदिवासी-मूल-निवासियों की मांग को देखते हुए यह राजनीतिक फैसला कर लिया कि झारखंड का स्थानीय-निवासी उन्हें ही माना जाएगा, जिनका या जिनके पूर्वजों का नाम 1932 के लैंड रिकॉर्ड (खतियान) में होगा। इसलिए यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि भारतीय क्रिकेटर महेंद्र सिंह धोनी झारखंड के स्थायी निवासी माने जाएंगे या नहीं?

58 वर्षों से स्थायी तौर पर झारखंड में रह रहा है धोनी का परिवार
महेंद्र सिंह धोनी के पिता पान सिंह धोनी 1964 में ही रांची आ गए थे, तब झारखंड बिहार का हिस्सा था। पान सिंह धोनी सरकारी क्षेत्र के मेकॉन लिमिटेड में काम करते थे। वह शहर के मेकॉन स्टेडियम के पास ही एक-बेडरूम के घर में अपने परिवार के साथ रहने लगे, जहां महेंद्र सिंह धोनी का 7 जुलाई, 1981 को जन्म हुआ था। वैसे उनके पिता मूल रूप से उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के रहने वाले हैं, लेकिन अब उनका परिवार झारखंड का स्थायी निवासी हो चुका है। धोनी ने भी रांची में ही अपना आलीशान घर बना लिया है। लेकिन,अब झारखंड मुक्ति मोर्चा-कांग्रेस और राजद की गठबंधन सरकार के डोमिसाइल नीति वाले फैसले से इस परिवार का 58 वर्षों से झारखंड में स्थायी तौर पर रहने के बावजूद इनकी स्थानीयिता पर प्रश्नचिन्ह लगा दिया गया है।

मौजूदा फैसले से धोनी नहीं माने जा सकते स्थायी निवासी- वकील
जब झारखंड सरकार के इस फैसले से क्रिकेटर महेंद्र सिंह धोनी के झारखंड के स्थायी निवासी होने को लेकर पटना हाई कोर्ट के वकील आदित्यनाथ से वनइंडिया ने सवाल किया तो उन्होंने कहा कि "मौजूदा फैसले से तो धोनी झारखंड के स्थायी निवासी नहीं माने जा सकते।" हालांकि, इस मामले में सोरेन सरकार का फैसला फिलहाल अंतिम नहीं माना जा सकता। क्योंकि, सूत्रों के मुताबिक राज्य सरकार पहले इसे विधानसभा से पास कराएगी और फिर फाइनल मंजूरी के लिए केंद्र सरकार को भेजेगी। यह भी कहा जा रहा है कि सोरेन सरकार केंद्र से कहेगी कि इस नीति को संविधान की नौंवी सूची में डाल दे, ताकि यह मसला न्यायिक जांच के दायरे में आने से बच जाए।

धोनी का पूरा परिवार रांची में ही रहता है
पान सिंह धोनी और देवकी देवी के बेटे महेंद्र सिंह धोनी अपने तीन भाई-बहनों में सबसे छोटे हैं। उनके भाई नरेंद्र सिंह धोनी और बहन जयंती गुप्ता उनसे बड़े हैं। नरेंद्र राजनेता हैं और बहन अंग्रेजी की टीचर हैं। महेंद्र सिंह धोनी और उनकी पत्नी साक्षी धोनी की सात साल की एक बेटी जीवा भी है। यह परिवार अब बड़े गर्व से खुद को झारखंड का स्थायी निवासी बना चुका है, लेकिन अब पूरे परिवार के डोमिसाइल पर सवालिया निशान लगा दिया गया है।

अगर डोमिसाइल नहीं हुए तो क्या होगा ?
झारखंड में डोमिसाइल का मामला नया नहीं है। इससे पहले जब मुख्यमंत्री रघुबर दास की अगुवाई वाली बीजेपी सरकार थी, तो उस समय सीएम ने इसके लिए कटऑफ साल 1985 रखना चाहा था। इस नए फैसले से झारखंड का स्थानीय निवासी नहीं माने जाने का यह मतलब नहीं है कि कोई वहां रह नहीं सकता। इसका असर सिर्फ सरकारी और निजी नौकरियों में प्राथमिकता पर पड़ सकता है। यानी नौकरियों में जो स्थानीय होंगे, उन्हें प्राथमिकता दी जा सकती है और जो स्थानीय नहीं होंगे, तो चाहे उनकी कई पुश्तें झारखंड में रह रही हों, वह स्थानीय नहीं माने जाएंगे।












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