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सजा में मजा काट रहा राम रहीम! 14वीं बार जेल से बाहर आया हत्या और रेप का दोषी, बार-बार रिहाई पर उठे सवाल

Ram Rahim Parole 2025: हरियाणा के रोहतक स्थित सुनारिया जेल में सजा काट रहे डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम (Gurmeet Ram Rahim) को एक बार फिर हरियाणा सरकार की ओर से 40 दिन की पैरोल दी गई है। मंगलवार, 8 अगस्त की सुबह लगभग साढ़े छह बजे राम रहीम को जेल से रिहा किया गया, जिसके बाद वह अपने काफिले के साथ सिरसा स्थित डेरे की ओर रवाना हो गए।

गौरतलब है कि राम रहीम को यह पैरोल रक्षाबंधन से पहले दी गई है। यह कोई पहली बार नहीं है जब उसे जेल से बाहर आने का मौका मिला है। साल 2020 से लेकर अब तक राम रहीम को 14 बार अस्थायी रूप से जेल से रिहाई मिल चुकी है। इनमें कई बार उसे फरलो और पैरोल का लाभ दिया गया है।

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Ram Rahim parole: अप्रैल में भी मिली थी 21 दिन की पैरोल

इससे पहले अप्रैल 2025 में राम रहीम को 21 दिन की फरलो मिली थी। उस दौरान डेरा सच्चा सौदा के स्थापना दिवस (29 अप्रैल) को लेकर राम रहीम को रिहा किया गया था। इससे पहले फरवरी 2025 में दिल्ली विधानसभा चुनावों से पहले भी उसे 30 दिन की पैरोल दी गई थी। तब भी वह सीधे सिरसा डेरे में जाकर रुका था।

इन रिहाइयों को लेकर कई बार राजनीतिक और सामाजिक हलकों में सवाल उठते रहे हैं, क्योंकि राम रहीम बलात्कार और हत्या जैसे गंभीर मामलों में दोषी करार दिया जा चुका है।

अब तक 326 दिन जेल से बाहर बिता चुका है राम रहीम

राम रहीम को पहली बार 2020 में अस्थायी तौर पर रिहाई मिली थी। इसके बाद से अब तक वह कुल 326 दिन जेल से बाहर रह चुका है। इसे लेकर जेल प्रशासन और हरियाणा सरकार पर बार-बार सवाल खड़े होते रहे हैं कि आखिर क्यों एक गंभीर अपराधी को बार-बार पैरोल या फरलो का लाभ दिया जा रहा है।

किस अपराध की सजा काट रहा है राम रहीम?

डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह को सीबीआई की विशेष अदालत (पंचकूला) ने अगस्त 2017 में दो साध्वियों के साथ बलात्कार के मामले में दोषी करार दिया था। अदालत ने राम रहीम को दो मामलों में 10-10 साल की सजा सुनाई थी, जो कुल मिलाकर 20 साल की सजा बनती है। इसके अलावा उस पर 30 लाख 20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया था।

सीबीआई (CBI) की चार्जशीट के अनुसार, डेरा की दो साध्वियों ने वर्ष 1999 में यौन शोषण का आरोप लगाया था, लेकिन उस समय कोई कार्रवाई नहीं हो सकी। बाद में वर्ष 2002 में एक गुमनाम पत्र के जरिए यह मामला सामने आया और इसके बाद सीबीआई को जांच सौंपी गई।

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छह साल की लंबी जांच के बाद वर्ष 2005 में पीड़िताओं के बयान दर्ज किए गए, जिसके आधार पर सीबीआई ने 2007 में अदालत में चार्जशीट दायर की। अंततः अगस्त 2017 में गुरमीत राम रहीम को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई गई।

राजनीतिक हलकों में उठे सवाल

राम रहीम की बार-बार रिहाई पर विपक्षी दलों ने हरियाणा सरकार पर पक्षपात और वोट बैंक की राजनीति करने का आरोप लगाया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राम रहीम का प्रभाव पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बड़ी संख्या में अनुयायियों पर है, और इसलिए चुनावी मौसम के आसपास उसकी रिहाई पर सवाल उठते रहे हैं।

गुरमीत राम रहीम सिंह जैसे गंभीर अपराधों में दोषी पाए गए व्यक्ति को बार-बार पैरोल और फरलो मिलना न्याय व्यवस्था और प्रशासनिक तटस्थता पर सवाल खड़े करता है। जहां एक ओर वह कानूनी रूप से दोषी है, वहीं दूसरी ओर उसकी सामाजिक और राजनीतिक पकड़ का प्रभाव उसकी रिहाई में देखा जा सकता है। अब देखना यह होगा कि आने वाले दिनों में इस फैसले को लेकर समाज और न्यायपालिका क्या रुख अपनाते हैं।

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