धर्म संसद विवाद: सशस्त्र बलों के 5 पूर्व प्रमुखों ने राष्ट्रपति और पीएम मोदी को लिखा पत्र
नई दिल्ली, 31 दिसंबर: हाल ही में हरिद्वार में एक धर्म संसद का आयोजन किया गया था। जिसमें शामिल कुछ वक्ताओं ने अल्पसंख्यकों की आलोचना की। साथ ही उनके नरसंहार का आह्वान किया। तब से इस मामले को लेकर सियासत जारी थी, लेकिन अब सशस्त्र बलों के पांच पूर्व चीफ ऑफ स्टाफ, नौकरशाहों समेत करीब 100 लोगों ने इस मामले में पीएम मोदी और राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को पत्र लिखा है।

पत्र में लिखा गया है कि हरिद्वार में 17 से 19 दिसंबर के बीच धर्म संसद आयोजित की गई थी। जिसमें हिंदु साधुओं और नेताओं ने भाषण दिया। इस दौरान मुसलमानों और अल्पसंख्यकों का नरसंहार करने का आह्वान किया गया, जिससे हम आहत हैं। इसके अलावा धर्म संसद में लगातार भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने की बात कही गई, जो सही नहीं है। पत्र में आगे लिखा गया कि हिंसा के लिए इस तरह का आह्वान आंतरिक रूप से समाज में असामंजस्य पैदा कर सकता है। साथ ही बाहरी ताकतों (दुश्मनों) को भी ये प्रोत्साहित करेगा।
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पत्र लिखने वालों के मुताबिक केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) में सभी धर्म के लोग एकजुटता से रहते हैं। ऐसे में इस तरह के आह्वानों से उन पर बुरा प्रभाव पड़ेगा। साथ ही किसी दूसरे समुदाय के लिए हिंसा भड़काना एक सभ्य समाज के नियमों के खिलाफ है। पत्र में इस बात का जिक्र भी किया गया कि उसके वक्ता अपने बयान पर अड़े हैं।
संत कालीचरण गिरफ्तार
इस धर्म संसद में महात्मा गांधी पर अमर्यादित टिप्पणी की गई थी। जिसके बाद छत्तीसगढ़ में संत कालीचरण के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवाया गया। इसके बाद रायपुर पुलिस खजुराहो पहुंची और उन्हें गिरफ्तार किया। अभी वो दो दिन की पुलिस रिमांड पर हैं। वहीं हरिद्वार पुलिस ने भी इस मामले में एक केस दर्ज किया है, लेकिन अभी तक उसमें कोई खास कार्रवाई नहीं हुई है।












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